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पीएफ के खाते का देखना है बैलेन्स या निकालना है पैसा तो ई- नामिनेशन है अनिवार्य

[Edited By: Vijay]

Tuesday, 11th January , 2022 11:06 am

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने खाताधारकों के लिए ई-नॉमिनेशन जरूरी कर दिया है। खाताधारक ई-नॉमिनेशन के बिना पीएफ पासबुक नहीं देख पाएंगे। अभी तक ऐसा करना जरूरी नहीं था। लेकिन, अब पीएफ खाते का बैलेंस देखने को लिए ई-नॉमिनेशन अनिवार्य है। खाताधारक अभी तक ई-नॉमिनेशन के बिना भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठनकी वेबसाइट पर जाकर आसानी से पीएफ बैलेंस और पासबुक देख सकते थे।

देनी होती हैं ये जानकारियां

ईपीएफ खाते में ई-नॉमिनेशन के लिए सबसे पहले नॉमिनी का नाम देना होता है। उसका पता और खाताधारक के साथ संबंध को बताना होता है। नॉमिनी की जन्मतिथि के साथ यह भी बताना होता है कि पीएफ खाते में जमा पैसे का कितना फीसदी हिस्सा उसे देना है। नॉमिनी अगर नाबालिग है तो उसके अभिभावक का नाम और पता देना पड़ता है। नॉमिनी का हस्ताक्षर या उसके अंगूठे का निशान देना जरूरी है।

इसलिए है जरूरी

किसी भी बचत योजना खाते के मामले में नॉमिनेशन जरूरी है। इससे खाताधारक की मौत के बाद पैसा उस व्यक्ति तक पहुंच जाता है, जिसे खाताधारक अपने बाद पहुंचाना चाहता था। ईपीएफ और इंप्लाई पेंशन स्कीम के मामले में भी नॉमिनेशन करना चाहिए ताकि ईपीएफओ सदस्य की असमय मौत के बाद नॉमिनी को यह फंड समय से मिल जाए

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने खाताधारकों के लिए ई-नॉमिनेशन जरूरी कर दिया है। खाताधारक ई-नॉमिनेशन के बिना पीएफ पासबुक नहीं देख पाएंगे। अभी तक ऐसा करना जरूरी नहीं था। लेकिन, अब पीएफ खाते का बैलेंस देखने को लिए ई-नॉमिनेशन अनिवार्य है। खाताधारक अभी तक ई-नॉमिनेशन के बिना भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठनकी वेबसाइट पर जाकर आसानी से पीएफ बैलेंस और पासबुक देख सकते थे।

देनी होती हैं ये जानकारियां

ईपीएफ खाते में ई-नॉमिनेशन के लिए सबसे पहले नॉमिनी का नाम देना होता है। उसका पता और खाताधारक के साथ संबंध को बताना होता है। नॉमिनी की जन्मतिथि के साथ यह भी बताना होता है कि पीएफ खाते में जमा पैसे का कितना फीसदी हिस्सा उसे देना है। नॉमिनी अगर नाबालिग है तो उसके अभिभावक का नाम और पता देना पड़ता है। नॉमिनी का हस्ताक्षर या उसके अंगूठे का निशान देना जरूरी है।

इसलिए है जरूरी

किसी भी बचत योजना खाते के मामले में नॉमिनेशन जरूरी है। इससे खाताधारक की मौत के बाद पैसा उस व्यक्ति तक पहुंच जाता है, जिसे खाताधारक अपने बाद पहुंचाना चाहता था। ईपीएफ और इंप्लाई पेंशन स्कीम के मामले में भी नॉमिनेशन करना चाहिए ताकि ईपीएफओ सदस्य की असमय मौत के बाद नॉमिनी को यह फंड समय से मिल जाए

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