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13 से शुरु हो रहे पितृ पक्ष, 28 सितंबर तक भूलकर भी न करें ये 10 काम

[Edited By: Gaurav]

Wednesday, 11th September , 2019 05:12 pm

पूर्णिमा से अमावस्या तक 15 तिथियां पितरों के निमित श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. इन 15 तिथियों में सभी अपने-अपने पितरों को याद करते है और उनका तर्पण करते है. पितृ पक्ष 13 सितंबर से शुरू होकर 28 सितंबर 2019 तक चलेगा. इस दौरान उन सभी लोगों का पिंडदान किया जाता है जो किसी भी माह या तिथि में स्वर्गवासी हुए हों. ऐसा करने से परिवार में सुख शांति बनी रहती हैं. पितृ श्राद्ध के भी कुछ नियम होते हैं, जिनका पालन जरूर करना चाहिए.

श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धा पूर्वक अपने पूर्वजों को जो इस समय जीवित नहीं है उनका आभार प्रगट करना। शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष के दौरान ऐसे परिजन जो अपने शरीर को छोड़कर चले गए हैं, उनकी आत्मा के तृप्ति के लिए उन्हें तर्पण दिया जाता है, इसे ही श्राद्ध कहा जाता है। ऐसी कहा जाता है कि पितृपक्ष में मृत्यु के देवता यमराज इन जीवो को कुछ समय के लिए मुक्त कर देते हैं, ताकि ये धरती पर जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें.

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कौन कहलाते हैं पितर
ऐसे व्यक्ति जो इस धरती पर जन्म लेने के बाद जीवित नहीं है उन्हें पितर कहते हैं। ये विवाहित हों या अविवाहित, बच्चा हो या बुजुर्ग, स्त्री हो या पुरुष उनकी मृत्यु हो चुकी है उन्हें पितर कहा जाता है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए भाद्रपद महीने के पितृपक्ष में उनको तर्पण दिया जाता है। पितर पक्ष समाप्त होते ही परिजनों को आशीर्वाद देते हुए पितरगण वापस मृत्युलोक चले जाते हैं।

आइए जानते हैं श्राद्ध के दौरान क्या करें और क्या ना करें.

1. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितर लोक दक्षिण दिशा में होता है. इसलिए पूरी श्राद्ध प्रक्रिया के दौरान आपका मुंह दक्षिय दिशा की ओर होना चाहिए.

2. पितृ श्राद्ध हमेश दोपहर कते बाद करें जब सूर्य की छाया आगे नहीं पीछे हो. इस बात का जरूर ध्यान रखें कि कभी भी ना सुबह हो और ना ही अंधेरे में श्राद्ध करें.

3. श्राद्ध पूरे 16 दिन के होते हैं. इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान करें, दान पुण्य शुभ माना जाता है.

4. ब्राह्मणों को लोहे के आसन पर बिठाकर पूजा न करें और ना ही उन्हें केले के पत्ते पर भोजन कराएं.

5. पिंडदान के समय जनेऊ हमेशा दाएं कंधे पर रखें.

6. हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी स्टील के बर्तन से पिंडदान ना करें, इसकी जगह कांसे तांबे या फिर चांदी की पत्तल का इस्तेमाल करें.

7. पिंडदान करते दौरान दक्षिण दिशा में ही मुंह रखें.

8. पिता का श्राद्ध बेटा या बहू को करना चाहिए. ध्यान रखें पोते या पोतियों से पिंडदान ना कराएं.

9. श्राद्ध करने वाला व्यक्ति श्राद्ध के 16 दिनों तक मन को शांत रखें.

10. श्राद्ध हमेशा अपने घर या फिर सार्वजनिक भूमि पर ही करें. किसी और के घर पर श्राद्ध ना करें.

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