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सुप्रीम कोर्ट ने जम्‍मू-कश्‍मीर में लगी पाबंदियों की समीक्षा का दिया आदेश

[Edited By: Rajendra]

Friday, 10th January , 2020 12:55 pm

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान खत्म करने के बाद लगाए गए प्रतिबंधों की एक हफ्ते के अंदर समीक्षा करने को कहा है. उच्च्तम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाली सभी संस्थाओं में इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने के लिए कहा है, साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि लम्बे समय तक इंटरनेट पर पाबंदी और धारा 144 का लगाया जाना सरकार द्वारा अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने जैसा है.

कोर्ट ने सरकार को घाटी को लेकर जारी किए गए सभी आदेश को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है. कोर्ट के इस निर्देश के बाद नरेंद्र मोदी सरकार को अब पाबंदी से संबंधित सभी जानकारियों को सामने रखना होगा.

न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बीआर गवई की तीन सदस्यीय बेंच ने इन प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली गुलाम नबी आजाद और अन्य की याचिकाओं पर पिछले साल 27 नवंबर को सुनवाई पूरी की थी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ी बड़ी बातें...

अभिव्यक्ति की आजादी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट मौलिक अधिकार तो नहीं है, लेकिन अभिव्‍यक्ति की आजादी की ही तरह है. इंटरनेट के जरिये होने वाले सभी कारोबार या पेशे संविधान के अनुच्‍छेद-19 के तहत संरक्षित हैं. कोर्ट ने कहा कि अनिश्चितकाल के लिए इंटरनेट बंद नहीं किया जा सकता है. बहुत जरूरी होने पर तय समय के लिए इस पर रोक लगाई जा सकती है.

बहाल हो इटंरनेट सेवा

कोर्ट ने सभी जरूरी सेवाओं के लिए 7 दिन के अंदर इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने के लिए कहा है. उच्च्तम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, bZ csfdax जैसी आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाली सभी संस्थाओं में इंटरनेट सेवाओं को तत्‍काल बहाल करने के लिए कहा है.

धारा-144 मनमर्जी से नहीं लगा सकते

कोर्ट ने कहा है कि आप मनमर्जी से धारा-144 लागू नहीं कर सकते. लोगों को अधिकार होगा कि वे इसे कोर्ट में चुनौती दें. कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा-144 का इस्तेमाल किसी के विचारों को दबाने के लिए नहीं किया जा सकता.

पाबंदियों पर रिव्यू

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सभी पाबंदियों पर एक हफ्ते में फिर से रिव्यू करने को कहा है. साथ ही इसकी जानकारी को पब्लिक डोमेन में लाने को कहा है ताकि लोग कोर्ट जा सकें.

प्रेस की आज़ादी अहम

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि आज के लोकतंत्र में प्रेस की आज़ादी बेहद अहम है. कोर्ट ने कहा कि हम नागरिकों की आजादी के अधिकार और सुरक्षा के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहे हैं |

इस फैसले पर कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने फैसले के बाद पीएम मोदी और अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट के महत्व को मौलिक अधिकार बताते हुए मोदी सरकार की अवैध गतिविधियों को साल 2020 का पहला बड़ा झटका दिया है. उन्होंने कहा कि यह मोदी और शाह के लिए दोहरे झटके की तरह है, जहां साफ हो गया कि धारा 144 लगाकर असंतोष का दमन नहीं किया जा सकता है. सुरजेवाला ने कहा कि मोदी जी को याद दिलाया गया कि राष्ट्र संविधान के सामने झुकता है उनके सामने नहीं |

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