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B'dy Spcl: कानपुर के परौंख गांव में जन्मे रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने की दिलचस्प कहानी

[Edited By: Admin]

Tuesday, 1st October , 2019 12:31 pm

देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का आज जन्मदिन है. आज ही के दिन साल 1945 में वह यूपी के कानपुर जिले की तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में पैदा हुए थे.  लोग उनकी विनम्रता और शिष्टता के कायल हैं. राष्ट्रपति बनने से पहले कोविंद बिहार के राज्यपाल भी रह चुके हैं. इतना ही नहीं वह शुरुआती दिनों में पेशे से वकील रहे. साल 1994 और 2000 में कोविंद उत्तरप्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुने गए और 12 साल तक सांसद रहे.


कोविंद एक सामान्य से परिवार में पैदा हुए. उनका बचपन बेहद गरीबी में बीता. इसका जिक्र उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ लेते हुए भी किया था. उन्होंने उस वक्त बताया था, '' बचपन में फूस की छत से पानी टपकता था. हम भाई-बहन दीवार के सहारे खड़े होकर बारिश बंद होने का इंतजार करते थे. आज भी जब बारिश हो रही है तो न जाने हमारे देश में ऐसे कितने ही रामनाथ कोविंद होंगे जो बारिश में भीग रहे होंगे, खेती कर रहे होंगे और शाम को रोटी मिल जाए इसके लिए मेहनत में लगे होंगे.'' उनकी बातों से साफ पता चलता है कि कितनी तकलीफों के बाद वह यहां तक पहुंचे हैं. अब वह देश के राष्ट्रपति हैं, यानी सर्वोच्च नागरिक. ऐसे में उन्हें राष्ट्रपति पद पर जो व्यक्ति होता है उसको मिलने वाली कई सुविधाए मिलती है. राष्ट्रपति कोविंद का बचपन बेशक गरीबी में बीता हो लेकिन आज वह जिस मुकाम पर हैं वह उनकी मेहनत से ही संभव हो पाया है.  

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जानिए कितनी है राष्ट्रपति की सैलेरी

2017 तक राष्ट्रपति को प्रति माह 1.50 लाख रुपये मिलते थे जो देश के शीर्ष नौकरशाहों, उच्च प्रमुखों और कैबिनेट मंत्रियों की तुलना में कम था. 2017 में ही इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया. भारत के राष्ट्रपति की तनख्वाह 5 लाख रुपये प्रतिमाह होती है. सबसे खास बात यह है कि यह सैलेरी टैक्स फ्री होती है. पांच लाख रुपये सैलेरी के अलावा भी राष्ट्रपति को खई अन्य सुविधाए मिलती है. राष्ट्रपति को मुफ्त में आवास भी मिलता है जो 5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. इसके अलावा मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं भी दी जाती है. निःशुल्क फ़ोन की सुविधा, मुफ्त यात्रा सुविधाएं, मुफ्त पेट्रोल और सचिवालय स्टाफ पर प्रति वर्ष 60,000 रुपये का कार्यालय खर्च भी दिया जाता है.


कौन सी कार है राष्ट्रपति कोविंद के पास, क्या है कीमत

राष्ट्रपति की कार महज एक कार नहीं बल्कि वह अभेद्य किला जैसा होता है. इस वक्त राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास S-600 मर्सिडीज बेंज गार्ड रेंज की कार है. इस कार को सिर्फ अलग-अलग देशों के राष्ट्र प्रमुख या कुछ विशेष सुरक्षा प्राप्त लोगों को भी दिया जाता है.

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के विचार


1. ‘राष्ट्रपति पद पर मेरा चयन मेरी जिम्मेदारी और बढ़ा रहा है’
‘देश के लिए अथक सेवा भाव मुझे यहां तक ले आया’

2. ‘बड़े-बुजुर्गों का सम्मान कभी नहीं भूलना चाहिए’राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद रामनाथ कोविंद ने कहा, 'एपीजे अब्दुल कलाम जी और प्रणब मुखर्जी ने जिस परंपरा को आगे बढ़ाया है, उस पद पर मेरा चयन मेरी जिम्मेदारी और बढ़ा रहा है.' उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि फूस की छत से पानी टपकता था. हम भाई-बहन दीवार के सहारे खड़े होकर बारिश बंद होने का इंतजार करते थे. आज भी जब बारिश हो रही है तो न जाने हमारे देश में ऐसे कितने ही रामनाथ कोविंद होंगे जो बारिश में भीग रहे होंगे, खेती कर रहे होंगे और शाम को रोटी मिल जाए इसके लिए मेहनत में लगे होंगे।

3. ‘अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करना चाहिए’
रामनाथ ने कहा कि इस पद पर रहते हुए संविधान की रक्षा करना और उसकी मर्यादा बनाए रखना मेरा कर्तव्य है। राष्ट्रपति पद पर मेरा चयन भारतीय लोकतंत्र की महानता का प्रतीक है।

4. ‘दूसरों के हित और सुख की कामना हमेशा करनी चाहिए’
रामनाथ ने चुनाव जीतने के बाद कहा कि मैं देश के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि सर्वे भवंतु सुखिन: की तरह मैं भी बिना भेदभाव के देश की सेवा में लगा रहूंगा। आप सभी को धन्यवाद।

5. ‘बिना इजाजत किसी का कोई सामान नहीं लेना चाहिए’
बचपन के किस्से- रामनाथ के बचपन के दोस्त रामकिशोर शुरू से ही अनुशासन पसंद व्यक्ति थे। एक वाकया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार जब हम सभी दोस्त स्कूल से लौट रहे थे, तभी एक लड़के ने दूसरे के खेत में लगे गन्ने को तोड़ लिया। बिना इजाजत के गन्ना तोड़ने पर कोविंद गुस्सा हो गए। उन्होंने खेत मालिक को बुलाया और गन्ना वापस देकर लड़के को शख्त हिदायत दी कि अगर उसे ऐसा करना है तो वह उनके साथ फिर कभी न आए। इसके बाद लड़के ने अपनी गलती को मानते हुए माफ़ी भी मांगी।

13 किलोमीटर चलकर पढ़ने जाते थे

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीवन के कुछ ऐसे पहलू भी हैं जिनको सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। ये पहलू एक सभी के लिए प्रेरणादायी भी हैं।

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रामनाथ के साथ कक्षा आठ तक पढ़ने वाले उनके बचपन के दोस्त जसवंत ने बताया कि घास-फूस की झोपड़ी में उनका पूरा परिवार रहता था। जब रामनाथ कोविंद 5 वर्ष के थे तभी उनकी मां का देहांत हो गया। मां के देहावसान के बाद उनका पालन पोषण उनके पिता ने किया। उनके सहपाठी बताते हैं कि रामनाथ कोविंद 13 साल की उम्र में 13 किलोमीटर चलकर पढ़ने जाते थे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पिता मैकूलाल वैद्य थे। गांव में ही उनकी कपड़े की दुकान भी थी।समय मिलने पर कभी-कभी कोविंद जी भी अपने पिता के साथ दवाखाने में बैठते थे। उनकी मेहनत और लगन ने ही आज उनको देश का राष्ट्रपति बनाया।  

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