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सायरस मिस्त्री मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के फैसले पर स्टे दिया

[Edited By: Rajendra]

Friday, 10th January , 2020 02:33 pm

टाटा सन्स ने अपीलेट ट्रिब्यूनल के 18 दिसंबर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने मिस्त्री को टाटा सन्स के चेयरमैन पद से हटाने के फैसले को गलत बताते हुए बहाली के आदेश दिए थे। सायरस मिस्त्री मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के फैसले पर शुक्रवार को रोक लगा दी। चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े की बेंच ने यह स्टे दिया।

सुप्रीम कोर्ट का स्टे अपीलेट ट्रिब्यूनल के पूरे फैसले पर रोक लागू होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल के फैसले में बुनियादी गलतियां थीं, हमने मामले को विस्तार से सुना है। मिस्त्री ने चेयरमैन पद पर बहाली की अपील ही नहीं की थी, लेकिन ट्रिब्यूनल ने आदेश दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने टाटा सन्स को आदेश दिया है कि वह कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन की धारा 25 का इस्तेमाल नहीं करे। यानी टाटा सन्स माइनॉरिटी शेयरहोल्डर पर शेयर बेचने का दबाव नहीं डाल सकती। मिस्त्री परिवार के पास टाटा सन्स के 18.4% शेयर हैं।

मिस्त्री परिवार की कंपनी सायरस इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर वरिष्ठ वकील सी ए सुंदरम ने दलील रखी। उन्होंने अपील की थी कि ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक लगाने की बजाय दो हफ्ते का नोटिस देकर जवाब मांगना चाहिए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल का फैसला पहली नजर में ही सही नहीं लग रहा। टाटा सन्स का पक्ष अभिषेक मनु सिंघवी, हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी और मोहन पारासरन ने रखा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही मिस्त्री कह चुके थे कि वे टाटा सन्स के चेयरमैन या टीसीएस, टाटा टेली या टाटा इंडस्ट्रीज के निदेशक बनने के इच्छुक नहीं हैं। लेकिन, माइनॉरिटी शेयरहोल्डर के नाते अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सभी विकल्प अपनाएंगे। इनमें टाटा सन्स के बोर्ड में जगह पाना भी शामिल है, पिछले 30 साल से यह इतिहास रहा है। टाटा सन्स के कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाना और पारदर्शिता लाना भी प्राथमिकता है।

2012 में रतन टाटा के रिटायरमेंट के बाद मिस्त्री टाटा सन्स के चेयरमैन बने थे। चेयरमैन पद से हटाने के बाद मिस्त्री ने दिसंबर 2016 में टाटा सन्स की अन्य कंपनियों के निदेशक पद से खुद ही इस्तीफा दे दिया और एनसीएलटी चले गए। इसके बाद मिस्त्री टाटा सन्स के बोर्ड से भी निकाल दिए गए थे।

 

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