Trending News

चीन पर राजनाथ सिंह राज्यसभा में बोले- भारत बड़ा और कड़ा क़दम उठाने के लिए तैयार

[Edited By: Rajendra]

Thursday, 17th September , 2020 01:38 pm

राज्यसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर तनाव को लेकर बयान दिया है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश हित में चाहे जितना बड़ा या कड़ा क़दम उठाना पड़े भारत पीछे नहीं हटेगा. राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत न तो अपना मस्तक झुकने देगा और न ही किसी का मस्तक झुकाना चाहता है.

राज्यसभा में भारत-चीन सीमा विवाद पर बोलते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि चीन ने एलएसी की यथास्थिति बदलने की कोशिश की है। रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन पर भारत बड़ा और कड़ा कदम उठाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "सदन इस बात से अवगत है कि भारत और चीन सीमा का प्रश्न अभी तक अनसुलझा है। भारत और चीन की बाउंड्री का कस्टमरी और ट्रेडिशनल अलाइनमेंट चीन नहीं मानता है। यह सीमा रेखा अच्छे से स्थापित भौगोलिक सिद्धांतों पर आधारित है।"

रक्षा मंत्री ने कहा, "चीन मानता है कि बाउंड्री अभी भी औपचारिक तरीके से निर्धारित नहीं है। उसका मानना है कि हिस्टोरिक्ल जुरिस्डिक्शन के आधार पर जो ट्रेडिश्नल कस्टमरी लाइन है उसके बारे में दोनों देशों की अलग व्याख्या है। 1950-60 के दशक में इस पर बातचीत हो रही थी पर कोई समाधान नहीं निकला।"

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, "सदन को जानकारी है कि पिछले कई दशकों में चीन ने बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटी शुरू की है, जिससे बॉर्डर एरिया में उनकी तैनाती की क्षमता बढ़ी है। इसके जबाव में हमारी सरकार ने भी बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास का बजट बढ़ाया है, जो पहले से लगभग दोगुना हुआ है।"

रक्षा मंत्री ने कहा, ''भारत हर क़दम उठाने को तैयार है और सेना की पूरी तैयारी है. हमारे जवानों का हौसला बुलंद है. ये सच है कि लद्दाख में हम एक चुनौती से जूझ रहे हैं लेकिन हम चुनौती का सामना करेंगे. हम देश का माथ नहीं झुकने नहीं दें. हमारे जवान चीनी सेना से आंख से आंख मिलाकर खड़े हैं और सदन से उन्हें इसी हौसला को बढ़ाने का संदेश देना चाहिए.''

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का मानना है कि द्विपक्षीय रिश्तों को विकसित किया जा सकता है और साथ ही साथ सीमा के मसले के समाधान के बारे में चर्चा भी की जा सकती है.

रक्षा मंत्री ने कहा, ''हम ये दोनों काम कर सकते हैं. लेकिन एलएसी पर शांति में किसी भी तरह की गंभीर स्थिति का द्विपक्षीय रिश्तों पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा. ये बात भी दोनों पक्षों को अच्छी तरह समझनी चाहिए.''

उन्होंने, 15 जून 2020 को गलवान घाटी में जान गंवाने वाले 20 जवानों को याद किया.

राजनाथ सिंह ने कहा भारत और चीन की सीमा का प्रशन अभी तक अनसुलझा है. चीन लद्दाख में भारत की लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्ज़ा किए हुए है. इसके अलावा 1963 में एक तथाकथित बाउंड्री अग्रीमेंट के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की 5880 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन अवैध रूप से चीन को सौंप दी है.''

रक्षा मंत्री ने कहा, ''चीन अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगे हुए क़रीब 90,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र को भी अपना बताता है.

भारत और चीन दोनों ने औपचारिक तौर पर ये माना है कि सीमा का सवाल एक जटिल मुद्दा है. जिसके समाधान के लिए संयम की ज़रूरत है और इस मुद्दे का निष्पक्ष, उचित और आपसी सहमति से मान्य समाधान शांतिपूर्ण बातचीत के द्वारा निकाला जाए.''

राजनाथ सिंह ने कहा, ''दोनों इस बात पर सहमत हैं. अंतरीम रूप से दोनों पक्षों ने ये मान लिया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता बहाल रखना द्विपक्षीय संबंधों को बढाने के लिए बेहद ज़रूरी.

अभी तक भारत चीन के सीमावर्ती इलाक़ों में दोनों देशों की अवधारणा अलग-अलग है. इसलिए शांति बहाल रखने के लिए दोनों देशों के बीच कई तरह के समझौते और प्रोटोकॉल बनाए हैं.''

रक्षा मंत्री ने कहा, ''इन समझौतों के तहत दोनों देशों ने ये माना है कि एलएसी पर शांति और स्थितरता बहाल रखी जाए. जिस पर एलएसी की अपनी अपनी पॉज़िशन का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. इस आधार पर 1988 के बाद से दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में काफी विकास भी हुआ है.''

Latest News

World News