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चीन सीमा पर भारत के साथ तनाव बढ़ा, अमेरिका ने भारत का साथ देते हुए चीन के रवैये की आलोचना की

[Edited By: Rajendra]

Thursday, 21st May , 2020 12:13 pm

चीन सीमा पर भारत के साथ तनाव बढ़ा रहा है. कोरोना काल में जब सारी दुनिया कोरोना से निपटने की तैयारी कर रही है तो चीन इस तरह की उकसावे की कार्रवाई के जरिए क्या हासिल करना चाहता है? सच्चाई ये है कि चीन भारत के साथ तनाव बढ़ाकर एक साथ कई लक्ष्य हासिल करने की तैयारी कर रहा है. चीन कोरोना से दुनिया का ध्यान तो हटाना ही चाहता है. साथ ही भारत के साथ विवाद बढ़ाने की एक वजह दुनिया की नजरों में भारत का उंचा होता कद भी है. जिसकी वजह से अमेरिका समेत तमाम बड़े देश भारत को आर्थिक और रणनीतिक समर्थन दे रहे हैं.

इस बीच बुधवार को अमेरिका ने भारत का साथ देते हुए चीन के रवैये की आलोचना की है। अमेरिका की वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ ने चीन के व्यवहार को उकसाने और परेशान करने वाला बताया है।

चीन इसलिए भी तमतमाया है क्योंकि कोरोना काल में चीन की चालबाजियों को देखकर कई देश अपनी कंपनियों को चीन से हटा रहे हैं. ये कंपनियां भारत समेत जिन देशों का रुख कर रही है चीन उनसे विवाद कर रहा है. तीसरी वजह चीन की विस्तारवादी नीति है जिसमें दूसरे देशों की जमीन हड़पने की कोशिश में वो हमेशा लगा रहता है.

भारतीय और चीनी सेनाओं ने तीखी झड़प के करीब दो सप्ताह बाद आक्रामक रूख अपनाते हुए लद्दाख में गलवान घाटी और पांगोंग त्सो झील के आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती कर दी है। सैन्य सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। भारत के शीर्ष सैन्य अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। वहीं अमेरिका ने कहा कि चीनी सैनिकों का आक्रामक व्यवहार चीन द्वारा पेश खतरे की याद दिलाता है।

वेल्स ने दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रमता की भी चर्चा की। पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करने वाले चीन का वियतनाम, मलेशिया, फिलिपींस, ब्रूनेई और ताइवान के साथ विवाद है। उसने दक्षिण चीन सागर में कई द्विपों पर सैन्य ठिकाने बना लिए हैं। यह इलाका खनिज का धनी है और वैश्विक व्यापार के लिए भी अहम रूट है।

वेल्स ने कहा, ''इसलिए आप देख रहे हैं कि एक समान विचार वाले देश एकत्रति हो रहे हैं। चाहे वह आशियान के जरिए या या दूसरे कूटनीतिक समूहों के जरिए।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका, जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया और दूनिया के दूसरे देश द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने आर्थिक सिद्धातों को लागू करने का प्रयास कर रहे हैं, जो सबके लिए मुक्त और खुले व्यापार की बात करता है।

उन्होंने कहा, ''हम एक ऐसा वैश्विक तंत्र चाहते हैं जिसमें सभी का फायदा हो ना कि ऐसा कोई सिस्टम जिसमें चीन का आधिपत्य हो। मुझे लगता है कि सीमा विवाद का यह उदाहरण चीन द्वारा उत्पन्न खतरे की याद दिलाता है।'

गालवान के आसपास का क्षेत्र पिछले छह दशकों से दोनों पक्षों के बीच विवाद का बिंदु रहा है। सूत्रों ने कहा कि चीनी पक्ष ने गलवान घाटी क्षेत्र में बड़ी संख्या में टेंट लगा दिए हैं। इसके बाद भारत ने भी इलाके में चौकसी बरतने के लिए अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं। सूत्रों ने कहा कि चीनी पक्ष ने भारत द्वारा गलवान नदी के आसपास एक महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण पर आपत्ति जताई है। 5 मई को लगभग 250 भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और डंडों के साथ झड़प हुयी। इसमें दोनों तरफ के कई सैनिक घायल हो गए।

लेकिन ये भी एक बहुत बड़ी सच्चाई है कि चीन और भारत की सीमा दुनिया में सबसे लंबी विवादित लेकिन शांत सीमा है. जिसमें 1975 के बाद से कभी गोलियां नहीं चली हैं. दोनों देशों ने हमेशा आपसी बातचीत से मामले को हल किया है. लेकिन चीन ने कोरोना काल में पूरी दुनिया से दुश्मनी पाल ली है. छोटे देशों से निपटना चीन के लिए आसान है लेकिन भारत को आंख दिखाना चीन को इतना भारी पड़ सकता है. जिसकी उसने उम्मीद नहीं की होगी.

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