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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन का विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने का विरोध किया

[Edited By: Rajendra]

Friday, 7th August , 2020 03:24 pm

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चीन का विश्व व्यापार संगठन (WTO) में प्रवेश करना सबसे खराब सौदों में से एक है। ओहियो में व्हर्लपूल कार्पोरेशन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में ट्रंप ने चीन का विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने का विरोध किया है। ट्रंप ने कहा कि चीन ने कई नियमों का उल्लंघन किया है। जिस तरह चीन ने नियम तोड़े हैं, उस तरह से आज तक किसी देश ने नहीं किया इसलिए चीन का डब्ल्यूटीओ में प्रवेश करना सही नहीं है।

पहले जनवरी में भी ट्रंप ने कहा था कि डब्ल्यूटीओ में अमेरिका के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया जा रहा है। यहां अभी भी भारत और चीन को विकासशील देश माना जा रहा है। ट्रंप के अनुसार, डब्ल्यूटीओ कई सालों से अमेरिका के साथ भेदभाव करता आ रहा है, जिसकी वजह से चीन आज यहां तक पहुंचा है। साल 2001 से चीन इस डब्ल्यूटीओ का मेंबर है।

मालूम हो कि ट्रंप प्रशासन ऐसी चीनी कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जो अमेरिका में सूचीबद्ध हैं और अमेरिकी ऑडिट प्रावधानों का पालन नहीं करती हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्ताव के मुताबिक न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज या नैस्डैक जैसे अमेरिकी शेयर बाजारों में सूचीबद्ध चीनी कंपनियां अमेरिकी नियामकों के लेखा परीक्षण के अधीन होंगी या उन्हें शेयर बाजार से हटा दिया जाएगा। 

रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय और प्रतिभूति तथा विनिमय आयोग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि जो चीनी कंपनियां अभी तक सूचीबद्ध नहीं हुई हैं, लेकिन अमेरिका में एक प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) की योजना बना रही हैं, उन्हें एनवाईएसई या नैस्डैक पर सार्वजनिक होने से पहले इन नियमों का पालन करना होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रतिभूति तथा विनिमय आयोग के अध्यक्ष जे क्लेटन ने कहा ये सिफारिशें कांग्रेस के कानून के अनुरूप हैं और बराबरी के मुकाबले के महत्व पर केंद्रित हैं। इस संबंध में अमेरिकी सीनेट ने मई में कानून पारित किया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। कानून के अनुसार तीन साल में इन नियमों का पालन नहीं करने वाली चीनी कंपनियों को शेयर बाजार से हटा दिया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन का ताजा कदम चीनी कंपनियों पर नकेल कसने की कोशिश का हिस्सा है।

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