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बगदादी के खात्मे के बाद आतंकवादियों पर 'मौत का खौफ', जानिए कब-कैसे और कहां मारा गया इस्‍लामिक स्‍टेट का प्रमुख अबू-बकर-अल- बगदादी

[Edited By: Gaurav]

Monday, 28th October , 2019 01:34 pm

आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट के प्रमुख और खूंखार आतंकी अबू-बकर-अल- बगदादी के खात्‍मे के बाद आईएस का बिखराव तय माना जा रहा है। छह नाकाम कोशिशों के बाद अमेरिका को सातवीं बार बगदादी को मारने में सफलता हासिल हुई है। इस बार बाकायदा डीएनए से बगदादी के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि बगदादी का अंत जहां पर हुआ है कभी यह पूरा इलाका इसका गढ़ हुआ करता था। आईएस का फैलाव सऊदी अरब सीरिया, इराक और तुर्की के सीमावर्ती इलाकों के अलावा अफगानिस्‍तान तक था। अफगानिस्‍तान में तालिबान से इसका गठजोड़ था। दोनों ने मिलकर कई जगहों पर हमलों को अंजाम दिया। हालांकि इस गठजोड़ के बाद भी तालिबान और आईएस की सीमाएं काफी हद तक बंटी हुई थीं। इसमें तालिबान का अफगानिस्‍तान और IS का दूसरे इलाकों पर कब्‍जा था।

अब हम उस जगह के बारे में आपको जरा बता देते हैं जहां पर बगदादी को ढेर करने में अमेरिकी जवानों को सफलता हासिल हुई। यह जगह सीरिया में हैं। इसका नाम है बारिशा। यह एक गांव है जो तुर्की की सीमा से कोई दस किमी की दूरी पर था। वहीं सीरिया की राजधानी अलेप्‍पो से इसकी दूरी करीब 90 किमी थी। अलेप्‍पो से यदि सड़क से यह दूरी तय की जाए तो करीब दो घंटे का समय लगता है। वहीं सीरिया के ही इदलिब से यह 32 किमी की दूरी पर स्थित है। बगदादी की मौत के बाद यह पूरा इलाका सुर्खियों में आ गया है।

पूरे इलाके में छोटी बड़ी खुफाएं

इस पूरे इलाके की खासियत है कि यहां पर छोटी-छोटी कई गुफाएं मौजूद हैं, जो बेहद प्राचीन हैं। यही वह है कि बगदादी अपने छिपने के लिए मुफीद जगह मानता था। इसके अलावा यहां पर कई सुरंग भी हैं जो आतंकियों ने अपने लिए तैयार की हुई हैं। यह इलाका आईएस का गढ़ होने के साथ आतंकियों को ट्रेनिंग वाला इलाका भी था। यहां से ही आईएस के आतंकी तैयार होकर दूसरी जगहों पर भेजे जाते थे और वो अपने खूनी खेल को अंजाम देते थे।

सुनसान इलाके में जमाया था डेरा

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के विशेष कमांडोज ने सीरिया के इदलिब प्रांत के सुदूर गांव बारिशा में शनिवार की रात को बगदादी को उसके अंजाम तक पहुंचाने के लिए ऑपरेशन शुरू किया। अमेरिकी सैनिक जब आतंकी सरगना अबू बकर-अल बगदादी की तलाश में अचानक इस सुनसान इलाके में पहुंचे तो लोगों को लगा कि यह आम ऑपरेशन है लेकिन जब अमेरिकी हेलिकॉप्‍टर एक खास मकान के ऊपर मंडराने लगे तो अभास होने लगा कि यह कोई आम ऑपरेशन नहीं है।

एक घंटे तक आसमान में मंडराते रहे अमेरिकी हेलिकॉप्‍टर

अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी हेलिकॉप्‍टर स्‍पेशल कमांडोज को लेकर शनिवार को शाम पांच बजे के बाद वॉशिंगटन डीसी के एक अज्ञात स्थान से रवाना हुए थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हेलिकॉप्टर एक घंटे दस मिनट तक दोनों दिशाओं में आसमान में रहे जबकि ऑपरेशन दो घंटे तक चला। हेलिकॉप्‍टरों ने तुर्की के ऊपर से उड़ान भरी। यही नहीं सीरियाई और रूसी सेनाओं के प्रभाव वाले इलाकों के ऊपर से भी उड़े। राष्‍ट्रपति ट्रंप की मानें तो यह अमेरिकी हेलिकॉप्‍टरों की बेहद मुश्किल उड़ान थी।

अमेरिका ने झोंक दी थी पूरी ताकत

अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने संवाददाताओं को बताया कि हमारे हेलिकॉप्‍टर काफी नीचे बहुत तेज गति से उड़ान भर रहे थे। हेलिकॉप्‍टर जब बगदादी के ठिकाने पर पहुंचे तो स्‍थानीय आतंकियों ने उन पर भारी फायरिंग की जिसे विफल कर दिया गया। बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मिशन में अमेरिका की स्‍पेशल फोर्स के एक बड़े समूह को शामिल किया था। इसमें आठ हेलिकॉप्टरों के अलावा कई पोत और फाइटर प्लेन भी शामिल थे। ट्रंप ने बताया कि रूस को इस ऑपरेशन के बारे में नहीं बताया गया था फिर भी उसने अमेरिकी हेलिकॉप्टरों को जाने दिया।

70 कुशल डेल्टा कमांडोज ने ऑपरेशन को दिया अंजाम

डेली मेल की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पूरा ऑपरेशन ठीक वैसा ही था जैसा की पाकिस्‍तान के ऐबटाबाद में अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के खिलाफ चलाया गया था। कहा जाता है कि ऐबटाबाद में ऑपरेशन उस खुफ‍िया सूचना के बाद चलाया गया था कि 'उक्‍त ठिकाने पर लादेन के मौजूदगी की संभावना सबसे अधिक है।' अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप के बयान के मुताबिक, सबसे पहले अमेरिकी हेलिकॉप्‍टरों ने बगदादी के ठिकाने को घेर लिया और उसके बाद अमेरिकी सेना के 70 कुशल डेल्टा कमांडोज उतरे।

ऑपरेशन की लाइव स्‍ट्रीमिंग देख रहे थे ट्रंप

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, बिल्‍कुल किसी फ‍िल्‍मी सीन की तरह कुशल अमेरिकी डेल्टा कमांडोज ने उतरने के बाद बगदादी के उस गुफानुमे बंकर को घेरना शुरू किया। अत्‍याधुनिक हथियारों और साजो सामान से लैस कमांडोज के पास प्रशिक्षित कुत्ते और एक रोबोट था। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस पूरे ऑपरेशन को अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप, व्हाइट हाउस में बैठकर लाइव देख रहे थे। यह पूरा ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था। इसमें हर पल यह खतरा था कि कहीं जमीन पर या दरवाजों पर ऑटो‍मेटिक विस्‍फोटक न लगे हों।

मारी गईं दोनों बीवियां

अमेरिकी कमांडोज जब गुफा के दरवाजे पर पहुंचे तो उन्‍होंने उसे खोलने के बजाए गुफा की दीवार को ही उड़ा दिया। गुफा में पहुंचने पर अमेरिकी कमांडोज को बगदादी की दो पत्नियां दिखीं जिन्‍होंने कमर में विस्फोटक बांध रखा था। दोनों खुद को उड़ा पातीं उससे पहले कमांडोज की फायरिंग में वे मारी गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन से पहले ही अमेरिकी सेना ने बड़ी संख्या में आईएस के आतंकियों का खात्‍मा किया था। अमेरिकी कमांडोज को निर्देश थे कि बगदादी पकड़ा जाए तो ठीक अन्‍यथा उसे ढेर कर दिया जाए।

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