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चीन में हो रहा मानवाधिकार उल्लघंन, तीन सौ से अधिक संगठनों ने UNO को लिखा पत्र

[Edited By: Rajendra]

Wednesday, 9th September , 2020 07:05 pm

ह्यूमन राइट्स वाच, एमनेस्टी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सर्विस फार ह्यूमन राइट्स समेत 300 से अधिक नागरिक संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र से चीन सरकार द्वारा किये जा रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर विचार करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय निगरानी निकाय स्थापित करने की अपील की है।

बुधवार को प्रकाशित एक खुले पत्र में इन संगठनों ने कहा है कि वे सेंसरशिप, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले विकास एवं अधिकारों के पक्ष में आवाज उठाने वालों को निशाना बनाने के जरिए हांगकांग, तिब्बत एवं झिनजियांग तथा अन्य स्थानों पर हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की व्यापक जांच और समुचित प्रतिक्रिया की मांग कर रहे हैं।

चीन के मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान देने के लिए 'स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय प्रणाली' गठित करने की यह मांग ऐसे समय उठी है जब उस पर हांगकांग में प्रदर्शन जैसे मुद्दों से निपटने के तौर तरीकों, उइगर मुसलमानों के लिए हिरासत केंद्र और पश्चिम झिनजियांग में अन्य मुद्दों लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव है। हालांकि चीन इन हिरासत केंद्रों को व्यावसायिक या प्रशिक्षण केंद्र बताता है।

चाइनीज ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स के निदेशक रेनी शिया ने कहा, '' चीन ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार अभियानों में सहयोग पहुंचाने से नाराज होकर ऐसा करने वालों पर सुनियोजित तरीके से अत्याचार किया। उनका उत्पीड़न किया गया, वे गायब कर दिये गये, जेल में डाल दिये गये और वकीलों के लाइसेंस छीन लिये गये। ''

उन्होंने कहा , ''संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को ऐसे बर्ताव को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। यह मांग ऐसे वक्त में उठी है जब संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञों ने चीन के मानवाधिकार रिकार्ड के मुद्दों पर विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।

सौ से अधिक ब्रिटिश सासंदों ने चीनी राजदूत को पत्र लिखकर कहा है कि चीन के सुदूर झिनजियांग क्षेत्र में 'उइग्यूर लोगों के खिलाफ सुनियोजित जातीय सफाया कार्यक्रम' चलाया जा रहा है जो निंदनीय है। विभिन्न दलों के 130 सांसदों के दस्तखत वाले इस पत्र में कहा गया है, '' जब दुनिया के सामने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के ऐसे ढेरों प्रमाण सामने आते हैं तो कोई अपनी आंखें नहीं फेर सकता है।'' उन्होंने कहा, '' ब्रिटेन में बतौर सांसद हम इस उत्पीड़न की पूर्ण निंदा करने और उस पर तत्काल रोक लगाने के लिए पत्र लिख रहे हैं।''

इस पत्र में झिनजियांग प्रांत में उइग्यूर मुसलमानों के जबरन जनसंख्या नियंत्रण एवं बड़े पैमाने पर उन्हें हिरासत में रखने की खबरों का उल्लेख है। उसमें उस वीडियो का भी जिक्र है जिसमें आंखों पर पट्टी बंधे एवं सिर मुंडवाए लोग बड़ी संख्या में ट्रेनों में बिठाये जाने का इंतजार करते हुए नजर आ रहे हैं। सांसदों ने कहा कि इस वीडियो से नाजी यातना केंद्रों की रौंगटे खड़े कर देने वाली यादें ताजा हो जाती हैं।

उन्होंने कहा कि यह वीडियो चीनी राजदूत लिऊ शियोमिंग को बीबीसी साक्षात्कार के दौरान दिखाया गया था। हालांकि चीनी अधिकारी झिनजियांग में नरसंहार, करीब दस लाख लोगों की जबरन नसबंदी और उन्हें हिरासत में लेने के आरोपों को चीन विरोधी ताकतों का झूठ बताकर बार बार खारिज करते रहे हैं। उनका कहना है कि चीन सरकार सभी के साथ समानता का व्यवहार करती है।

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