Trending News

टीवी एंकर से बनी बॉलीवुड की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री

[Edited By: Vijay]

Friday, 11th September , 2020 03:52 pm

स्मिता पाटिल बॉम्बे दूरदर्शन में मराठी में समाचार पढ़ा करती थीं। समाचार पढने से पहले उनके लिए साड़ी पहनना जरूरी होता था और स्मिता को जीन्स पहनना अच्छा लगता था तो स्मिता अक्सर न्यूज पढ़ने से पहले जीन्स के ऊपर ही साड़ी लपेट लिया करती थीं। स्मिता के फिल्मी करियर की शुरुआत अरुण खोपकर की डिप्लोमा फिल्म से हुई, लेकिन मुख्यधारा के सिनेमा में स्मिता ने 'चरणदास चोर' से अपनी मौजूदगी दर्ज की। इसके निर्देशक थे श्याम बेनेगल।

 श्याम बेनेगल कहते हैं कि मैं अपनी फिल्म 'निशांत' के लिए एक नए चेहरे की तलाश में था। मेरे एक साउंड रिकार्डिस्ट हुआ करते थे हितेन्दर घोष वो स्मिता पाटिल के दोस्त थे। हितेन्दर घोष ने मुझे बताया क मेरी एक दोस्त है स्मिता पाटिल। मैं उसके परिवार को जानता हूं।'

बेनेगल बताते हैं कि हितेन्दर घोष ने उन्हें बताआ कि वो पुणे से हैं लेकिन फिलहाल बॉम्बे में हैं और अपने पिता के साथ आयीं हैं। उनके पिता उस समय महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्री थे। जब मैं स्मिता से मिला तो मैंने तय किया कि फिल्म 'निशांत' में स्मिता को कास्ट करने से पहले मैं स्मिता का एक छोटा सा ऑडिशन लेना चाहता हूं और मैंने स्मिता को अपनी बाल फिल्म 'चरणदास चोर' में प्रिंसेस के रोल के लिए चुना।

वो बताते हैं, जब हम छत्तीसगढ में शूटिंग कर रहे थे तब मैंने पाया कि ये लडकी तो बहुत टैलेंटेड और इसमें भरपूर आत्मविश्वास है। तभी मैंने तय किया कि स्मिता ही मेरी फिल्म निशांत में काम करेंगी। जानें, आगे क्या हुआ...

साल 1977 स्मिता पाटिल के लिए एक अहम पड़ाव साबित हुआ इसी साल उनकी फिल्म 'भूमिका' आई इस फिल्म के लिए स्मिता पाटिल को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भूमिका से स्मिता पाटिल का जो सफर शुरू हुआ वो चक्र, निशांत, आक्रोश, गिद्ध, मिर्च मसाला जैसी फिल्मों तक जारी रहा। 1981 में आई फिल्म चक्र के लिए उन्हें एक बार फिर से नेशनल आवर्ड मिला।

 

 

 

Latest News

World News