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''आम आदमी बन गया है खलनायक'', यहां आशुतोष राणा ने इंटरव्यू में बताई वजह

[Edited By: Admin]

Wednesday, 7th August , 2019 04:35 pm

दुश्मन (1998), संघर्ष (1999), राज (2002), हासिल (2003) और हाल ही में सोनचिड़िया (2019) जैसी फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी की वजह से दर्शकों का दिल जीत चुके बॉलीवुड एक्टर आशुतोष राणा कला की सभी फॉर्म में काम करना पसंद करते हैं। आशुतोष कोर्ट रूम ड्रामा फिल्म 'चिकन करी लॉ' में एक वकील की भूमिका में नजर आने वाले हैं। यह फिल्म 9 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। शेखर सिरिन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में आशुतोष राणा के साथ मकरंद देशपांडे वकील की भूमिका में एक दूजे को दलीलें देते नजर आएंगे। फिल्म में निवेदिता भट्टाचार्य, जाकिर हुसैन, अमन वर्मा और नतालिया जोंसज़ेक मुख्य किरदारों में हैं।

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आशुतोष ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि वह इनदिनों राम राज्य पर एक स्टोरी लिख रहे हैं। जिसमें बताया है कि राम वनवास गए तो 14 साल अयोध्या का क्या हुआ'। विकी कौशल स्टारर फिल्म ‘भूत’ में भी आशुतोष राणा भी नजर आएंगे। वे इस फिल्म के पहले पार्ट में एक प्रोफेसर के रोल में हाेंगे। वे बताते हैं, ‘मुझे खुशी है कि करण ने मुझे इस फिल्म के लिए चुना है। इन दिनों मुझे अच्छी फिल्में और अच्छे रोल मिले रहे हैं। ‘भूत’ में मैं एक ऐसे प्रोफेसर का रोल निभा रहा हूं जो पैरानॉर्मल एक्टिविटीज में एक्सपर्ट है। इस फिल्म के अलावा जल्द ही ‘चिकन करी’ में भी नजर आऊंगा। उसमें मेरा वकील का रोल है।’ आशुतोष, ऋतिक-टाइगर स्टारर ‘वॉर’ में भी विलन के रोल में नजर आएंगे। इसके अलावा एक वेब शो में वे मुगल शासक औरंगजेब के किरदार में भी दिखाई देंगे।

आजकल किरदारों में बहुत बदलाव हो गया है

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आशुतोष राणा ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि आजकल किरदारों में बहुत बदलाव हो गया है, कॉमनमैन विलन बन गया है। विलन की परिभाषा बदल गई है। जैसे 'संघर्ष' के लज्जाशंकर पांडे। जरूरी नहीं कि विलन में लस्ट हो। अमरत्व की तलाश के लिए प्रयासरत व्यक्ति जिसकी कामरूपी वासना में रुचि ही नहीं है। उसके लिए लड़की और लकड़ी एक जैसी है, लेकिन वो अमरत्व को पाना चाहता है ऐसा व्यक्ति भी विलन हो सकता है। इसके बाद हीरो का ट्रेंड भी बदल गया है, 'बेडमैन विथ गुड आर्ट'। फिल्म वास्तव या ओमकारा में जो किरदार आए वो हीरो ग्रे शेड के थे। मैं ईमानदारी से कहता हूं मैंने हीरो-विलन की दृष्टि से कभी भी कोई किरदार नहीं किया। मैं किरदार को देखता हूं। मेरा मानना है कि किरदार चित्त-पट्ट नहीं होता। वह खड़ा हुआ सिक्का है, चित्त भी और पट्ट भी है। यूं कहें कि टॉस के लिए जब घुमा कर सिक्का उछालते हैं तो हर किरदार वैसे ही घूमते हुए नीचे हाथ में आता है तब पता चलता है कि हैड आया या टेल। यह कहना है फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा का। शुक्रवार को मप्र नाट्य विद्यालय में अपने अनुभव साझा करते हुए बदलते समय के साथ अभिनेता, अभिनय और किरदारों पर चर्चा की। आशुतोष राणा के हिस्से में फिर एक किरदार आया कि बैडमैन, गुडमैन विथ बैड आर्ट। हीरो एक ट्रेंड वाला, जो फिल्म आवारापन में मिल गया। वह है तो हीरो, लेकिन वो है विलन। धीरे-धीरे निरंतर बदलाव हो रहा है। हम सौभाग्यशाली लोग हैं, जिन्हें अभिनय के क्षेत्र के टर्निंग प्वाइंट के किरदारों को निभाने का मौका मिला।

हम आज भी देहाती लोग हैं

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एक सवाल पर उन्होंने कहा कि हम मुंबई में रहते जरूर हैं, लेकिन आज भी देहाती लोग है। हमारा मानना है कि माता-पिता अपने बच्चों को खुद बड़ा करें तो जीवन में आनंद आता है। जिसे आप हेय काम मान रहे हैं, उसे मैं बड़ा महत्वपूर्ण काम मानता हूं। मैं या कोई भी अपने बच्चे को नौ माह गर्भ में नहीं रख सकता, उसके बाद न पालन-पोषण कर सकता हूं। मां को यह क्षमता मिली है। मेरी पत्नी फिल्मों में आना चाहे या न आना चाहे यह निर्णय किसका होगा, मेरा या रेणुका जी का। उन्होंने अपने जीवन में पर्याप्त काम किया है। उनका ही मानना था कि मुझे शादी के बाद काम नहीं के बराबर करना है। उन्होंने बीच में फिल्म 'रीटा' का निर्देशन किया। मराठी और वेब सीरिज भी की, जो वे कर रही है। मैंने अभिनेत्री से शादी की है, मैं उनके अभिनय का फैन हूं। मेरा यह सौभाग्य है कि उन्होंने मुझे अपना पति बनने का, बच्चों के पिता होने का अवसर दिया। मुझे उनकी कला ने ही आकर्षित किया था।

मोबाइल पर लिखता हूं कहानी

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मेरे पास कई सारे प्रोजेक्ट्स हैं। इसके अलावा वेब सीरिज भी कर रहा हूं। इसके अलावा रामराज्य पर किताब लिख रहा हूं, जो कि एक फिक्शन स्टोरी रहेगी। इसमें श्रीराम की जीवन यात्रा को फिक्शन के साथ लिखने का प्रयास कर रहा हूं। मोबाइल पर लिखता हूं, पन्नों में नहीं। जब और जहां समय मिलता है लिखना शुरू कर देता हूं, क्योंकि अलग से कोई समय निकाला नहीं जा सकता लेखन के लिए। एक प्ले कर रहा हूं पुरुष, वो टेली प्ले के तौर पर शूट हो रहा है। शूट भी मंच के लिए ही किया जाएगा, लेकिन टेलीकास्ट टीवी और वेब पर किया जाएगा। यदि अच्छी स्क्रिप्ट रही तो मैं रावण, श्रीकृष्ण और महाराज छत्रसाल का किरदार निभाना चाहूंगा।

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