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सेक्स सर्वे 2019 में हुए कई चौंकाने वाले खुलासे, 'इंडिया टुडे' पिछले कई सालों से करा रहा है ये अनोखा सर्वे

[Edited By: Gaurav]

Wednesday, 6th November , 2019 05:34 pm

देश के मशहूर मीडिया संस्थान 'इंडिया टुडे' ने इस साल 2019 का सेक्स सर्वे जारी कर दिया है. इस सर्वे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. इस सर्वे के दौरान वायग्रा, टॉयस, वर्जिनिटी, डिल्डो, वाइब्रेटर और पॉर्न पर लोगों के विचार जाने गए थे. आपको बता दें इंडिया टुडे पिछले 16 साल से यह सर्वे करा रहा है. इस साल 17वां सर्वे था. पहला सर्वे साल 2003 में किया गया जिसमें कई छोटे और बड़े शहरों के लोगों के विचार शामिल किए गए थे.

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'मिनी बॉम्बे' इंदौर के लोगों का कुछ ऐसा रहा रिएक्शन

इंदौर को  मध्य प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी भी कहा जाता है. लेकिन उदारीकरण के बाद मॉल, मल्टीप्लेक्स, स्वैंकी कारों (महंगी गाड़ियां), फार्महाउस और पॉश रियल एस्टेट की मशरूमिंग (तेजी से बढ़ोत्तरी) में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई है. यहां के लोग अपने शहर को 'मिनी बॉम्बे' कहना पसंद करते हैं.  

शहर के हवाई अड्डे से प्रतिदिन 100 से ज्यादा फ्लाइट्स उड़ानें भरती हैं. यह शहर सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाला है यही वजह है कि शौक रखने वालों की कमी नहीं है. 

इंदौर में आउट-ऑफ-वर्क स्टार्स का आना भी आम है, यहां सेक्स वर्कर्स की कमी नहीं हैं. इंदौर की पुलिस भी इस बात से अवगत है कि क्या हो रहा है, लेकिन स्वीकार्यता की भावना है- यह सड़कों पर नहीं है, तभी सब कुछ शायद ठीक-ठाक ही चल रहा है.  

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इंदौर में मनोरंजन पर खर्च किए जा रहे पैसों का एक बड़ा हिस्सा सॉलिड पेड सेक्स पर है. पिछले कुछ वर्षों में इंदौर में जितने भी फार्महाउस और रिसॉर्ट्स हैं, वे सभी निजी कंपनियों के लिए सर्विस प्रोवाइडर हैं. कभी होलकरों द्वारा शासित और निर्लज्ज और विनम्र मराठी समुदाय के प्रभुत्व वाले इंदौर में डिस्पोजेबल (देने योग्य) आय के मामले में एक लंबा सफर तय हुआ. शायद यही इस कॉमर्शियल शहर की जीवन रेखा है. 

इंदौर के कई लोग रिश्तों को समय की बर्बादी के रूप में देखते हैं, उनका अधिकतर समय पैसों की खोज में जाता है. पेड सेक्स एक बेहतर, बिना तार के जुड़ा हुआ विकल्प है ... इंदौर के एक बैंकर का कहना है, चेस (शिकार करना) कम से कम है.

शहर ने काम या अध्ययन के लिए पड़ोसी शहरों के युवाओं की एक बड़ी आबादी को भी आकर्षित किया है. बैंकर कहते हैं, "यह जनसांख्यिकी (Demography) शहर को गुमनाम कर देती है कि उनका यौन संबंध किसी पेशे और भावनात्मक मुद्दे के बीच है." उन्होंने कहा  कि आजकल के युवा सोशल मीडिया पर लोगों से दोस्ती करने के लिए तैयार हैं, यहां तक ​​कि यहां टिंडर का इस्तेमाल भी खूब हो रहा है.  उनके साथ बाहर जाएं, बशर्ते कि वे 'दोस्तों' को उनकी भौतिक जरूरतों का ख्याल रखें, चाहे वो स्मार्टफोन हो, आउटिंग या सभी तरह के उपहार।

कनेक्टिविटी भी इंदौर की मानसिकता  में बदलाव लाने में एक प्रमुख भूमिका निभाती है. शहर में अब दुबई के लिए भी एक उड़ान है. शहर के ट्रैवल एजेंट बताते हैं कि बैंकॉक एक बहुत ही लोकप्रिय हॉलिडे डेस्टिनेशन है, खासकर सभी पुरुष समूहों के बीच. कोई आश्चर्य नहीं कि इंदौर से अगले अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन की घोषणा कभी भी हो सकती है. 

छोटे शहरों में यौन आदतों और कामों को समझाना हमेशा मुश्किल होता है. भारत आज सेक्स सर्वेक्षण निष्कर्ष प्रत्येक शहर और कस्बे में सीमित संख्या में उत्तरदाताओं पर आधारित है और केवल सांकेतिक हैं. उन्हें पूरे शहर या शहर की आबादी से जोड़ा नहीं जा सकता है.

यह सावधानी के साथ है कि हम रिपोर्ट करते हैं कि इंदौर में सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 48 प्रतिशत ने Paid सेक्स (भुगतान के बाद) करने की बात कही है.  27 प्रतिशत लोग डिल्डो का इस्तेमाल शौक के लिए करते हैं.  75 फीसदी लोगों के लिए, कौमार्य (वर्जिनिटी) कोई मुद्दा नहीं था. 

लगभग 84 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने भी कहा कि वे अपने सहयोगियों के साथ सेक्स के बारे में बात करते हैं क्योंकि यह उन्हें जुड़ा हुआ महसूस कराता है. कुल मिलाकर, 92.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपने यौन जीवन से खुश हैं.

तमाम दौलत और बदलावों के बावजूद इंदौर का एक हिस्सा अभी भी छोटा शहर है, जहां उसके सभी गुण मौजूद हैं. यहां अभी भी बड़ी आबादी शादी से बाहर यौन संबंध बनाने को ठीक नहीं समझती.  परिवार की व्यवस्था को बरकरार रखने के बीच उत्तरदाताओं के द्वंद्ववाद और अलग-अलग जवाबों  के लिहाज से इंदौर किसी भी अन्य भारतीय शहर से अलग नहीं है.

आसपास के राज्यों के लिए सिटी ऑफ लाइट बना चंडीगढ़

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चंडीगढ़ अब हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए प्रकाश शहर (City of Light) बनकर उभरा है. यह शहर भी कभी सोता नहीं. पहले ये शहर केवल नॉर्थ बेल्ट (उत्तरी इलाकों के शहर) से आये सेवानिवृत्त लोगों द्वारा पसंद किया जाता था. अब यह शहर न केवल आबादी के मामले में बढ़ गया है, बल्कि इसके महानगरीय प्रकृति के अनुरूप भी हैं. बार, नाइट क्लब, मॉल, पहाड़ियों से निकटता और शहर के भीतर और आसपास के प्राइवेट एजूकेशन सेंटर्स का बढ़ना यह सुनिश्चित करता है कि आसपास के राज्यों के युवा इस स्थान को पसंद कर रहे हैं.  


एक विविध युवा आबादी के साथ, चंडीगढ़, जिसे कुछ दशक पहले रूढ़िवादी कहा जा सकता था, मगर अब यहां के लोगों की सोच में बड़े बदलाव आये हैं.  हिमाचल प्रदेश की 24 वर्षीय सुनैना शर्मा (अनुरोध पर बदला हुआ नाम) के मामले को लें, जो सेक्टर 45 में अपने प्रेमी के साथ एक अपार्टमेंट शेयर करती हैं. एक सिविल सेवा प्रारंभिक संस्थान में दाखिला लिया, सुनैना कहती हैं कि दोनों को किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता क्योंकि वे दोनों जगह का किराया मिलकर देते हैं. सुनैना ने कहा "मैंने अपनी मकान मालकिन को स्पष्ट कर दिया कि मेरा साथी मेरे साथ रहेगा. वह बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं हुईं. मेरे कई दोस्त जो यहां रहते हैं, वे कहते हैं कि यह एक दशक पहले संभव नहीं था."

पणजी यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में समाजशास्त्र के प्रोफेसर, 58 वर्षीय राजेश गिल कहते हैं कि कुछ दशक पहले के हालात बिल्कुल अलग थे इसे डेड सिटी भी कहा जाता था. मगर आज चंडीगढ़ खुले विचारों वाला शहर है. बढ़ती युवा आबादी का मतलब यह भी है कि अब यहां सेक्स के बारे में फुसफुसाते हुए बात नहीं की जाती. यहां लोग बहुत अधिक उदार हो रहे हैं."

श्रेया गोस्वामी (45, नाम अनुरोध पर बदल गया) ने कहा कि वह एक साल पहले एक्सट्रा मैरिटल अफेयर में थे. शहर के उदारवादी रवैये और गैर-हस्तक्षेप करने वाले रवैये ने सुनिश्चित किया है तभी उनका जीवन कभी दुखी नहीं हुआ. कहा "बेशक, मेरे सर्कल के अधिकांश लोग जानते थे. हम एक साथ कई सामाजिक-डॉस पर थे. लेकिन मुझे याद नहीं है कि कोई मुझे असहज कर रहा है. इस शहर में अच्छी तरह से यात्रा करने वाला उच्च मध्यम वर्ग आपको होने देता है और पिछले दस सालों में कई बड़े बदलाव आए हैं.  

डॉ. सिम्मी वाराइच, एक सलाहकार मनोचिकित्सक, जिन्होंने कई दशकों से चंडीगढ़ में अभ्यास किया है, उन्हें लगता है कि शहर में आने वाले युवाओं को एक ऐसा वातावरण मिलता है, जहां वे युवा वयस्क होते हैं न कि वे घर पर रहने वाले अति-संपन्न बच्चे. घर से दूर शहर की गुमनामी, शहर से दूर गुमनामी, मोबाइल फोन पर 24 घंटे की बिना सेंसर की सुविधा, सहकर्मियों के साथ रहना, जो सेक्स के साथ प्रयोग कर रहे हैं और टिंडर जैसे डेटिंग ऐप्स का मुहूर्त सेक्स के लिए आते समय अधिक खुली मानसिकता पैदा करते हैं.  "इतने सारे लोग अब मेरे पास आते हैं और बिना किसी अवरोध के सेक्स पर चर्चा करते हैं. वे समान सेक्स संबंधों या उभयलिंगीपन के बारे में खुलकर बात करते हैं". उनके अनुसार "युवा महिलाओं की यह पीढ़ी अपनी माताओं से अलग है"

जयपुर में 87 प्रतिशत लोग वियाग्रा या इसके वेरिएंट लेते हैं

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जयपुर के उत्तरदाताओं के लिए सेक्स बढ़ाने वाली दवाएं और उपकरण व्यक्तिगत मुद्दा है. बाकी कुछ लोग अपने डॉक्टरों से सलाह लेते हैं तो कुछ अपनी कल्पनाओं से ऐसा करते हैं. 87 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे वियाग्रा या इसके वेरिएंट लेते हैं. 

राजस्थान के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान के एसएमएस मेडिकल कॉलेज  के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी का इस मुद्दे को लेकर एक अलग ही दृष्टिकोण हैं उनका कहना है "देर से ही सही मगर जयपुर के लोगों में बहुत जागरूकता है कि कैसे विभिन्न चिकित्सा स्थितियां कामेच्छा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं, " सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चलता है कि लोग सेक्स के बारे में खुलकर बात करने में अनिच्छुक हो सकते हैं, लेकिन वे मेडिकल चिकित्सकों के साथ यौन समस्याओं पर पहले से ज्यादा खुलकर चर्चा कर रहे हैं.

डॉ. भंडारी कहते हैं, "उनमें से कई इस बात का खुलासा करते हैं कि मधुमेह ने उनके यौन प्रदर्शन को कैसे प्रभावित किया है, और हम उनके लिए दवाओं को निर्धारित करने की कोशिश करते हैं," वे कहते हैं कि यौन रोग या शक्ति का नुकसान दिल की समस्याओं का पहला संकेतक हो सकता है. अधिक संभावना है कि अधिकांश उत्तरदाताओं ने कहा कि वे दवाएं ले रहे हैं, वे अपने डॉक्टरों की सिफारिश पर ऐसा कर रहे हैंं सर्वेक्षण यह भी संकेत देता है कि दो-तिहाई उत्तरदाताओं ने फोरप्ले सहित यौन क्रिया में 30 मिनट से कम समय बिताया है जो फिर से हो सकता हैं यौन समस्याओं का एक संकेतक जो वे सामना कर रहे हैंं. 


जयपुर में उत्तरदाताओं ने अपनी यौन समस्याओं पर चर्चा की और उनके डॉक्टरों के साथ संबंधित मिथक अन्य सर्वेक्षण निष्कर्षों के विपरीत हैं, जैसे 66 प्रतिशत विषय उस समय बदलते हैं जब सेक्स बातचीत में प्रवेश करता है, यहां 81 प्रतिशत लोगों के लिए कौमार्य को बड़ा मुद्दा नहीं है.  

यह रूढ़िवादी दृष्टिकोण उस तरह से परिलक्षित होता है जिस तरह से लोग पश्चिमी शैली में कपड़े पहनने वाली महिलाओं के बारे में अपनी अस्वीकृति को स्पष्ट करते हैं. यह शायद दमित भावनाएं हैं जो व्यवहार में एक अभिव्यक्ति का पता लगाती हैं जैसे कि खुले में सेक्स करना या सेक्स कराना.

जयपुर के 62 प्रतिशत उत्तरदाता नियमित रूप से पोर्न देखते हैं. वियाग्रा की आवश्यकता और इस तरह के अतिरिक्त पोर्नोग्राफी देखने का एक प्रभाव हो सकता है, प्रदर्शन की चिंता के कारण और फिर डॉक्टरों से परामर्श करने का आग्रह. सर्वेक्षण में यह भी पाया गया है कि यह शहर समलैंगिक और समलैंगिक जोड़ों पर समान सेक्स संबंधों और चर्चाओं के लिए खुल रहा है. यहां तक ​​कि पिछले कुछ वर्षों में शहर में  खुले बार और नाइट क्लब ट्रांसवेस्टाइट्स (Transvestites) की उपस्थिति बढ़ा रहे हैं.

सर्वे की कुछ और महत्वपूर्ण बातें...

स्मार्टफोन्स ने सेक्स को लेकर लोगों की सोच को काफी बदला है. इंटरनेट पर हर तरह का कंटेंट मौजूद है जैसा कि लोगों के दिमाग में चलता है. इसकी वजह से शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों की सोच में भी बदलवाए आए हैं. 'क्या वर्जिनिटी जरूरी है' सवाल को लेकर बड़े शहरों में 53 फीसदी लोगों ने हां में जवाब दिया है.  छोटे शहरों में इसका प्रतिशत थोड़ा और ज्यादा है. अहमदाबाद में 82 और जयपुर में 81 प्रतिशत लोगों ने हां में जवाब दिया है.  पोर्न देखने के सवाल पर 79 लोगों ने नियमित तौर पर पोर्न देखने की बात कही है. इमें 85 प्रतिशत पुरुषों की हां है जबकि 71 प्रतिशत महिलाओं की हां रही है. वायग्रा (बेहतर सेक्स की दवा) के इस्तेमाल के सवाल पर जयपुर के  87 प्रतिशत और चंडीगढ़ के 62 प्रतिशत लोगों ने हां में जवाब दिया है. वहीं इंदौर में 87 प्रतिशत लोग अपने पार्टनर के साथ पोर्न देखना पसंद करते हैं.  हर तीन में से एक व्यक्ति को सेक्स के दौरान हाथ-पैर बंधा होने में कोई दिक्कत नहीं होती.  वहीं 31 प्रतिशत लोगों को सेक्स के दौरान पार्टनर से पीटे जाने में कोई दिक्कत नहीं होती है. 27 प्रतिशत लोगों को सेक्स के दौरान डिल्डो या वाइब्रेटर इस्तेमाल करने में परेशानी नहीं है.  सेक्स के समय फोटो या वीडियो बनाने के दौरान 89 प्रतिशत लोग इसके खिलाफ हैं. 40 प्रतिशत लोग अपनी सेक्स लाइफ से संतुष्ट या खुश नहीं हैं. 

Posted By- Gaurav Shukla

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