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दिलीप कुमार की ड्रेस पहनकर दिया ऑडिशन और बन गये हिन्दी फिल्मजगत के एक महान अभिनेता

[Edited By: Vijay]

Friday, 27th November , 2020 01:43 pm

बंटवारे के बाद पाकिस्तान के झेलम से हिन्दुस्तान के पंजाब के हिसार मे आकर रुके बलराज, यहां पर अपना कामकाज शुरु किया पर चूंकि पढ़ाई पूरी करनी थी तो बलराज मुंबई पहुंचे..मुंबई के हिन्द कालेज मे उन लोगो को एडमिशन मिलता था जो कि बंटवारे के बाद यहां हिन्दुस्तान आये, जो शरणार्थी थे, तो बलराज को यहां एडमिशन मिल गया..अब एडमिशन तो मिल गया पर रहने के साथ खाने-पीने का भी जुगाड़ करना था वो कहां से हो, तो इन्हे मुंबई की बेस्ट बसों मे नौकरी मिल गयी,इनका काम ये था कि जो भी बसे बस स्टैण्ड पर आये तो इन्हे चेक करना कि बसे ठीक है कही कोई गड़बड़ी तो नही, और इस काम के लिये उन्हे 100 रुपये महीने की पगार पर रख लिया गया..

ये वही काम करने लगे सुबह 7 से 10 कालेज और फिर 2 बजे से रात 11 बजे तक की ड्यूटी करते थे, कालेज मे एक ड्रामाटिक सोसायटी हुआ करती थी उसमे बलराज ने हिस्सा ले लिया और छोटे-मोटे प्लेज मे हिस्सा लेने लगे ..और जिन्दगी यूं ही कट रही थी कि एक दिन जब ये स्टेज पर थे तो आडियंस मे एक साहेब बैठे थे जिनकी एड एजेन्सी थी और वो रेडियो सीलोन के लिये काम करते थे..उनको बलराज की आवाज बहुत पसंद आयी तो उन्होने कहा नौजवान मुझे तुम्हारी आवाज बहुत पसंद आयी तुम हो भी बेहद हैण्डसम, हम चाहते है कि तुम हमारे लिये काम करो ..और स्टार्स का इंटरव्यू लो ...बलराज तुरंत मान गये उन्होने कहा ठीक है जब भी मुझे किसी बड़े स्टार का एप्वाईंटमेन्ट मिलेगा तो मै इंटरव्यू ले लूंगा..और बलराज को जो पहला इंटरव्यू करने को मिला वो था उस जमाने की मशहूर अदाकारा निम्मी जी का था

  

इस काम के लिये उन्हे 25 रुपये मिले अब वो 25- 25 रुपये मे स्टार्स का इंटरव्यू करने लगे..एजूकेशन इनकी चल ही रही थी क्योक मां से वादा करके आये थे कि मै ग्रेजुएट तो बनकर ही रहूंगा.. खैर जिंदगी यूं ही चल रही थी कि एक दिन इन्हे मौका मिला दिलीप साहेब का इंटरव्यू करने का, जो कि सेन्ट्रल स्टूडियो मे था..वही पर इंटरव्यू था और दिलीप साहेब कि एक फिल्म शिकस्त की शूंटिग चल रही थी जिसको डायरेक्ट कर रहे थे मशहूर निर्देशक रमेश सहगल साहेब..ये वहां पहुंचे तो रमेश सहगल साहेब ने इन्हे देखा और पूछा कि क्या करते हो तो ये बोले सर मै तो यहां यूसूफ साहेब का इंटरव्यू करने आया हूं तो रमेश जी बोले यार तुम तो खुद मासाल्लाह बेहद ही हैण्डसम हो तुम खुद स्टार बनो तुम्हारा इंटरव्यू कोई ले..तो बलराज जी बोले साहेब अगर कोई हीरो का रोल दे तो मै जरुर करूंगा ..तो रमेश जी बोले इसमे क्या बड़ी बात है हम दे देते है हीरो का रोल..उन्होने अपने लोगो को बुलाया और कहां कि इनका स्क्रीन टेस्ट होगा, अब सवाल ये था कि इनके पास कपड़े तो थे नही ये कुर्ता पायजमा पहने हुये थे तो रमेश सहगल साहेब बोले एक काम करो कुछ कास्ट्यूम है क्या अपने पास तो उनके असिस्टेन्ट ने बताया कि सर हां दिलीप साहेब के है तो बलराज को दिलीप साहेब के कपड़े दिये गये और कुछ डायलाग्स लिखकर दिये गये और कहा गया कि ये दरवाजा है इससे बाहर आपको निकलना है और ये बोलना है...दिलीप साहेब से ये कुछ लंबे चौडे थे तो कैसे न कैसे वो कपड़े पहने और डायलॉग्स जल्दी जल्दी याद किये और एक्शन बोला गया और ये दरवाजे से बाहर निकले ..दरवाजे के बाहर इतनी ज्यादा लाईट्स थी कि इनकी आखें चुंधिया गई खैर कैसे ने कैसे इन्होने डायलॉग्स बोले और मेकअप रुम जाकर..कपड़े उतारे और बिना किसी को बताये ये वहां से निकल आये इन्होने सोचा कि इतना गन्दा स्क्रीनटेस्ट हुआ है कि जाने की जरुरत ही क्या है सब हसेंगे और वो वहां से निकल आये..

       

करीब दो-तीन महीने बाद ये अपने जयहिन्द कालेज की कैन्टीन मे बैठे हुये थे तो देखा कि चन्द्र सहगल साहेब जो कि रमेश सहगल के असिस्टेंट थे आते हुये दिखायी दिये इन्होने उन्हे देखा तो पास गये और पूछा कि आप यहां तो वो बोले अरे तुम कहा हो ..तुम्हे ढूंढते ढूंढते यहां आया हूं  वहां रमेश सहगल जी आपका इंतजार कर रहे है आप बिना बताये क्यो चले आये उस दिन तो ये बोले अरे साहेब जैसा मेरा स्क्रीनटेस्ट हुआ था मुझे लगा कि सब मुझ पर हसेंगे..तो चन्द्र सहगल बोले नही भाई सभी को आप बहुत अच्छे लगे..चलिये आपको रमेश जी आपको हीरो लेना चाहते है तो..वहां से शुरुआत हुयी बलराज की ..बलराज दत्त जिन्हे हम आज सुनील द्त्त के नाम से जानते है....

   

सुनील दत्त ने अपनी जिन्दगी मे एक से एक बेहतरीन फिल्मे दी ..नर्गिस दत्त के साथ उन्होने शादी की और संजय दत्त जैसा जाना-माना कलाकार हिन्दी फिल्म जगत को दिया...

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