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हिन्दी मीडिया का पहला रेमॉन मैगसेसे अवॉर्ड लेने फिलीपीन्स पहुंचे पत्रकार रवीश कुमार, नए जमाने के एंकर्स को कही ये बात

[Edited By: Gaurav]

Friday, 6th September , 2019 04:26 pm

एशिया का नोबल पुरस्कार कहे जाने वाले रेमॉन मैगसेसे अवॉर्ड लेने के लिए पत्रकार रवीश कुमार फिलिपिंस की राजधानी मनीला पहुंच चुके हैं। यह पुरस्कार उन्हें 9 सितंबर को दिया जाएगा।  एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर रवीश कुमार ने अपने संबोधन के बाद हुए सवाल-जवाब सेशन में कहा, ''मैं रोजाना 2000 से 5000 शब्द लिखता हूं क्योंकि यह आपके माइंडसेट को क्लियर रखता है. मुझे ऐसा दिवंगत पत्रकार प्रभास जोशी ने कहा था. उन्होंने ही मुझे सुझाव दिया था कि रोजाना 2000 शब्द लिखने चाहिए. मुझे लगा कि वह मजाकिया लहजे में कह रहे हैं और मैंने पलटकर उनसे पूछा कि क्या आप ऐसा करते हैं तो उनका जवाब हां में था. उसके बाद से मैं आज भी रोजाना 2000 शब्द से ज्यादा लिखता हूं. कई बार 5000 से ज्यादा बार कई मुद्दों पर लिखता रहता हूं.''

रैमॉन मैगसेसे के मंच से रवीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा, ''भारत चांद पर पहुंचने वाला है. गौरव के इस क्षण में मेरी नज़र चांद पर भी है और ज़मीन पर भी, जहां चांद से भी ज़्यादा गहरे गड्ढे हैं. दुनियाभर में सूरज की आग में जलते लोकतंत्र को चांद की ठंडक चाहिए. यह ठंडक आएगी सूचनाओं की पवित्रता और साहसिकता से, न कि नेताओं की ऊंची आवाज़ से. सूचना जितनी पवित्र होगी, नागरिकों के बीच भरोसा उतना ही गहरा होगा. देश सही सूचनाओं से बनता है. फेक न्यूज़, प्रोपेगंडा और झूठे इतिहास से भीड़ बनती है. रैमॉन मैगसेसे फाउंडेशन का शुक्रिया, मुझे हिन्दी में बोलने का मौका दिया, वरना मेरी मां समझ ही नहीं पातीं, कि क्या बोल रहा हूं. आपके पास अंग्रेज़ी में अनुवाद है और यहां सब-टाइटल हैं.''

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उन्होंने कहा, दो महीने पहले जब मैं 'Prime Time' की तैयारी में डूबा था, तभी सेलफोन पर फोन आया. कॉलर आईडी पर फिलीपीन्स फ्लैश कर रहा था. मुझे लगा कि किसी ट्रोल ने फोन किया है. यहां के नंबर से मुझे बहुत ट्रोल किया जाता है. अगर वाकई वे सारे ट्रोल यहीं रहते हैं, तो उनका भी स्वागत है, मैं आ गया हूं.

रवीश कुमार ने आगे कहा, ''ख़ैर, फिलीपीन्स के नंबर को उठाने से पहले अपने सहयोगियों से कहा कि ट्रोल की भाषा सुनाता हूं. मैंने फोन को स्पीकर फोन पर ऑन किया, लेकिन अच्छी-सी अंग्रेज़ी में एक महिला की आवाज़ थी, "May I please speak to Mr Ravish Kumar...?" हज़ारों ट्रोल में एक भी महिला की आवाज़ नहीं थी. मैंने फोन को स्पीकर फोन से हटा लिया. उस तरफ से आ रही आवाज़ मुझसे पूछ रही थी कि मुझे इस साल का रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार दिया जा रहा है. मैं नहीं आया हूं, मेरी साथ पूरी हिन्दी पत्रकारिता आई है, जिसकी हालत इन दिनों बहुत शर्मनाक है. गणेश शंकर विद्यार्थी और पीर मूनिस मोहम्मद की साहस वाली पत्रकारिता आज डरी-डरी-सी है. उसमें कोई दम नहीं है. अब मैं अपने विषय पर आता हूं.''

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https://www.youtube.com/watch?v=-koRFCFEbd4

न्यूज चैनलों से रिपोर्ट खत्म किए जा चुके

रवीश कुमार ने मौजूदा पत्रकारिता के स्वरूप पर भी चिंता जताई उन्होंने कहा कि आज न्यूज चैनलों से रिपोर्टर खत्म किए जा चुके हैं और अब कोई भी इन्विस्टिगेट करके खबर निकालने वाला नहीं है. रवीश कुमार ने कहा कि अब न्यूज चैनलों के पास जिम जाने वाले और चॉकलेटी चेहरे वाले एंकर बचे हैं जो कार्यक्रम के दौरान अपनी 'मसल पावर' दिखाते हैं.  

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पीएम मोदी का बधाई न देना भी बधाई है, कोई बात नहीं

रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार ग्रहण करने के लिए मनीला पहुंचे NDTV के रवीश कुमार से जब एक सवाल पूछा गया कि उनको पीएम मोदी ने अभी तक बधाई नहीं दी है तो इस पर उन्होंने कहा, कोई बात नहीं पीएम मोदी ने बधाई नहीं दी. उनका बधाई नहीं देना भी बधाई है.' आपको बता दें कि रवीश कुमार को 9 सितंबर को रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. इस सम्मान को पाने वाले रवीश कुमार हिंदी मीडिया के पहले पत्रकार हैं. रवीश कुमार इस सम्मान के लिए फिलीपींस के मनीला से पहुंच गए हैं. रैमॉन मैगसेसे के मंच से उन्होंने भाषण भी दिया. रवीश कुमार ने अपनी स्पीच में कहा, "नागरिकता के लिए ज़रूरी है कि सूचनाओं की स्वतंत्रता और प्रामाणिकता हो. आज स्टेट का मीडिया और उसके बिज़नेस पर पूरा कंट्रोल हो चुका है.

मीडिया पर कंट्रोल का मतलब है, आपकी नागरिकता का दायरा छोटा हो जाना. मीडिया अब सर्वेलान्स स्टेट का पार्ट है. वह अब फोर्थ एस्टेट नहीं है, बल्कि फर्स्ट एस्टेट है. प्राइवेट मीडिया और गर्वनमेंट मीडिया का अंतर मिट गया है. इसका काम ओपिनियन को डायवर्सिफाई नहीं करना है, बल्कि कंट्रोल करना है. ऐसा भारत सहित दुनिया के कई देशों में हो रहा है.
उन्होंने कहा, "यह वही मीडिया है, जिसने अपने खर्चे में कटौती के लिए 'सिटिज़न जर्नलिज़्म' को गढ़ना शुरू किया था. इसके ज़रिये मीडिया ने अपने रिस्क को आउटसोर्स कर दिया. मेनस्ट्रीम मीडिया के भीतर सिटिज़न जर्नलिज़्म और मेनस्ट्रीम मीडिया के बाहर के सिटिज़न जर्नलिज़्म दोनों अलग चीज़ें हैं, लेकिन जब सोशल मीडिया के शुरुआती दौर में लोग सवाल करने लगे, तो यही मीडिया सोशल मीडिया के खिलाफ हो गया. न्यूज़रूम के भीतर ब्लॉग और वेबसाइट बंद किए जाने लगे. आज भी कई सारे न्यूज़रूम में पत्रकारों को पर्सनल ओपिनियन लिखने की अनुमति नहीं है."


जब 'कश्मीर टाइम्स' की अनुराधा भसीन भारत के सुप्रीम कोर्ट जाती हैं, तो उनके खिलाफ प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया कोर्ट चला जाता है. यह कहने कि कश्मीर घाटी में मीडिया पर लगे बैन का वह समर्थन करता है. मेरी राय में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी का दफ्तर एक ही बिल्डिंग में होना चाहिए.

रवीश कुमार को 9 सितंबर को रेमन मैग्सेसे सम्मान दिया जाएगा. भारतीय समयानुसार दोपहर दो बजे उन्हें यह सम्मान दिया जाएगा.

रेमन मैग्सेसेइमेज कॉपीरइट@MAGSAYSAYAWARD

रवीश कुमार ने अपने संबोधन में लोकतंत्र को बेहतर बनाने में सिटिज़न जर्नलिज़्म की ताकत विषय पर अपनी बात रखी. रवीश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र जल रहा है और उसे अब संभालने की ज़रूरत है और इसके लिए साहस की ज़रूरत है. ज़रूरत है कि हम जो सूचना दें वो सही हो. यह किसी नेता की तेज़ आवाज़ से बेहतर नहीं हो सकता है.

उन्होंने कहा कि हम अपने दर्शकों को जितनी सही जानकारी देंगे उनका भरोसा उतना ही अधिक बढ़ेगा. उन्होंने अपने संबोधन में फ़ेक न्यूज़ का भी ज़िक्र किया.

जानिए कौन हैं रवीश कुमार....

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वो खास 5 बातें-


1- भारतीय पत्रकार रवीश कुमार (44)  शुरुआती दिनों में  1996 से  NDTV में आई चिट्ठियां छांटा करते थे। इसके बाद वो रिपोर्टिंग की ओर मुड़े और उनकी सजग आंख देश और समाज की विडंबनाओं को अचूक ढंग से पहचानती रहीं।

2 -रवीश कुमार का कार्यक्रम 'रवीश की रिपोर्ट' बेहद चर्चित हुआ और हिंदुस्तान के आम लोगों का कार्यक्रम बन गया। एंकरिंग करते हुए उन्होंने टीवी पत्रकारिता की जैसे एक नई परिभाषा रची।इस देश में जिसे भी लगता है कि उसकी आवाज़ कोई नहीं सुनता है उसे रवीश कुमार से उम्मीद होती है।

3- टीवी पत्रकारिता के शोर-शराबे भरे दौर में -रवीश कुमार ने सरोकार वाली पत्रकारिता का परचम लहराए रखा है। सत्ता के खिलाफ़ बेखौफ़ पत्रकारिता करते रहे।आज उनकी पत्रकारिता को एक और बड़ी मान्यता मिली है।

4- रवीश कुमार ने अपने प्राइम टाइम में जनसरोकार के मुद्दों पर जोर दिया। हाल में - रवीश ने नौकरी और विश्वविद्यालय कॉलेजों को लेकर चलाई गई सीरीज को खूब पंसद किया गया है।

5- रवीश कुमार काे 2010 में गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2013, 2017 में प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवॉर्ड भी मिला।

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