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‘गुलाबो सिताबो’ अपने कॉन्टेंट से पहले अपनी रिलीज़ को लेकर चर्चा में

[Edited By: Rajendra]

Saturday, 23rd May , 2020 03:24 pm

‘गुलाबो सिताबो’ अपने कॉन्टेंट से पहले अपनी रिलीज़ को लेकर चर्चा में थी. क्योंकि ये फिल्म इंडस्ट्री के सालों पुराने तौर-तरीकों को बदलने लगी थी. इस पर करते हैं बात. पहले फिल्म के ट्रेलर पर थोड़ी डिस्कशन हो जाए.

लखनऊ में फातिमा महल नाम की एक जर्जर हवेली है. 78 के साल के मिर्ज़ा उसके मालिक हैं. उन्होंने अपनी इस हवेली में बांके नाम के नौजवान को किराएदार रखा हुआ है. बहुत सालों से. बांके अब भगाए नहीं भाग रहा है. न ही किराया बढ़ा रहा है. जब मिर्ज़ा टोकते, तो पलटकर हड़का देता. बांके को खदेड़ने के लिए वो बाहरी मदद लेते हैं. लेकिन काम नहीं बनता. फाइनली अपनी हवेली, जिससे वो मोहब्बत करते हैं बेइंतेहा, उसे बेचने का प्लान बनाते हैं. लेकिन बीच में पुरातत्व विभाग के अधिकारी आ जाते हैं. बांके की मौज हो जाती है. बांके और मिर्ज़ा की इसी तू तू-मैं मैं की कहानी है ‘गुलाबो सिताबो’.

एक बूढ़े और नौजवान की तीखी, मज़ाकिया नोंक-झोंक अच्छी तो लगती है. बस कोई मर्यादा पुरुषोत्तम न बने. मिर्ज़ा का लुक और एक्सेंट दोनों मज़ेदार है. डायलॉग्स ऐसे कि ट्रेलर आने के घंटेभर के भीतर मीम बनने चालू हो चुके हैं. ऐसा लगता है फिल्म का सारा फन वाला पार्ट ट्रेलर में ही डाल दिया गया है, ताकि पिक्चर का सरप्राइज़ फैक्टर बचा रहे. लेकिन अच्छी बात ये है कि अगर पूरी पिक्चर ऐसी भी रहे, तो बड़े आराम से देखी जा सकती है. हालांकि फिल्म में क्या है और क्या नहीं, इस बारे में पुख्ते तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. लेकिन माहौल साफ तौर पर पता चल रहा है कि जो भी रहेगा वो ट्रेलर वाले फ्लेवर में ही रहेगा.

कभी लखनऊ गए हैं आप? या फिर किसी टिपिकल लखनऊ वाले भैया से आपका पंगा हुआ हो कभी? अगर जवाब हां है तो फिर तो पता ही होगा। नहीं है तो हम बताए देते हैं। लखनऊ में हर काम तसल्लीबख्श होता है और काम अगर बेइज्जती करने का हो तो फिर तो बहुत ही नफासत के साथ किया जाता है। आपको पता भी नहीं चलता कि सामने वाला आपकी आरती उतार रहा है या वाकई आपकी आरती उतार दी गई।

शूजीत सरकार की निर्देशन बगिया में ये कहानी जूही चतुर्वेदी ने खिलाई है। इससे पहले की पांच फिल्में जो जूही ने लिखी हैं, उनमें से स्काई इज पिंक को छोड़ बाकी चारों के निर्देशक शूजीत ही रहे। दोनों का दोस्ताना विकी डोनर से शुरू होकर गुलाबो सिताबो तक पहुंचा है। गुलाबो सिताबो के खेल में पूरा फोकस दो गज की दूरी में रहता है। सो ट्रेलर भी वैसा ही है, एक पुरानी हवेली में रहने वाले किराएदारों और हवेली के मालिक मिर्जा में होती नोंकझोंक ही कहानी का असल रस है।

‘गुलाबो सिताबो’ को डायरेक्ट किया है शूजीत सरकार ने. शूजीत की आखिरी फिल्म थी ‘अक्टूबर’. ‘गुलाबो सिताबो’ से पहले अमिताभ बच्चन ‘पीकू’, ‘शूबाइट’ और पिंक जैसी फिल्मों में शूजीत के साथ काम कर चुके हैं. रही बात आयुष्मान की, तो उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शूजीत की ही फिल्म ‘विकी डोनर’ से की थी. इस फिल्म को लिखा है जूही चतुर्वेदी ने. जूही इससे पहले शूजीत के लिए ‘विकी डोनर’, ‘पिकू’ और ‘अक्टूबर’ जैसी फिल्में लिख चुकी हैं.

लॉकडाउन की वजह से सिनेमाघर बंद हैं, इसलिए जो फिल्म बनकर तैयार थीं, उन्हें ऑनलाइन रिलीज़ करने की बात चल निकली. ओटीटी प्लैटफॉर्म पर रिलीज़ की जाने वाली बड़ी फिल्मों में पहला नाम था अक्षय कुमार ‘लक्ष्मी बम’ का. लेकिन वो फिल्म बनकर तैयार नहीं थी. अभी ये सब चल ही रहा था कि ‘गुलाबो सिताबो’ के मेकर्स ने घोषणा कर दी कि वो अपनी फिल्म थिएटर्स की बजाय सीधे ऑनलाइन यानी ओटीटी प्लैटफॉर्म पर रिलीज़ करेंगे. ये फिल्म एमेज़ॉन प्राइम वीडियो पर 12 जून को रिलीज़ हो रही है.

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