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ट्रंप का ड्रैगन को बड़ा झटका, चीनी सेना के साथ सुरक्षा संबंधी लेन-देन पर लगाया बैन

[Edited By: Rajendra]

Friday, 13th November , 2020 02:10 pm

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन की 31 कंपनियों में अमेरिकी निवेश को प्रतिबंधित करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया है, जिनके बारे में अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि चीनी सेना के पास या तो उनका स्वामित्व है या वे उसके नियंत्रण में हैं. ट्रंप ने इस कार्यकारी आदेश पर गुरुवार को हस्ताक्षर किए. इस आदेश के मुताबिक कम्युनिस्ट चीनी सेना की कंपनियों में किसी भी रूप में निवेश करने वाली प्रतिभूतियों की खरीद पर प्रतिबंध लगाया गया है. यह कार्यकारी आदेश 11 जनवरी 2021 से लागू हो जाएगा।

ट्रंप ने अपने कार्यकारी आदेश में कहा कि चीन संसाधन हासिल करने के लिए अमेरिकी पूंजी का तेजी से दोहन कर रहा है अपनी सेना, खुफिया सेवा, अन्य सुरक्षा जरूरतों का विकास आधुनिकीकरण कर रहा है तथा जिससे अमेरिकी सेना को सीधे चुनौती दी जा सकती है. यह आदेश 31 चीनी कंपनियों पर लागू है, जिनके बारे में ट्रंप का कहना है कि इनसे चीन की सेना के विकास आधुनिकीकरण में मदद मिल रही है ये सीधे अमेरिकी सुरक्षा को खतरा है.

एक रिपोर्ट में बताया कि प्रतिबंधित कंपनियों में स्मार्टफोन निर्माता हुआवेई वीडियो निगरानी उपकरण बनाने वाली कंपनी हिकविजन शामिल हैं। इसके अलावा इस सूची में चाइना टेलीकॉम चाइना मोबाइल भी हैं, जो न्यूयॉर्क शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं. ट्रंप ने कहा कि ये कंपनियां अमेरिकी निवेशकों को प्रतिभूतियां बेचकर पूंजी जुटाती हैं चीन ने अपने सैन्य विकास आधुनिकीकरण के लिए अमेरिकी निवेशकों का शोषण किया.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने वित्त मंत्री को रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, राष्ट्रीय खुफिया विभाग के निदेशक और अन्य महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुखों से सलाह लेकर पर्याप्त कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया है। वह आवश्यक कदम उठाकर इस कार्यकारी आदेश को लागू करेंगे।

बता दें कि दक्षिण चीन सागर में चीनी सेना की बढ़ती हुई गतिविधियों के कारण दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। चीन ने अमेरिका पर दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य गतिविधियों को बढ़ाने का आरोप लगाया है। ताइवान के मुुद्दे को लेकर भी चीन और अमेरिका में टकराव की स्थिति है। अमेरिका ने कुछ माह पहले चीन की 24 कंपनियों को काली सूची में यह कहते हुए डाल दिया था कि यह कंपनियां दक्षिण चीन सागर में मानव-निर्मित द्वीप बनाने में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की मदद कर रही हैं।

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