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रहस्य सोमनाथ मंदिर का

[Edited By: Rajendra]

Monday, 13th July , 2020 05:14 pm

सोमनाथ मंदिर गुजरात के पश्चिमी तट पर सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल शहर में समुंद्र किनारे स्थित है। यह सबसे प्राचीन हिंदू मंदिर है। इस जगह को पहले प्रभासक्षेत्र के नाम से जाना जाता था। सोमनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से सबसे पहला ज्योतिर्लिंग है। ज्योतिर्लिंग उन स्थानों को कहते है जहाँ भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए थे। सोमनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थान और पर्यटन स्थल है। हिंदू धर्म में इस स्थान को बहुत पवित्र माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण स्वयं चन्द्र देव ने करवाया था। इस मंदिर का इतिहास हिंदू धर्म के उत्थान और पतन का प्रतीक माना गया है। अब तक यह मंदिर कई बार नष्ट हो चुका है और दूबारा उतनी ही विशालता से इसका पुननिर्माण किया गया।  इस मंदिर की विशेषता है कि अब तक यह 17 बार नष्ट हो चुका है और हर बार इसका पुननिर्माण किया गया। महमूद गजनवी से लेकर अलाऊद्दीन खिलजी तक सबने इस मंदिर को ध्वस्त किया। भारत के स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस मंदिर का पुननिर्माण करवाया। यह मंदिर गर्भगृहसभामंडप और नृत्यमंडप- तीन प्रमुख भागों में विभाजित है। इस मंदिर का शिखर 150 फुट ऊंचा है। इसके शिखर पर स्थित कलश का भार दस टन है और इसकी ध्वजा 27 फुट ऊंची है।   

इस वास्तु अनुकूलता के कारण यह मन्दिर भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है और साथ ही मंदिर में पर्याप्त धन का आगमन होता रहा है। इसलिए बार-बार ध्वस्त होने के बाद भी हर बार यह मन्दिर बनता रहा।

सोमनाथ मन्दिर के आसपास दो महत्वपूर्ण हिन्दू धार्मिक स्थल है। जिस कारण से इस क्षेत्र का ओर भी महत्व बढ़ जाता है। मन्दिर से पांच किमी. की दूरी पर भालका तीर्थ हैलोक कथाओं के अनुसार यहीं पर श्रीकृष्ण ने देहत्यागा था और एक किलोमीटर दूर तीन नदियों हिरणकपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। त्रिवेणी नदी में धार्मिक दृष्टि से स्नान का बहुत महत्व हैक्योंकि इसी त्रिवेणी पर श्रीकृष्ण जी की नश्वर देह का अग्नि संस्कार किया गया था।   

ऐसा माना जाता है की भगवान कृष्णा की सिमंतक मनी सोमनाथ मंदिर के शिवलिंग में स्थापित है। यह मंदिर रोज सुबह बजे से लेकर रात के बजे तक भक्तो के लिए खुला रहता है। इस मंदिर में रोज तीन बार आरती होती है। सुबह बजेदोपहर 12 बजे और शाम को बजे आरती होती है।

इस मंदिर में होमात्मक अतिरुद्रहोमात्मक महारुद्रहोमात्मक लघुरुद्रसवालक्ष सम्पुट महामृत्युंजय जाप आदि का किया जाता है।

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