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अमेरिका में काले-गोरे पर सियासत गर्म, पुलिस चीफ ने ट्रंप से कहा-''अपना मुंह बंद रखें''

[Edited By: Admin]

Tuesday, 2nd June , 2020 10:43 am

अमरीकी शहरों में जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के विरोध की आग इस कदर लगी है कि व्हाइट हाउस तक प्रदर्शनकारी पहुंच चुके हैं. लोगों का विरोध बढ़ता देख पुलिस को अब और भी ज्यादा बल प्रयोग करना पड़ रहा है. इसी बीच हॉट्सन पुलिस चीफ का चौंकाने वाला बयान सामने आया है. सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में पुलिस चीफ ने ट्रंप को लेकर कहा है कि वह हालातों को अगर नहीं संभाल सकते तो अपना मुंह बंद ही रखें.

 
आपको बता दें लगातार सातवें दिन अमरीका के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए और कई जगह काफ़ी हिंसा हुई.

क़रीब 40 शहरों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है, लेकिन लोगों ने इसकी अनदेखी की और सड़कों पर उतर आए. इस कारण तनाव काफ़ी बढ़ गया है.

न्यूयॉर्क, शिकागो, फिलाडेल्फिया और लॉस एंजेलेस में दंगा पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष हुआ.

गौरतलब है कि अमेरिका में अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के खिलाफ के विरोध प्रदर्शन दुनियाभर के कई अन्य देशों में देखने को मिला है। समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार रविवार को लंदन और बर्लिन में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सोमवार को न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड में प्रदर्शन देखने को मिला। वहीं अमेरिका में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के जवाब में रविवार को वाशिंगटन समेत अमेरिका के 40 शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया। समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार 5,000 नेशनल गार्ड सदस्य सक्रिय हो गए हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य 2000 अन्य तैनात हो सकते हैं।

वीडियो क्लिप के वायरल होने के बाद काले-गोरे पर सियासत गर्म

लोगों की नाराज़गी एक वीडियो क्लिप के वायरल होने के बाद सामने आई है जिसमें एक गोरा पुलिस अधिकारी जॉर्ज फ़्लॉयड नाम के एक निहत्थे काले व्यक्ति की गर्दन पर घुटना टेककर उसे दबाता दिखता है. इसके कुछ ही मिनटों बाद 46 साल के जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत हो गई.

वीडियो में देखा जा सकता है कि जॉर्ज और उनके आसपास खड़े लोग पुलिस अधिकारी से उन्हें छोड़ने की मिन्नतें कर रहे हैं.

पुलिस अधिकारी के घुटने के नीचे दबे जॉर्ज बार-बार कह रहे हैं कि "प्लीज़, आई कान्ट ब्रीद (मैं सांस नहीं ले पा रहा)". यहीउनके आख़िरी शब्द बन गए.

इस घटना की जांच जारी है हालांकि मामले के बारे में पूरी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है. जॉर्ज की गर्दन पर घुटना रखने वाले पुलिस अधिकारी डेरेक शॉविन को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन पर हत्या के आरोप लगाए गए हैं.

 

ट्रंप पर सवाल
एक सवाल ये भी है कि अगर ऐंटीफ़ा सच में इतना ख़तरनाक था, तो प्रशासन ने पहले ही क्यों नहीं उसके खिलाफ कार्रवाई की? कई जानकार ये सवाल भी कर रहे हैं कि ट्रंप श्वेत-श्रेष्ठतावादियों पर तो नर्म रहते हैं, तो फिर उनके विरोध में संगठित होने वाले ऐंटीफ़ा को ही क्यों निशाना बना रहे हैं? क्या इसकी वजह ये है कि अमेरिकी ऐंटीफ़ा ट्रंप और उनकी नीतियों का विरोध करता है? 2017 में वाइट सुप्रिमेसिस्ट्स ने की एक रैली के दौरान दक्षिणपंथियों और ऐंटीफ़ा के बीच झड़प हुई थी. एक कट्टर दक्षिणपंथी की कार से टक्कर खाकर यहां एक महिला की भी मौत हो गई थी. आलोचक याद करते हैं कि तब ट्रंप कट्टर दक्षिणपंथियों पर उतने सख़्त नहीं थे. बल्कि शुरुआत में तो वो सुप्रिमेसिस्ट्स का बचाव कर रहे थे.

जर्मनी में क्यों नाराज़ हैं लोग ट्रंप से?


जर्मनी में ट्रंप के बयान का ख़ूब विरोध हो रहा है. ट्रंप के ऐंटीफ़ा विरोधी बयान से नाराज़ लोगों ने जर्मनी में ट्विटर पर ‘मैं भी ऐंटीफ़ा’ (#IchbinAntifa, #IamAntifa) हैशटैग ट्रेंड करवा दिया. जर्मनी में लोगों का कहना है कि उनका इतिहास उन्हें नस्लवाद और फ़ासीवाद का विरोध करने के लिए विवश करता है. ताकि उस फ़ासीवादी अतीत की फिर से पुनरावृत्ति न हो.

क़ानूनी पक्ष, थोड़ा ब्रीफ में
अब बात करते हैं इस मामले के क़ानूनी पक्ष की. ट्रंप ऐंटीफ़ा को आतंकवादी संगठन ठहरा सकेंगे कि नहीं, इसपर भी संशय है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि अमेरिका में घरेलू ऐंटी-टेररिज़म से जुड़ा कोई प्रावधान ही नहीं है. अगर प्रावधान बनाया भी गया, तो शायद सबसे पहले ऐंटीफ़ा पर हिंसा भड़काने से जुड़े आरोप साबित करने होंगे.

क्या कट्टरता की जगह होनी चाहिए समाज में?
सबसे आख़िर में सवाल आता है कि क्या ऐंटीफ़ा जैसे संगठन की जगह होनी चाहिए समाज में? लिबरल धड़े के बीच एक वाक्य ख़ूब चलता है. इस वाक्य को अभिव्यक्ति की आज़ादी का निचोड़, इसकी आत्मा समझिए. क्या है ये वाक्य? मूल रूप से फ्रेंच भाषा में लिखे गए इस वाक्य का हिंदी तर्जुमा है- मैं तुम्हारे कहे का कितना भी विरोध करूं, इससे कितना भी असहमत क्यों न होऊं, मगर मैं प्राण देकर भी तुम्हारे अभिव्यक्ति की आज़ादी की रक्षा करूंगा. ये पंक्ति फ्रांस के मशहूर दार्शनिक वोल्टेर की जीवनी लिखने वाली ईवलीन हॉल की है. लाख आलोचनाओं के बाद भी ये पंक्ति आदर्श है.

जिस तरह कट्टर और हिंसक दक्षिणपंथ की कोई जगह नहीं होनी चाहिए, उसी तरह कट्टर और हिंसक वामपंथ को भी स्वीकृति नहीं मिलनी चाहिए. हां, मगर ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि राष्ट्रपति पक्षपात करता दिखे. ट्रंप पर नस्लवाद से लेकर दक्षिणपंथियों का सपोर्ट करने जैसे गंभीर आरोप लगते आए हैं. अमेरिका में अभी जो विरोध हो रहा है, उसके पीछे नस्लवाद और सिस्टमैटिक पक्षपात का बहुत बड़ा हाथ है.

जानिए कौन था जॉर्ज फ्लॉयड जिसकी वजह से जल उठा US?

अमेरिका में अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत का मामला भयावह रूप लेता जा रहा है. देश के लगभग 25 शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान डेट्रॉयट में 19 साल की युवक की गोली लगने से मौत हो गई. पोर्टलैंड में प्रशासन ने दंगे की स्थिति घोषित कर दी है.वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस के बाहर भी शुक्रवार को करीब सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया, जिसके बाद इसे बंद कर दिया गया है. अश्वेत व्यक्ति की मौत में शामिल मिनेपोलिस के एक पुलिस अफसर पर थर्ड-डिग्री हत्या का आरोप लगाया गया है.

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