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कारोबारी जगत की चिंता को दूर करने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा ऐलान

[Edited By: Rajendra]

Monday, 20th January , 2020 03:25 pm

कारोबारी जगत की चिंता को दूर करने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा ऐलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार इनकम टैक्स कानून और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) को गैर-आपराधिक बनाएगी। ऐसा देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी की तरफ ले जाने के प्लान के तहत किया जाएगा। गौरतलब है कि पिछले समय में उद्योग जगत ने कई बार टैक्स मामलों में उत्पीड़न की शिकायत की है।

वित्त मंत्री ने रविवार को चेन्नै में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि कॉर्पोरेट कानूनों को गैर-आपराधिक बनाने, टैक्स विवादों को निपटाने और सरकारी कंपनियों के निजीकरण जैसे कदम सरकार इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उठा रही है। सरकार ऐसे वैधानिक बदलावों की पहचान कर चुकी है, जो कंपनीज ऐक्ट को गैर आपराधिक बनाने और जनहित को प्रभावित किए बिना जटिल प्रक्रियाओं को आसान करके कारोबारी सुगमता को बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं।

सीतारमण ने कहा, 'मैंने इसकी (कंपनीज एक्ट) पड़ताल की है। हम कंपनीज ऐक्ट को गैर-आपराधिक बनाने पर काम कर रहे हैं और सुनिश्चित करेंगे कि इनकम टैक्स एक्ट और पीएमएलए सहित किसी भी कानून में इस तरह के प्रावधान ना रहें।'

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विचार के मुताबिक है, जो उन्होंने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर संबोधन में रखा था। पीएम ने कहा था कि वेल्थ क्रिएटर्स को शक की निगाह से ना देखा जाए, लोगों के बीच संपत्ति का वितरण तभी हो सकता है जब उसका निर्माण हो। उन्होंने कहा था कि वेल्थ क्रिएशन भी देश सेवा है।

वित्त मंत्री 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी।

बजट के दस्तावेज छपने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले वित्त मंत्रालय में सोमवार को पारंपरिक हलवा समारोह हुआ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर और मंत्रालय के अधिकारी इसमें शामिल हुए। हलवा समारोह इस बात का भी संकेत होता है कि बजट प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी अब बजट पेश होने तक मंत्रालय में ही रहेंगे। इस दौरान वे परिवार के लोगों से भी संपर्क नहीं कर पाएंगे।

बजट को अंतिम रूप देने से पहले वित्त मंत्रालय में बड़ी कड़ाही में हलवा बनाया जाता है। सभी को हलवा खिलाकर बधाई दी जाती है। जट सत्र दो चरणों में चलेगा। पहला चरण 31 जनवरी से 11 फरवरी तक और दूसरा 2 मार्च से 3 अप्रैल तक होगा। बजट सत्र के दो चरणों में आमतौर पर एक महीने का अंतराल होता है ताकि संसदीय समितियां विभिन्न मंत्रालयों के लिए बजट में आवंटित राशि पर विचार-विमर्श कर सकें। आर्थिक सर्वे भी 31 जनवरी को पेश किया जाएगा।

 

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