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Budget 2019: इस बार इन वजहों से खास हो सकता है 5 जुलाई को पेश होने वाला बजट

[Edited By: Gaurav]

Sunday, 23rd June , 2019 01:18 pm

आने वाली 5 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। सीतारमण का यह पहला बजट होगा। 4 जुलाई को आर्थिक सर्वेक्षण जारी होगा। भारत का पहला बजट एक अंग्रेज जेम्स विल्सन ने 18 फरवरी 1860 को पहला बजट पेश कि‍या था। जेम्स ब्रिटिश वायसराय काउंसिल के मेंबर (फाइनेंस) थे। वहीं, आजादी से पहले बनी भारत की अं‍तरिम सरकार का बजट लियाकत अली खां ने पेश किया था। यह बजट 9 अक्टूबर, 1946 से लेकर 14 अगस्त 1947 तक के लिए था। जबकि आजाद भारत का पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री आरके षणमुखम शेट्टी ने 26 नवंबर, 1947 में पेश किया था। यह एक अंतरिम बजट था। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट 5 जुलाई को संसद में पेश होगा। इस बजट से किसानों, मध्यम वर्ग, महिलाओं, बेरोजगार युवाओं और बुजुर्गों से लेकर कॉरपोरेट कंपनियों को कई उम्मीदें हैं। दरअसल अप्रैल-मई में चुनाव होना है इस लिहाज से भी इस बजट को काफी खास माना जा रहा है।

भारतीय बजट का अपना पुराना इतिहास है और कहते हैं कि देश की बात देश की भाषा में होनी चाहिए इसलिए बजट को अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी पेश किया जाता है। हिंदी में बजट को पेश करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि इसे आम लोग भी आसानी से समझें। इसलिए देश में सबसे पहले वर्ष 1955-56 में पहली बार हिंदी में बजट पेश किया गया था। तब से लगातार बजट भाषण हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार होते आ रहा है। यह अलग बात है कि देश के वित्त मंत्री अपनी सुविधा के हिसाब से हिंदी या अंग्रेजी में बजट भाषण पढ़ते हैं।

गौरतलब है कि अब आम बजट और रेल बजट अलग-अलग नहीं पेश किए जाते हैं। इनका मर्जर एक ही बजट में कर दिया गया है। ये दोनों अब एक साथ पेश किए जाते हैं।

1967-68 का बजट

एक विशेष सम्मान में अपनी तरह का यह पहला बजट था। पहली बार बजट को उपप्रधानमंत्री (मोरारजी देसाई) ने पेश किया था, जो वित्त मंत्री भी थे।

1968-69 का बजट

इस बजट में 'स्पाउस अलाउंस' को समाप्त कर दिया गया। जो टैक्स बचाने का एक जरिया हुआ करता था। इसके जरिये पति और पत्नी दोनों इनकम टैक्स बचाया करते थे।

1969-70 का बजट

इस बजट के बाद कुछ उत्पादों की कीमत में तेजी सी बढ़ोतरी हुई, दरअसल 'स्टेटस सिंबल' के रूप में देखे जाने के कारण करों में वृद्धि की गई थी। ऐसी आयातित कारें जिनकी ड्यूटी 60 से बढ़ाकर 100 फीसद कर दी गई थी, इसे अन्य लक्जरी वस्तुओं के बराबर लाया गया, जिन्हें स्टेटस सिंबल के रूप में देखा गया।

1970-71 का बजट

यह बजट इसलिए खास रहा क्योंकि इसे एक महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पेश किया था, जो उस वक्त वित्त मंत्री भी थीं।

1971-72

1971-72 के बजट में नकद सौदों पर अंकुश लगाने के लिए एक नई व्‍यवस्‍था की गई जिसका सीधा असर पर्यटकों पर पड़ा था। नकद में टिकट खरीदने पर 20 फीसद टैक्‍स देना होगा। अगर विदेशी मुद्रा में टिकेट के लिए भुगतान करते हैं तो इस पर टैक्‍स नहीं लगेगा।

1972-73

यह बजट शब्दों और साहित्य से प्यार करने वालों के लिए अच्छा साबित नहीं हुआ। इसमें क्रॉसवर्ड पज़ल्स को हल करके अर्जित पुरस्कारों पर 34.5 फीसद का टैक्स प्रस्तावित कर दिया गया।

1974-75

इस बजट में इनकम टैक्स स्ट्रक्चर में सुधार किया गया। इसमें इनकम टैक्स और सरचार्ज को 97.75 फीसद से 75 फीसद कर दिया गया।

1975-76

इस बजट में सरकारी कर्मचारियों को इंसेंटिव बोनस स्कीम का लाभ शुरू किया गया ताकि वे अपने भविष्य निधि खातों से अक्सर पैसे नहीं निकाल पाएं।

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