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जानें महात्‍मा गांधी व लालबहादुर शास्‍त्री  की कुछ ख़ास बातें

[Edited By: Aviral Gupta]

Friday, 2nd October , 2020 12:36 pm

 

भारत के इतिहास में 2 अक्टूबर का दिन देश की दो महान विभूतियों के जन्मदिन के तौर पर दर्ज है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 2 अक्टूबर 1869 को पैदा हुए और उनके कार्यों और विचारों ने आजाद भारत को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाई। तो वही पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था। उनकी सादगी और विनम्रता के लोग कायल थे। 1965 के भारत पाक युद्ध के दौरान दिया गया ‘जय जवान जय किसान’ का उनका नारा आज के परिप्रेक्ष्य में भी सटीक और सार्थक है।  लाल बहादुर शास्त्री कहते थे कि लोगों को सच्चा लोकतंत्र या स्वराज कभी भी असत्य और हिंसा से प्राप्त नहीं हो सकता है। कानून का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि हमारे लोकतंत्र की बुनियादी संरचना मजबूत बनें। वो कहते थे कि यदि मैं एक तानाशाह होता तो धर्म और राष्ट्र अलग-अलग होते। मैं धर्म के लिए जान तक दे दूंगा, लेकिन यह मेरा नीजी मामला है। राज्य का इससे कुछ लेना देना नहीं है। राष्ट्र धर्मनिरपेक्ष कल्याण, स्वास्थ्य, संचार, विदेशी संबंधो, मुद्रा इत्यादि का ध्यान रखेगा लेकिन मेरे या आपके धर्म का नहीं। वो सबका निजी मामला है। यदि कोई एक व्यक्ति को भी ऐसा रह गया जिसे किसी रूप में अछूत कहा जाए तो भारत को अपना सर शर्म से झुकाना पड़ेगा।
हम सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि समस्त विश्व के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास में विश्वास रखते हैं। हम सभी को अपने-अपने क्षत्रों में उसी समर्पण, उसी उत्साह और उसी संकल्प के साथ काम करना होगा जो रणभूमि में एक योद्धा को प्रेरित और उत्साहित करती है। अगर बात गांधी जी की करें तो महात्मा गांधी जी कहा करते थे विश्व के सभी धर्म, भले ही और चीजों में अंतर रखते हों, लेकिन सभी इस बात पर एकमत हैं कि दुनिया में कुछ नहीं बस सत्य जीवित रहता है। मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन।
जब मैं निराश होता हूं, मैं याद कर लेता हूं कि समस्त इतिहास के दौरान सत्य और प्रेम के मार्ग की ही हमेशा विजय होती है। कितने ही तानाशाह और हत्यारे हुए हैं, और कुछ समय के लिए वो अजेय लग सकते हैं, लेकिन अंत में उनका पतन होता है। मैं हिंसा का विरोध करता हूं, क्योंकि इससे कोई भी हल नहीं निकलना है। सत्य एक है, मार्ग कई। क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है।

 

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