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नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली और कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रचंड में बढ़ी दरार

[Edited By: Rajendra]

Wednesday, 29th July , 2020 06:20 pm

नेपाल की सत्‍तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बीच दरार अपने चरम पर पहुंचती दिख रही है। मंगलवार को प्रचंड ने ओली के आधिकारिक आवास पर उनकी अनुपस्थिति में पार्टी की शक्तिशाली स्थायी समिति की एकतरफा बैठक बुलाई जिसके बाद देश में राजनीतिक संकट और ज्‍यादा गहरा गया है। इस बैठक में प्रचंड समर्थक स्‍थायी समिति के कुल 45 में से 31 सदस्‍यों ने हिस्‍सा लिया।

ओली ने स्‍थायी समिति की बैठक को एकतरफा फैसला लेते हुए रद्द कर दिया। पीएम के इस कदम से भड़के प्रचंड गुट ने इसे पार्टी के संविधान के खिलाफ कदम करार दिया है। ओली और प्रचंड के नेतृव वाले असंतुष्ट गुट के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए एनसीपी की 45 सदस्यीय स्थायी समिति की अहम बैठक पूर्वाह्न 11 बजे होने वाली थी। इस बैठक को अचानक से नौंवी बार स्थगित कर दिया गया। बैठक स्थगित होने की सूचना देते हुए स्थायी समिति के सदस्य गणेश शाह ने कहा था कि ओली और प्रचंड को आपसी मतभेद सुलझाने के लिए और समय चाहिए।

प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार सूर्य थापा ने भी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि दोनों नेताओं को बातचीत के लिए थोड़ा और समय चाहिए, इसलिए मंगलवार को बैठक स्थगित कर दी गई है। उन्होंने कहा था कि दोनों नेताओं की बातचीत के बाद अगली बैठक की तारीख पर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ओली ने बिना प्रचंड से पूछे बैठक स्थगित कर दी। प्रचंड के नेतृत्व वाला गुट बलुवातार स्थित प्रधानमंत्री आवास पर पहुंच गया पूर्वाह्न 11 बजे पहुंच गया था और बैठक शुरू करने के लिए ओली का इंतजार किया जा रहा था।

पार्टी के नेताओं ने कहा कि ओली के करीबी स्थायी समिति के सदस्यों ने दोपहर में प्रचंड की ओर से बुलाई गई एकतरफा बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि बैठक अपराह्न तीन बजे शुरू हुई और एक घंटे तक चली। इस दौरान ओली को मनाने के लिए कई नेता उनके पास गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। काठमांडू पोस्ट की खबर के मुताबिक बैठक में स्थायी समिति के लगभग 31 सदस्य शामिल थे। गत सप्ताह बुधवार को प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास में स्थायी समिति की एक संक्षिप्त बैठक हुई थी। हालांकि प्रधानमंत्री उसमें शामिल नहीं हुए थे।

इसके बाद पार्टी गतिविधियों की समीक्षा, सरकार का प्रदर्शन, पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच काम के बंटवारे और अन्य संबंधित कामकाज पर चर्चा करने के लिए एक सप्ताह बाद 28 जुलाई को बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया था। पार्टी में बढ़ती दरार के बीच एनसीपी उपाध्यक्ष बामदेव गौतम ने प्रधानमंत्री ओली और प्रचंड के बीच सुलह कराने के लिए एक ‘बीच का रास्ता’ बताया है।

गौतम ने प्रस्ताव दिया है कि ओली को प्रतिनिधि सभा के बचे हुए कार्यकाल के लिए ढाई साल तक प्रधानमंत्री पद पर रहने दिया जाए और उन्हें दिसंबर मध्य तक पार्टी अध्यक्ष रहने दिया जाए जब तक कि ओली की ओर से प्रस्तावित आम सभा की बैठक नहीं हो जाती। इसी प्रकार प्रचंड को पार्टी अध्यक्ष के रूप में तब तक जिम्मेदारी संभालने दी जाए जब तक आम सभा की बैठक नहीं हो जाती। गौतम ने प्रस्ताव दिया है कि ओली को स्वतंत्र रूप से सरकार चलाने की अनुमति दी जाए और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर निर्णय लेने से पहले उन्हें पार्टी में सलाह लेनी होगी।

चीन के बल पर सत्‍ता बचाने की कोशिशों में जुटे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अब संसद को भंग करने और मध्‍यावधि चुनाव कराने की तैयारी कर रहे हैं। नेपाली अखबार कांतिपुर की रिपोर्ट के मुताबिक केपी शर्मा ओली और उनके विरोधी पुष्‍प कमल दहल 'प्रचंड' दोनों ही शह और मात के लिए अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। ओली की तैयारी को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के दोनों ही धड़ों के बीच सहमति बनने के आसार कम होते जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक ओली दो विकल्‍पों पर विचार रहे हैं। पहला-पार्टी के बंटवारे पर अध्‍यादेश लाया जाए ताकि कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का चुनाव चिन्‍ह उनके पास ही रहे। दूसरा-संसद को भंग करके मध्‍यावधि चुनाव कराए जाएं। हालांकि यह दोनों ही रणनीति ओली के लिए आसान नहीं होने जा रही है।

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