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भारतीय रेल और राज्य सरकारों ने मिलकर अगले 10 दिनों के लिए 2600 ट्रेनें चलाई जाएंगी

[Edited By: Rajendra]

Saturday, 23rd May , 2020 05:29 pm

रेलवे बोर्ड के अध्‍यक्ष विनोद कुमार यादव ने कहा कि भारतीय रेलवे एक मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेनें शुरू की गई। सभी यात्रियों को मुफ्त भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। ट्रेनों और स्टेशनों में सोशल डिस्टेंसिंग और स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। 80% ट्रेन यात्राएं उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासी मजदूरों द्वारा की गई हैं।

भारतीय रेल और राज्य सरकारों ने मिलकर अगले 10 दिनों के लिए एक शेड्यूल बनाया है और 2600 ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसमें 36 लाख यात्री सफर कर पाएंगे। अगर किसी भी स्टेशन से ज्यादा संख्या में प्रवासी अपने घर जाना चाहेंगे तो उनके लिए भी ट्रेन सेवा उपलब्ध करवाई जाएगी।

प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित घरों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है. इसी रणनीति के तहत अगले दस दिनों के अंदर करीब 36 लाख पैसेंजर्स को उनके घरों तक पहुंचाया जाएगा. यही नहीं रेलवे बोर्ड के अध्‍यक्ष ने यहां तक कहा कि घबराएं नहीं आरएसी टिकट के कन्‍फर्म होने की पूरी संभावना है.

उन्‍होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए 1 जून से 200 और स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया गया है। इस दौरान शिकायत आ रही थीं कि श्रमिक भाई बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए टिकट काउंटर खोलने का भी फैसला किया गया। प्रवासी श्रमिकों के लिए जो ट्रेनें चलाई जा रही हैं, वे राज्य सरकार के समन्वय के साथ चलाई जा रही हैं। अगर जरूरत पड़ी तो 10 दिन के बाद भी ट्रेनें शेड्यूल की जाएंगी।

श्रमिक स्पेशल ट्रेन का 85 फीसदी किराया केंद्र सरकार और 15 फीसदी किराया राज्य सरकारों ने वहन किया था. शुरुआत में कुछ मामलों में जानकारी आयी थी जब राज्य सरकारों ने पैसेंजर से रिम्बर्समेंट किया था.

उत्तरप्रदेश और बिहार वाले रुट में काफी भीड़ होने की वजह से ये फैसले लिए गए कि किसी वैकल्पिक रुट के जरिये गंतव्य तक ट्रेनों को पहुंचाया जाए.

यदि हमें किसी भी राज्य सरकार को आवश्यकता होती है, तो हम राज्य के भीतर ट्रेनें चलाने के लिए भी तैयार हैं.

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