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ऑस्ट्रेलियाई सरकार का रिएक्शन जब प्रिंट मीडिया ने किया ''फ्रंट पेज ब्लैक आउट'', प्रेस की जासूसी और गोपनीयता हुई अक्रामक

[Edited By: Admin]

Tuesday, 22nd October , 2019 02:13 pm

ऑस्ट्रेलिया की सरकार द्वारा मीडिया पर लगाम लगाने की कोशिशों का विरोध करने के लिए वहां के तमाम बड़े अखबारों ने एकजुट होकर अपना पहला पन्ना ब्लैक आउट छापा. मीडिया के इस कदम के बाद इंटरनेशनल लेवल पर यह मामला सुर्खियों में आ गया है. अखबारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार का सख्त कानून उन्हें लोगों तक जानकारियां ला पाने से रोक रहा है. जानिए क्या है पूरा मामला.

सोमवार की सुबह ऑस्ट्रेलिया में एक अभूतपूर्व घटना  सामने आई थी जब देश के  बड़े अखबारों का पहला पन्ना काला छापा गया. अखबारों ने देश में मीडिया पर लगाम लगाने की कोशिशों का विरोध करने के लिए ये कदम उठाया है. अखबारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार का सख्त कानून उन्हें लोगों तक जानकारियां ला पाने से रोक रहा है. अखबारों ने पन्ने काले रखने का ये तरीका इस साल जून में ऑस्ट्रेलिया के एक बड़े मीडिया समूह ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी) के मुख्यालय और एक पत्रकार के घर पर छापे मारने की घटना को लेकर जारी विरोध के तहत उठाया.

ये छापे व्हिसलब्लोअर्स से लीक हुई जानकारियों के आधार पर प्रकाशित किए गए कुछ लेखों के बाद मारे गए थे. अखबारों के इस अभियान - राइट टू नो कोएलिशन - का कई टीवी, रेडियो और ऑनलाइन समूह भी समर्थन कर रहे हैं. ये अभियान चलाने वालों का कहना है कि पिछले दो दशकों में ऑस्ट्रेलिया में ऐसे सख्त सुरक्षा कानून लाए गए हैं जिससे खोजी पत्रकारिता को खतरा पहुंच रहा है.

पिछले साल नए कानूनों लाए गए जिसके बाद मीडिया संगठन पत्रकारों और व्हिसलब्लोअर्स को संवेदनशील मामलों की रिपोर्टिंग में छूट दिए जाने के लिए अभियान चला रहे हैं.

गोपनीयता की संस्कृति

ऑस्ट्रेलिया के अखबारों का काली स्याही से रंगा पहला पन्ना
ऑस्ट्रेलिया के अखबारों का काली स्याही से रंगा पहला पन्ना - फोटो : BBC
सोमवार को देश के सबसे बड़े अखबार और उसके प्रतियोगियों ने एकजुटता दिखाते हुए अपने मुख पृष्ठों पर लिखे सारे शब्दों को काली स्याही से पोत दिया और उन पर एक लाल मुहर लगा दिया जिस पर लिखा था- "सीक्रेट". इन अखबारों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों की वजह से रिपोर्टिंग पर अंकुश लगाया जा रहा है और देश में एक "गोपनीयता की संस्कृति" बन गई है.

सरकार का कहना है कि वो प्रेस की आजादी का समर्थन करती है मगर "कानून से बड़ा कोई नहीं" है. जून में एबीसी के मुख्यालय और न्यूज कॉर्प ऑस्ट्रेलिया के एक पत्रकार के घर पर छापे मारे जाने के बाद काफी विरोध हुआ था. 

मीडिया संगठनों का कहना था कि ये छापे लीक की गई जानकारियों के आधार कुछ रिपोर्टों के प्रकाशन के बाद मारे गए. इनमें एक रिपोर्ट में युद्ध अपराध के आरोप लगाए गए थे जबकि एक अन्य रिपोर्ट में एक सरकारी एजेंसी पर ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की जासूसी का आरोप लगाया गया था.

मीडिया ने एकजुटता दिखाई

ऑस्ट्रेलिया के अखबारों का काली स्याही से रंगा पहला पन्ना
ऑस्ट्रेलिया के अखबारों का काली स्याही से रंगा पहला पन्ना - फोटो : BBC
न्यूज कॉर्प ऑस्ट्रेलिया के एग्जेक्यूटिव चेयरमैन ने अपने अखबारों के मुख पृष्ठों की तस्वीर ट्वीट की और लोगों से सरकार से ये सवाल पूछने का आग्रह किया- "वो हमसे क्या छिपाना चाह रहे हैं?" वहीं न्यूज कॉर्प के मुख्य प्रतिद्वंद्वी- नाइन - ने भी अपने अखबारों 'सिडनी मॉर्निंग हेरल्ड' और 'द एज' के मुख पृष्ठ काले छापे.

एबीसी के एमडी डेविड एंडरसन ने कहा, "ऑस्ट्रेलिया में दुनिया का सबसे गोपनीय लोकतंत्र बनने का खतरा बन रहा है". मगर ऑस्ट्रेलिया सरकार ने रविवार को फिर दोहराया कि इन छापों को लेकर तीन पत्रकारों के खिलाफा अभियोग चलाया जा सकता है.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि प्रेस की आजादी महत्वपूर्ण है मगर कानून का राज कायम रहना चाहिए. उन्होंने कहा, "वो मुझ पर भी लागू होता है, या किसी पत्रकार पर भी, या किसी पर भी." ऑस्ट्रेलिया में प्रेस की आजादी पर एक जाँच की रिपोर्ट अगले साल संसद में पेश की जाएगी.

News Corp Australia की पत्रकार हैं Annika Smethurst. 15 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलियन फ़ेडरल पुलिस ने इनके घर पर छापा मारा. घर की तलाशी ली. Annika पर सरकार का ये आरोप है कि उन्होंने एक ऐसी जानकारी छापी है जिसे Official Secret के तहत सरकार सीक्रेट जानकारी मानती है. पत्रकार ने जो जानकारी छापी थी वो उस ऐक्ट का हिस्सा था, जिसे सरकार लाई है. इस ऐक्ट के पास होने के बाद सरकार किसी भी नागरिक की जासूसी करा सकती है.

अभी जो नियम हैं उसके हिसाब से ऑस्ट्रेलियन फ़ेडरल पुलिस और डोमेस्टिक स्पाई एजेंसी ASIO के पास ताक़त है कि वो वारंट के आधार पर किसी भी नागरिक की जासूसी करा सकते हैं. प्रेस पर ऑस्ट्रेलियन सरकार की कार्यवाहियों को चैलेंज करने के लिए पत्रकार हाई कोर्ट गए हैं.

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