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किसी को जीने नहीं दे रहा Jio ! बंद हो सकती हैं तीन बड़ी टेलीकॉम कंपनियां, पढ़िए क्या है इसका कारण

[Edited By: Gaurav]

Friday, 15th November , 2019 04:53 pm

देश में  टेलीकॉम सेवायें दे रहीं दिग्गज कंपनियां वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल बंदी की कगार पर हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा दूरसंचार विभाग के समायोजित सकल आय (एजीआर) की परिभाषा को बरकरार रखने के फैसले के बाद बकाया सांविधिक देनदारियों के लिए भारी खर्च के प्रावधान के चलते टेलीकॉम कंपनियों भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कुल मिलाकर करीब 74,000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. यह कॉरपोरेट इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा तिमाही घाटा है. इसमें वोडाफोन-आइडिया ने पुरानी सांविधिक देनदारियों के लिए दूसरी तिमाही में ऊंचे प्रावधान के चलते 50,921 करोड़ रुपए और भारती एयरटेल ने 23,045 करोड़ रुपए का नुकसान दिखाया है.

वोडाफोन-आइडिया ने कहा है कि वह न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने जा रही है. कंपनी का कहना है कि उसके कारोबार का चल पाना सरकार की ओर से मिलने वाली राहत और कानूनी मसलों के सकारात्मक समाधान पर निर्भर करेगा. एजीआर पर न्यायालय के फैसले के दूरसंचार उद्योग की वित्तीय स्थिति पर बड़े प्रभाव पड़ेंगे. एजीआर पर न्यायालय के फैसले के बाद वोडाफोन-आइडिया, एयरटेल और अन्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर सरकार की कुल 1.4 लाख करोड़ रुपए की पुरानी सांविधिक देनदारी बनती है.

इसके चलते पूरे दूरसंचार उद्योग में घबराहट का माहौल है. रिलायंस जियो के बाजार में प्रवेश करने के बाद से दूरसंचार कंपनियां वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं और उन पर अरबों डॉलर का कर्ज बकाया है. पिछले महीने न्यायालय ने एजीआर की सरकार द्वारा तय परिभाषा को सही माना था. इसके तहत कंपनियों की दूरसंचार सेवाओं के इतर कारोबार से प्राप्त आय को भी उनकी समायोजित सकल आय का हिस्सा मान लिया गया है. इसके चलते कंपनियों पर स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और राजस्व में सरकार की हिस्सेदारी जैसी मदों में देनदारी अचानक बढ़ गई है.

दूरसंचार विभाग के नवीनतम आकलन के मुताबिक भारती एयरटेल पर सरकार का पुराना सांविधिक बकाया 62,187 करोड़ रुपए और वोडाफोन-आइडिया पर 54,184 करोड़ रुपए बनता है. बीएसएनएल/एमटीएनएल पर भी ऐसी देनदारी का बोझ पड़ा है. एयरटेल पर ऐसे बकाये में टाटा समूह की दूरसंचार कंपनियों और टेलीनॉर इंडिया का बकाया भी शामिल है, क्योंकि उसने उनके स्पेक्ट्रम का अधिग्रहण कर रखा है.

दिवालिया हो सकती है कंपनी

इसी सप्ताह आदित्य बिड़ला समूह ने कहा था कि अगर सरकार समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) को लेकर 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी पर बड़ी राहत नहीं देती, तो वह कंपनी में और निवेश नहीं करेगा. ऐसे में वोडाफोन आइडिया दिवालिया हो जाएगी.

कारोबार को जारी रखना सरकारी राहत पर निर्भर

वोडाफोन ने कहा कि कारोबार को जारी रखने के लिए अब वह सरकारी राहत पर निर्भर है. कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘एजीआर के मसले पर कोर्ट के आदेश से उद्योग पर खासा असर पड़ा है.’

सरकार से मांगा था राहत पैकेज

वोडाफोन ने सरकार से स्पेक्ट्रम भुगतान के लिए दो साल का वक्त, लाइसेंस शुल्क में, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ब्याज और जुर्माने में छूट सहित एक राहत पैकेज की मांग की थी. वोडाफोन दुनिया की दूसरी बड़ी मोबाइल ऑपरेटर है और स्पेन व इटली में सुधार के संकेतों से उसके राजस्व में लगातार सुधार हो रहा है. कैलेंडर वर्ष 2019 की पहली छमाही में उसके सेवा राजस्व में 0.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. वहीं कंपनी ने मुश्किल दौर को देखते हुए पहली बार मई में अपने लाभांश में कटौती की थी.

यदि ये कंपनियां बंद हो जाती हैं, तो करोड़ों ग्राहकों पर इसका असर पड़ेगा.

 

- Vodafone is in loss of ₹50,000 Crore

- Airtel is in loss of ₹23,000 Crore
- BSNL is in loss of ₹14,000 Crore
- MTNL is in loss of ₹755 Crore
- BPCL is in loss of ₹750 Crore
- SAIL is in loss of ₹286 Crore
- AIR India is in loss of ₹4600 Crore
- Spice Jet is in loss of ₹463 Crore
- Indigo is in loss of ₹1062 Crore
- BHEL is in loss of ₹219 Crore
- India Post is in loss of ₹15,000 Crore
- GMR Infra is in loss of ₹561 Crore
- YES Bank is in loss of ₹600 Crore
- Union Bank is in loss of ₹1190 Crore
- PNB Bank is in loss of ₹4750 Crore
- Axis Bank is in loss of ₹112 Crore

- Reliance Jio is in profit of ₹990 Crore
- Adani is in profit of ₹102 Crore

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