Trending News

नेपाल राष्ट्रपति ने भंग की संसद, मध्यावधि चुनाव कराये जाने का ऐलान

[Edited By: Rajendra]

Sunday, 20th December , 2020 05:38 pm

नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की सिफारिश पर रविवार को संसद को भंग कर दिया और अप्रैल-मई में मध्यावधि आम चुनाव कराये जाने की घोषणा की। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार राष्ट्रपति भंडारी ने 30 अप्रैल को पहले चरण और 10 मई को दूसरे चरण का मध्यावधि चुनाव कराये जाने की घोषणा की। इस फैसले को जारी करते हुए राष्ट्रपति भवन ने एक विज्ञ्पति भी साझा की है जिसमें फ़ैसले के लिए संवैधानिक परंपराओं का हवाला दिया गया है।

नोटिस के अनुसार, उन्होंने नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76, खंड एक तथा सात सहित अनुच्छेद 85 के अनुसार संसद को भंग कर दिया। इससे पूर्व प्रधानमंत्री ओली की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की एक आपात बैठक में राष्ट्रपति से संसद की प्रतिनिधि सभा को भंग करने की सिफारिश करने का फैसला किया गया था। नेपाल के ऊर्जा मंत्री ने कहा था कि संसद भंग करने की सिफारिश से संबंधित पत्र राष्ट्रपति को भेज दिया गया है।

नेपाल की राजनीति पर नजर रखने वालों ने नेपाल की सत्ताधारी पार्टी में चल रहे आपसी गतिरोध को देखते हुए पहले ही इस तरह इशारा किया था। राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा था कि नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी की गतिविधियों में पूर्व पीएम पुष्पकमल दहल 'प्रचंड' और माधव नेपाल के धड़े का पीएम केपी शर्मा ओली से ज्यादा प्रभाव है, ऐसे में केपी शर्मा ओली संसद भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं।

वर्ष 2017 में निर्वाचित प्रतिनिधि सभा या संसद के निचले सदन में 275 सदस्य हैं। ऊपरी सदन नेशनल एसेंबली है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है कि जब सत्तारूढ़ दल नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी एनसीपी) में आंतरिक कलह चरम पर पहुंच गई थी।

पार्टी के दो धड़ों के बीच महीनों से टकराव जारी है। एक धड़े का नेतृत्व 68 वर्षीय ओली तो वहीं दूसरे धड़े की अगुवाई पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तथा पूर्व प्रधानमंत्री ''प्रचंड'' कर रहे हैं।

बता दें कि नेपाल की संसद को भंग करने की राष्ट्रपति से सिफारिश के बाद प्रधानमंत्री केपी ओली की सरकार ने देश की राजधानी काठमांडू में सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर दिए हैं। राजधानी के मुख्य चौकों में पुलिस की भारी संख्या में मौजूदगी है।

काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, ओली की कैबिनेट में ऊर्जा मंत्री बरशमैन पुन ने कहा, "आज की कैबिनेट की बैठक ने सदन को भंग करवे के लिए राष्ट्रपति को सिफारिश भेजने का फैसला किया है।"

ओली पर संवैधानिक परिषद अधिनियम से संबंधित एक अध्यादेश को वापस लेने का दबाव था जो कि उन्होंने मंगलवार को जारी किया था। उसी दिन राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने अध्यादेश को मंजूरी दे दी थी।

रविवार को जब कैबिनेट की आपात बैठक सुबह 10 बजे बुलाई गई थी, तो काफी हद तक उम्मीद की जा रही थी कि यह अध्यादेश को बदलने की सिफारिश करेगी। लेकिन इसके बजाय, मंत्रिमंडल ने सदन को भंग करने की सिफारिश की।

ओली ने शनिवार को अपने साथी और पार्टी के अध्यक्ष पुष्पा कमल दहल के साथ-साथ सचिवालय के सदस्य राम बहादुर थापा और शाम को राष्ट्रपति भंडारी के साथ कई दौर की बैठकें की थी।

Latest News

World News