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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन को लेकर काफी हमलावर, दो संस्थाओं पर प्रतिबंध, WHO में भारत ताइवान को समर्थन दे सकता हैं

[Edited By: Rajendra]

Saturday, 23rd May , 2020 11:44 am

चीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस के दुनियाभर में फैलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन को लेकर काफी हमलावर रहे हैं। अब ट्रंप प्रशासन ने चीन की दो संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें से एक संस्था सैन्य प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ा रही थी, तो दूसरी संस्था बीजिंग में चीन के मुस्लिमों पर हुए हमलों का समर्थन कर रही थी। दोनों को अमेरिकी प्रशासन ने प्रतिबंधित कर दिया है।

इसके अलावा अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने चीन, हांगकांग और केमैन आइलैंड्स में स्थित 24 चीनी वाणिज्यिक और सरकारी संस्थाओं को टारगेट किया है। इन सभी 33 संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट में जोड़ा गया, जिन्हें राष्ट्रीय-सुरक्षा को लेकर खतरे के रूप में माना जाता है या समझा जाता है कि ये सभी अमेरिका की विदेश नीति के विपरीत गतिविधियों में लगे हुए हैं।

जल्द ही सेवानिवृत्त होने जा रहीं अमेरिकी विदेश विभाग की दक्षिण व मध्य एशिया मामलों की सहायक सचिव एलिस वेल्स ने कहा था कि चीन ने सीपीईसी के नाम पर पाकिस्तान पर जो कर्ज लादा है, वह उस पर पुनर्विचार करे।

उन्होंने दक्षिण व मध्य एशिया के पत्रकारों के साथ वीडियो लिंक के जरिए की गई विदाई प्रेस कांफ्रेंस में कहा था, 'कोविड-19 जैसे संकट के समय यह वास्तव मे चीन के लिए जरूरी हो गया है कि वह पाकिस्तान को उस बोझ से बचाने के लिए कदम उठाए जो परभक्षी, अव्यवहारिक व अन्यायपूर्ण कर्जो के कारण उस पर पड़ने जा रहे हैं। '

वेल्स ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि चीन या तो इन कर्जो को माफ कर देगा या फिर इसे पाकिस्तान के लोगों के लिए एक न्यायपूर्ण और पारदर्शी करार में बदलने के लिए वार्ता की शुरुआत करेगा।'

वेल्स ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सीपीइसी परियोजना में चीन की सरकारी संस्थाओं को गैरमुनासिब तरीके से भारी मुनाफा पहुंचाया गया है और आज चीन के साथ पाकिस्तान का व्यापार असंतुलन बहुत अधिक हो गया है।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) मामले में अमेरिकी राजनयिक एलिस वेल्स के बयान पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया है और कहा है कि अमेरिका ने चीन और पाकिस्तान के संबंधों को खराब करने की नाकाम कोशिश की है।

पाकिस्तान स्थित चीनी दूतावास ने वेल्स के बयान पर कहा है कि वह अतीत में भी ऐसी 'बेबुनियाद' बातें करती रही हैं।

चीनी दूतावास ने अपने बयान में कहा कि 'हम पाकिस्तान को बराबर का भागीदार समझते हैं। हम पाकिस्तान से 'डू मोर' (अमेरिका द्वारा पाकिस्तान पर आतंक के खिलाफ और अधिक कार्रवाई करने का दबाव) की मांगें नहीं करते रहते हैं। हम पाकिस्तान के विकास में यकीन रखते हैं और कभी इसके अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देते। हमने हमेशा क्षेत्र में पाकिस्तान की सकारात्मक भूमिका को उजागर किया है। हमें किसी शिक्षक, विशेषकर अमेरिका जैसे शिक्षक की जरूरत नहीं है।'

पाकिस्तान ने भी वेल्स के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि सीपीईसी को लेकर कोई अंदेशा नहीं होना चाहिए, उसे इस परियोजना से लाभ हुआ है।

भारत और अमेरिका चीन को घेरने की प्लानिंग शुरू कर दिया हैं और जल्द ही चीन का पर्दाफाश हो जाएगा कि कोरोना को उसने कैसे और क्यों फैलाया। अमेरिका शुरु से ही कहता नजर आ रहा है कि चीन ने अपनी लैब में ही कोरोना को बनाया है हालांकि चीन अभी भी इस बात को मानने से इनकार कर रहा है लेकिन जल्द हो यह बात साबित भी हो जाएगा।

मिली जानकारी के अनुसार अमेरिका ताइवान को 18 करोड़ डॉलर के टॉरपोडो बेचेगा तो वहीं WHO में भारत ताइवान का समर्थन देकर चीन को बड़ा झटका दे सकता हैं। 

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