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Karva Chauth 2019: जानिए क्या है करवा चौथ मनाने का कारण, इस साल बना महासंयोग, जरूर रखें इन 10 नियमों का ध्यान

[Edited By: Gaurav]

Wednesday, 16th October , 2019 04:14 pm

गुरुवार 17 अक्टूबर को करवाचौथ का त्योहार मनाया जाएगा. करवा चौथ के दिन पति की लंबी उम्र की कामना के लिए पत्नियां व्रत रखती हैं. करवाचौथ के दिन सुहागन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन इस निर्जला व्रत को शुरू करने से पहले महिलाएं सुबह-सुबह सबसे पहले सरगी लेती हैं. सरगी लेने के बाद से ही व्रत की शुरुआत होती है. लेकिन सुबह-सुबह हल्की सरगी के बाद पूरा दिन अगर आपको भूखा ही नहीं प्यासा भी रहना है, तो यह जरूरी हो जाता है कि आप सरगी में कुछ ऐसे हेल्दी फूड शामिल करे जो आपको पूरे दिनभर एनर्जी दें.

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सरगी में खाएं ये चीजें..........

1. ज्यादा ऑयली खाना न खाएं - तला हुआ खाना खाने से पाचन क्रिया पर असर पड़ सकता है. आपको व्रत तोड़ने के बाद सलाद और स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक आहार खाना लेना चाहिए. व्रत तोड़ने के बाद सबसे पहले पानी पीना चाहिए.

2. फल और मेवे खाएं - यह तो हम सभी जानते हैं कि करवा चौथ के दिन महिलाएं पूरा दिन निर्जल रहती हैं. ऐसे में शरीर में पानी की कमी हो सकती है. तो यह जरूरी हो जाता है कि आप सरगी में ही ऐसे फल लें जो पूरा दिन शरीर को हाइड्रेट रखें. अगर आप इस दौरान कुछ ड्राई फ्रूट्स भी ले लेती हैं तो यह पूरा दिन आपकी मदद करेंगे. मुट्ठी भर ड्राईफ्रूट्स खाने से शरीर को भरपूर विटामिन और मिनरल्स मिलेंगे.

3. दूध और फेनिया का सेवन करें - सरगी का एक जरूरी हिस्सा है दूध और फेनिया. यह रीति-रिवाज के लिहाज से ही नहीं सेहत के लिहाज से भी बहुत अहम है. फेनिया गेहूं के आटे से तैयार होती है और इसे दूध में बनाया जाता है. यह प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा मेल है. इसे खाने से आप दिन भर एनर्जी से भरपूर रह सकती हैं.

4. सरगी में फल जरूर खांए- फलों में काफी मात्रा में फाइबर और पानी होता है. जो निर्जला व्रत के दौरान आपको हाइड्रेट रखने में मदद करता है. तो सरगी में फलों को खास जगह दें. ऐसे फल लें जो पचने में समय लगाएं और फाइबर से
भरपूर हों.

5. तला-भुना न खाएं- अगर आप ज्यादा तला-भुना, मीठा या बिना नमक का खाना ले रहे हैं तो यह आपको ब्लडप्रेशर से जुड़ी समस्या दे सकता है. ठीक इसके उलट अगर आप सिर्फ फ्रूट्स खाते हैं और पानी कम पीते हैं तो कब्ज या शारीरिक कमजोरी महसूस हो सकती है

6. नारियल पानी- क्योंकि आपको पूरे दिन बिना पानी के रहना है इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि आप सरगी के समय नारियल गिरी और नारियल पानी लें. यह तासीर में ठंड़ा होता है और शरीर को पूरा दिन हाइड्रेट रख सकता है.

करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन मूल रूप से भगवान गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की उपासना होती है. चंद्रमा को आमतौर पर आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है. इसलिए चंद्रमा की पूजा करके महिलाएं वैवाहिक जीवन मैं सुख, शांति और पति की लम्बी आयु की कामना करती हैं.

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करवाचौथ व्रत के नियम और सावधानियां

- केवल सुहागिनें या जिनका रिश्ता तय हो गया हो वही स्त्रियां ये व्रत रख सकती हैं

- ये व्रत निर्जल या केवल जल ग्रहण करके ही रखना चाहिए

- व्रत रखने वाली कोई भी महिला काला या सफेद वस्त्र कतई न पहनें

- इस व्रत के लिए लाल वस्त्र सबसे उत्तम माना गया है, पीला वस्त्र भी पहना जा सकता है

- आज के दिन महिलाओं को पूरे 16 श्रृंगार करने चाहिए.

- अगर कोई महिला अस्वस्थ है तो उसकी जगह उसके पति ये व्रत कर सकते हैं.

- व्रत की कथा पूरे मन से सुनें और इस दौरान किसी दूसरे से बातें न करें

- चांद देखने के बाद मां गौरी की पूजा करें और भगवान को पूरी-हलवा के प्रसाद का भोग लगाएं.

- करवाचौथ के दिन पति के साथ भूलकर भी लड़ाई न करें.
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करवा चौथ पर शुभ संयोग

इस बार का करवा चौथ का व्रत बेहद खास है. 70 साल बाद करवा चौथ पर इस बार शुभ संयोग बन रहा है. इस बार रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग होना करवा चौथ को अधिक मंगलकारी बना रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्याभामा योग इस करवा चौथ पर बन रहा है. पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए ये व्रत बहुत अच्छा है.

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करवा चौथ का चंद्रोदय: शाम 7 बजकर 58 मिनट पर चांद का उदय होगा. इसी समय चंद्र देव को अर्घ्य देने का शुभ समय होगा.

इस साल का करवा चौथ बेहद शुभ समय में पड़ रहा है. यह योग 70 साल बाद बन रहा है. इस शुभ समय में चंद्र देव अपनी प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ उदय होंगे अर्थात रोहिणी नक्षण में चंद्रमा का उदय होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये एक बेहद शुभ योग है और ऐसा योग कई सालों बाद बनता है.

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चांद को छलनी से क्यों देखा जाता है?

धार्मिक आधार


धार्मिक आधार पर देखें तो कहा जाता है कि चंद्रमा भगवान ब्रह्मा का रूप हैं. एक मान्यता यह भी है कि चांद को दीर्घायु का वरदान प्राप्त है और चांद की पूजा करने से दीर्घायु प्राप्त होती है. साथ ही चद्रंमा सुंदरता और प्रेम का प्रतीक भी होता है, यही कारण है कि करवा चौथ के व्रत में महिलाएं चांद की पूजा करती हैं ताकि उनके पति को लंबी उम्र प्राप्त हो सके. वहीं चांद सुंदरता का प्रतीक है तो उसे किसी की नजर न लग जाए इसलिए ही उसे छलनी की आढ़ से देखा जाता है. पत्नी छलनी से चांद को देखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है.

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक साहूकार की बेटी ने अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था पर अत्यधिक भूख की वजह से उसकी हालत खराब होने लगी थी. यह देखकर साहूकार के बेटों ने अपनी बहन से खाना खाने को कहा लेकिन साहूकार की बेटी ने खाना खाने से मना कर दिया. भाइयों से बहन की ऐसी हालत देखी नहीं गई तो उन्होंने चांद के निकलने से पहले ही एक पेड़ पर चढ़कर छलनी के पीछे एक जलता हुआ दीपक रखकर बहन से कहा कि चांद निकल आया है.

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