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प्रवासी मजदूरों पर विपक्ष के सवालों पर सरकार का एक ही जवाब

[Edited By: Rajendra]

Tuesday, 15th September , 2020 01:06 pm

संसद के मानसून सत्र में सोमवार को विपक्ष ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि घरों में लौटते समय कई मजदूरों की मौत हो गई और क्या राज्य सरकार के मृतकों के आंकड़े मौजूद हैं? जवाब में, केंद्र ने कहा कि मृतकों की संख्या पर कोई डेटा मौजूद नहीं है। इस तथ्य पर, मंगलवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर शर्मनाक तरीके से कटाक्ष किया।

राहुल ने ट्वीट किया है कि "मोदी सरकार यह नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूरों की मौत हुई और कितने रोजगार खो गए। क्या आपकी गिनती नहीं थी कि आप नहीं मरते थे? हां, लेकिन सरकार दुखी है, उन्होंने अपनी मौत देखी है। एक मोदी सरकार जिसे रिपोर्ट नहीं किया गया है। 'आपको बता दें कि जब कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत के बाद देश में लॉकडाउन हुआ था, तब प्रवासी श्रमिकों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। प्रवासी मजदूरों की संख्या सड़कों पर थी, इस दौरान कई मौतों की खबरें भी सामने आईं।

कोरोना संकट के बीच सोमवार से संसद का मानसून सत्र शुरू हो गया है, जिसमें सत्र के पहले दिन केंद्र सरकार को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष ने मोदी सरकार के साथ लॉकडाउन और कोरोना वायरस को लेकर कई सवाल उठाए। इन सवालों में से, लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों की मौत के बारे में केंद्र से एक सवाल पूछा गया था, जिसके जवाब में केंद्र ने कहा कि उनके पास इससे संबंधित कोई डेटा नहीं है।

संसद के मानसून सत्र के शुरु होने के बाद केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने सदन में एक सवाल के जवाब में बताया है कि उन्हें नहीं पता कि लॉकडाउन के बाद कितने लोग वापस अपने गृह राज्य आए हैं और कितनों की जान चली गई है। बता दें विपक्ष ने सरकार से सवाल पूछा था कि वह बताएं कि लॉकडाउन के बाद कितने मजदूरों के परिवार को मुआवजा दिया गया है।

सरकार की तरह से इस सवाल का जवाब देते हुए बताया गया कि उनके पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है। जिसके बाद पूरे सदन में हलचल मच गई और विपक्ष ने जमकर सरकार की आलोचना की। सरकार की तरफ से बताया गया था कि उनके पास इसका आंकड़ा है कि लगभग 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने अपने गृह राज्यों की तरफ लौटने की कोशिश की थी मगर उनमें कितने पहुंच पाए इसका कोई आंकड़ा नहीं है।

श्रम मंत्रालय के इस बयान पर कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह भड़क गए और उन्होंने कहा कि कभी-कभी लगता है कि हम सब अंधे हैं या फिर सरकार को लगता है कि वह इन सबका फायदा उठा सकती है। वह कहते हैं कि श्रम मंत्रालय कह रहा है उनके पास कोई आंकड़ा नहीं है। ऐसा कैसे हो सकता है।

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