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लोहड़ी पर्व 13 जनवरी को एवं लोहड़ी बसंत के आगमन के साथ मनाया जाता है

[Edited By: Rajendra]

Monday, 13th January , 2020 04:12 pm

लोहड़ी पर्व 13 जनवरी को मनाया जाता है। पंजाब व जम्मू-कश्मीर आदि स्थानों पर इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। लोहड़ी का पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाने की परंपरा है। सिख व पंजाबी धर्म के अनुसार 13 जनवरी को लोहड़ी जलाकर नव विवाहित जोड़ों और शिशुओं को बधाई देकर उपहार दिए जाएंगे। सिंधी समाज में भी मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व लाल लोही के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है।

ये एक तरह से प्रकृति की उपासना और आभार प्रकट करने का पर्व है। मान्यताओं के अनुसार लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप से सूर्य और अग्नि देव को समर्पित है। लोहड़ी की पवित्र अग्नि में नवीन फसलों को समर्पित करने का भी विधान है।

खेत खलिहान का उत्सव वैसाखी त्योहार की तरह लोहड़ी का सबंध भी फसल और मौसम से है। इस दिन से पंजाब में मूली और गन्ने की फसल बोई जाती है। लोहड़ी का आधुनिक रूप आधुनिकता के चलते लोहड़ी मनाने का तरीका बदल गया है। अब लोहड़ी में पारंपरिक पहनावे और पकवानों की जगह आधुनिक पहनावे और पकवानों को शामिल कर लिया गया है।

यह भी मान्यता है कि सुंदरी एवं मुंदरी नाम की लड़कियों को सौदागरों से बचाकर दुल्ला भट्टी ने हिंदू लड़कों से उनकी शा‍दी करवा दी थी। एक मान्यता के अनुसार द्वापरयुग में जब सभी लोग मकर संक्रांति का पर्व मनाने में व्यस्त थे। तब बालकृष्ण को मारने के लिए कंस ने लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल भेजा, जिसे बालकृष्ण ने खेल-खेल में ही मार डाला था। लोहिता नामक राक्षसी के नाम पर ही लोहड़ी उत्सव का नाम रखा। उसी घटना को याद करते हुए लोहड़ी पर्व मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार सती के त्याग के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है। कथानुसार जब प्रजापति दक्ष के यज्ञ की आग में कूदकर शिव की पत्नी सती ने आत्मदाह कर लिया था। उसी दिन की याद में यह पर्व मनाया जाता है।

लोहड़ी के दिन विशेष पकवान बनते हैं, जिसमें गजक, रेवड़ी, मूंगफली, तिल-गुड़ के लड्डू, मक्का की रोटी और सरसों का साग प्रमुख होते हैं। लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही छोटे बच्चे लोहड़ी के गीत गाकर लोहड़ी के लिए लकड़ियां, मेवे, रेवडियां, मूंगफली इकट्ठा करने लग जाते हैं।

नववधू, बहन, बेटी और बच्चों का उत्सव पंजाबियों के लिए लोहड़ी उत्सव खास महत्व रखता है। जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चा हुआ हो उन्हें विशेष तौर पर बधाई दी जाती है। प्राय: घर में नव वधू या बच्चे की पहली लोहड़ी बहुत विशेष होती है। इस दिन बहन-बेटियों को घर बुलाया जाता है।

सिख व पंजाबी धर्म के अनुसार इस दिन लोग लकड़ी जलाकर अग्नि के चारों ओर चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं और आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, मक्की के दानों की आहुति देते हैं।

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