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प्रयागराज-गंगा समग्र की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक आज से

[Edited By: Vijay]

Saturday, 19th June , 2021 03:33 pm

केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट मिशन नमामि गंगे के साथ ही देश के कई संगठन भी जीवनदायिनी गंगा नदी की अविरलता बनाने में काफी सहयोग दे रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अनुषांगिक संगठन गंगा समग्र की भी बड़ी भूमिका है। इससे पहले भी बीती फरवरी में भी प्रयागराज में आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के नेतृत्व में गंगा समग्र पर तीन दिन तक काफी मंथन किया गया था।

प्रयागराज के झूंसी के गंगा धाम में शनिवार से गंगा समग्र की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में गंगा नदी के जल को सवच्छ बनाने के साथ ही राष्ट्रीय जल नीति पर भी चर्चा होगी। इसमें पिछले कार्यों की समीक्षा के साथ वर्ष भर के आगामी कार्य की योजना भी तैयार की जाएगी। प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल पर काफी काम शुरू हो चुका है। यहां पर गांव में घर-घर पेयजल पहुंचाने की केंद्र की मोदी सरकार की बड़ी योजना पर भी गंगा समग्र का फोकस रहता है।

दो दिनी गंगा समग्र की बैठक में देश भर के करीब 50 पदाधिकारी शामिल होंगे। इनमें आरएसएस के सह सर कार्यवाह व आयाम प्रमुख कृष्णगोपाल के अतिरिक्त संगठन सचिव मिथिलेश व मार्गदर्शक मंडल के रामाशीष भी शामिल होंगे। इस बैठक में राष्ट्रीय जल नीति पर मंथन के साथ ही जल संरक्षण, तालाबों, कुओं के निर्माण व उन्हें बचाने की कार्य योजना बनाई जाएगी। इसके अतिरिक्त यह भी तय किया जाएगा कि नदियों की सफाई के लिए अब तक क्या किया गया और आगे क्या किया जाना है। इसमें भी गंगा तथा यमुना नदी की सफाई शीर्ष वरीयता पर है। इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए शुक्रवार को कई पदाधिकारी प्रयागराज पहुंच गए। यह बैठक रविवार को शाम तक चलेगी।   

नमामि गंगे का उद्देश्य-

गंगा नदी का न सिर्फ़ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है बल्कि देश की 40% आबादी गंगा नदी पर निर्भर है। 2014 में न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था, “अगर हम इसे साफ करने में सक्षम हो गए तो यह देश की 40 फीसदी आबादी के लिए एक बड़ी मदद साबित होगी। अतः गंगा की सफाई एक आर्थिक एजेंडा भी है”।

इस सोच को कार्यान्वित करने के लिए सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नदी की सफाई के लिए बजट को चार गुना करते हुए पर 2019-2020 तक नदी की सफाई पर 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी दे दी और इसे 100% केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ एक केंद्रीय योजना का रूप दिया।

 

यह समझते हुए कि गंगा संरक्षण की चुनौती बहु-क्षेत्रीय और बहु-आयामी है और इसमंं कई हितधारकों की भी भूमिका है, विभिन्न मंत्रालयों के बीच एवं केंद्र-राज्य के बीच समन्वय को बेहतर करने एवं कार्य योजना की तैयारी में सभी की भागीदारी बढ़ाने के साथ केंद्र एवं राज्य स्तर पर निगरानी तंत्र को बेहतर करने के प्रयास किये गए हैं।

कार्यक्रम के कार्यान्वयन को शुरूआती स्तर की गतिविधियों (तत्काल प्रभाव दिखने के लिए), मध्यम अवधि की गतिविधियों (समय सीमा के 5 साल के भीतर लागू किया जाना है), और लंबी अवधि की गतिविधियों (10 साल के भीतर लागू किया जाना है) में बांटा गया है।

औद्योगिक प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए बेहतर प्रवर्तन के माध्यम से अनुपालन को बेहतर बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं। गंगा के किनारे स्थित ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को गंदे पानी की मात्रा कम करने या इसे पूर्ण तरीके से समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन निर्देशों के कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना पहले से ही तैयार कर चुका है और सभी श्रेणी के उद्योगों को विस्तृत विचार-विमर्श के साथ समय-सीमा दे दी गई है। सभी उद्योगों को गंदे पानी के बहाव के लिए रियल टाइम ऑनलाइन निगरानी केंद्र स्थापित करना होगा।

इस कार्यक्रम के तहत इन गतिविधियों के अलावा जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण (वन लगाना), और पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। महत्वपूर्ण प्रतिष्ठित प्रजातियों, जैसे – गोल्डन महासीर, डॉल्फिन, घड़ियाल, कछुए, ऊदबिलाव आदि के संरक्षण के लिए कार्यक्रम पहले से ही शुरू किये जा चुके हैं। इसी तरह ‘नमामि गंगे’ के तहत जलवाही स्तर की वृद्धि, कटाव कम करने और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति में सुधार करने के लिए 30,000 हेक्टेयर भूमि पर वन लगाये जाएंगे। वनीकरण कार्यक्रम 2016 में शुरू किया जाएगा। व्यापक स्तर पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए 113 रियल टाइम जल गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित किये जाएंगे।

लंबी अवधि के तहत ई-फ़्लो के निर्धारण, बेहतर जल उपयोग क्षमता, और सतही सिंचाई की क्षमता को बेहतर बना कर नदी का पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा।

इसका उल्लेख करना आवश्यक है कि गंगा नदी की सफ़ाई इसके सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व और विभिन्न उपयोगों के लिए इसका दोहन करने के कारण अत्यंत जटिल है। विश्व में कभी भी इस तरह का जटिल कार्यक्रम कार्यान्वित नहीं किया गया है और इसके लिए देश के सभी क्षेत्रों और हरेक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। विभिन्न तरीके हैं जिसके माध्यम से हम सभी गंगा नदी की सफ़ाई में अपना योगदान दे सकते हैं

 

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