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यूजर्स की WhatsApp कॉल और मैसेजिंग की जासूसी करने के मामले में एक और 'बड़ा खुलासा'

[Edited By: Gaurav]

Thursday, 31st October , 2019 05:14 pm

स्मार्टफोन यूजर्स की व्हॉट्सएप कॉल और मैसेजिंग की जासूसी करने के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है.केंद्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस मामले में 4 नवंबर तक व्हॉट्सऐप से अपना जवाब मांगा है. Facebook के स्वामित्व वाला ऐप WhatsApp भारत समेत दुनिया भर का सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप है और इसका रिपोर्ट्स के अनुसार दुनियाभर में इसके यूजर्स की संख्या 1.5 अरब से ज्यादा है. इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ए​क दिन में 6 करोड़ मैसेज ऐप की जरिए भेजे जाते हैं. Facebook ने WhatsApp का अधिग्रहण साल 2014 में किया था जिसके बाद इस ऐप में कई नए व उपयोगी फीचर्स को ऐड किया गया था. 

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने व्हाट्सएप से 4 नवंबर तक विस्तृत जवाब मांगा है. गुरुवार को फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप ने कहा कि इजरायली स्पाईवेयर पीगासस भारतीय पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी कर रहा था.

इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता अमित माल्वीय ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने घटना की टाइमिंग पर ही सवाल उठा दिया है.बीजेपी नेता ने कहा कि व्हाट्सएप ने अगर उन लोगों से पहले संपर्क किया तो वे तब क्यों नहीं सामने आए. व्हाट्सएप ने उन लोगों को मैसेज भेजा है जिनकी जासूसी हुई है. माल्वीय ने कहा कि व्हाट्सएप उन नामों का खुलासा करे जिनकी जासूसी हुई है. 

ये  है पूरा मामला

दरअसल, व्हाट्सएप के उस खुलासे से हड़कंप मच जिसमें उसने कहा कि स्पाईवेयर पीगासस भारत में भी एक्टिव था और यहां के लोगों की भी जासूसी कर रहा था. व्हाट्सएप ने इंडियन एक्स्प्रेस को बताया है कि भारतीय पत्रकार और ह्यूमन राइट ऐक्टिविस्ट्स इस जासूसी का टार्गेट थे. हालांकि कंपनी ने ये नहीं बताया है कि इस स्पाईवेयर के जरिए कितने भारतीय लोगों की जासूसी की गई है. चूंकि पीगासस का इस्तेमाल कोई आम शख्स नहीं कर सकता है और इसे NSO Group ने सरकारों के लिए बनाया गया है.

गौरतलब है कि व्हाट्सएप ने कल ही अमेरिकी फेडरल कोर्ट में इजराली एजेंसी NSO Group पर मुकदमा किया है. वॉट्सऐप ने इल्जाम ये लगाया है कि NSO ग्रुप अपने पीगासस नाम के स्पाईवेयर के जरिए 1400 व्हाट्सएप यूजर्स को टार्गेट किया है और उनकी जासूसी की है. अब ये साफ नहीं है कि इनमें से कितने भारतीय थे.

कैसे काम करता है यह स्पाईवेयर

इस स्पाईवेयर का नाम Pegasus है. जैसी ही आपको कई वीडियो कॉल करता है तो साइबर हमला करने वाला शख्स एक कोड जारी करता है जिसके जरिए यह आपके फोन में इंस्टॉल हो जाता है. भले ही वीडियो कॉल को आपने रिसीव न किया हो. फोन में इंस्टॉल होने के बाद इसके जरिए आपके फोन, कॉल, वाइस कॉल, पासवर्ल्ड, कॉन्टेक्ट लिस्ट, कलेंडर इवेंट, माइक्रोफोन, कैमरे तक की डिटेल आसानी से पाई जा सकती है.

एनएसओ ने किया इनकार

वहीं इजरायल कंपनी ने ऐसी किसी भी आरोप से इनकार किया है और कहा कि इसका कोर्ट में सामना किया जाएगा. उसकी ओर से कहा गया है कि उसकी तकनीकि पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ करने के लिए नहीं है. साथ में यह भी कहा कि Pegasus वैध सरकारी एजेंसियों के लिए ही लाइसेंस मिला है.

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