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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति ने खोली भाजपा सरकार में ''अव्यवस्थाओं की पोल'', पढ़िए उनका ये लेख

[Edited By: Admin]

Tuesday, 15th October , 2019 12:25 pm

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और आंध्र प्रदेश सरकार के पूर्व संचार सलाहकार पराकला प्रभाकर ने एक अंग्रेजी अखबार में लेख लिखकर कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत खराब है और इसे सुधारने के लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए कोई रोडमैप नहीं पेश कर पाई है.

प्रभाकर हैदराबाद की एक निजी कंपनी राइट फोलियो के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं. उन्होंने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत खराब है. सरकार भले इससे इनकार करे, लेकिन जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उनसे यह पता चलता है कि एक-एक कर कई सेक्टर संकट के दौर का सामना कर रहे हैं.

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नरसिम्हा-मनमोहन सरकार से सबक लें

प्रभाकर ने भाजपा के नेहरू मॉडल की आलोचना पर लिखा, इस मॉडल के प्रति मोदी सरकार का आलोचनात्मक रुख तो जाहिर है, लेकिन इस पक्ष में उनकी वकालत भी कुछ हद तक पूंजीवादी और मुक्त बाजार ढांचे वाली करार दी जा सकती हैा, जो अभी तक व्यवहारिकता में नहीं आई है.

यह चिंताजनक है कि सरकार की आर्थिक विचारधारा और इसकी अभिव्यक्ति महज नेहरू मॉडल की आलोचना तक सीमित है, जो महज राजनीतिक हो सकता है. इसे कभी अर्थव्यवस्था की आलोचना के तौर पर नहीं देखा जा सकता. उन्होंने सुझाव दिया कि पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह सरकार की आर्थिक नीतियों सें सबक लें और इसी पर चलकर अर्थव्यवस्था को उबारा जा सकता है.

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कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे चुनाव

आंध्र प्रदेश के राजनीतिक परिवार में दो जनवरी, 1959 को जन्मे प्रभाकर की अर्थव्यवस्था, राजनीति और सामाजिक मामलों पर अच्छी पकड़ है. उनकी मां आंध्र प्रदेश विधानसभा की सदस्य थीं, जबकि पिता दो बार राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री रहे। 1994 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर नारासापुरम सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन एनटी रामाराव की आंधी में कांग्रेस को बुरी हार मिली.

इसके बाद भी वे कांग्रेस और भाजपा के टिकट पर चार बार विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन कभी जीत नहीं सके. भाजपा ने तो उन्हें आंध्र प्रदेश का पार्टी प्रवक्ता भी बनाया था. बाद में वे दक्षिण के अभिनेता चिरंजीवी की प्रजा राज्यम पार्टी के संस्थापक महासचिवों में शामिल हुए. यहां भी उन्हें राजनीति रास नहीं आई.फिलहाल वे एक निजी कंपनी राइट फोलियो के प्रबंध निदेशक हैं.

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सीतारमण का जवाब, सरकार ने उठाए कई कदम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक मोर्चे पर पति की आलोचना के जवाब में कहा कि मोदी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में कई कल्याणकारी और बड़े बदलाव वाले कदम उठाए हैं। इस दौरान जीएसटी के रूप में सबसे बड़ा कर सुधार लागू किया गया तो आधार के जरिये नागरिकों को विशिष्ट पहचान भी दी. इसके अलावा उज्ज्वला योजना के तहत आठ करोड़ से ज्यादा मुफ्त गैस कनेक्शन बांटकर समाज के निचले तबकों को बड़ी राहत पहुंचाई है.

दी हिन्दू में छपा परकला प्रभाकर का लेख.


प्रभाकर लिखते हैं, “गांधीवादी व समाजवाद के साथ बीजेपी (BJP) की छेड़खानी इसकी स्थापना के बाद कुछ महीनों से अधिक नहीं चली. आर्थिक नीति की बात करें तो पार्टी ने मुख्य रूप से 'नेति नेति (यह नहीं, यह नहीं) को अपनाया है, बिना यह बताए कि उसकी अपनी नीति क्या है,” प्रभाकर ने सुझाव दिया कि मोदी सरकार (Modi 2.0) के आर्थिक मोर्चे पर अपने प्रदर्शन के बजाय 'एक बाहुबल राजनीति, राष्ट्रवाद और सुरक्षा को चुनावी मुद्दा बनाया.

राव इकोनॉमी के लिए बीजेपी के पटेल हो सकते हैं

अपने इस कॉलम में प्रभाकर ने यह प्रस्ताव भी रखा कि बीजेपी (BJP) आर्थिक मोर्चे पर नरसिम्हा राव को रोल मॉडल के तौर पर ले सकती है, जैसा कि राजनीतिक मोर्चे पर बीजेपी ने सरदार पटेल के लिए किया है .

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