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चार असलहा दुकानदारों ने 26 फर्जी लाइसेंसों पर की थी असलहों की बिक्री

[Edited By: Aviral Gupta]

Monday, 26th October , 2020 03:35 pm

 

कानपुर। शहर के चार असलहा दुकानदारों ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस पर 26 असलहों की बिक्री की थी, जिन्हें बाहर ले जाने के लिए ट्रैवलिंग लाइसेंस का इस्तेमाल किया गया था। ट्रेवलिंग लाइसेंस बनाने के मामले में एसीएम अमित सिंह राठौर की जांच में दोषी पाए गए कलेक्ट्रेट के मुख्य राजस्व लेखाकार महेश सिंह चौहान को नोटिस दी जा रही है। अब उन्हें अपना पक्ष रखने का एक और मौका दिया जाएगा, जिसमें यदि वे संतोषजनक उत्तर नहीं देते हैं तो विभागीय कार्रवाई हो सकती है।

एंटी टेररिस्ट स्क्वाड ने फर्जी तरीके से बनाए गए लाइसेंस पर असलहा खरीदे जाने के मामले का भंडाफोड़ किया था। एटीएस की जांच में सामने आया था कि संगठित तरीके से गिरोह ने फर्जी असलहा लाइसेंस बनवाए और फिर शस्त्र अनुभाग में तैनात लिपिकों से मिलकर ट्रैवलिंग लाइसेंस बनवाकर असलहों काे गंतव्य तक भेजा। जांच में पाया गया था कि 2014-2016 के बीच गिरोह ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाए और फिर मेस्टन रोड स्थित दुकानों से असलहे खरीदे। इसी मामले में एके नियोगी एंड कंपनी के मालिक अमरजीत नियोगी, पूर्वांचल गन हाउस के मालिक जैनुल आबदीन, खन्ना आर्मरी के मालिक विजय खन्ना, जय जवान आ‌म्र्स डीलर के मालिक राजीव शुक्ल आदि पर मुकदमा दर्ज कराकर एटीएस ने 25 जुलाई 2017 को कारोबारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

फर्जी लाइसेंस पर खरीदे गए असलहों को ले जाने के लिए ट्रैवलिंग लाइसेंस बनवाने से पहले जांच जिला शस्त्र अनुभाग से कराई जानी चाहिए थी, जहां से डीएम द्वारा लाइसेंस स्वीकृत दर्शाया गया था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आरोप है कि जालसाजों ने शस्त्र अनुभाग में तैनात तत्कालीन मुख्य राजस्व लेखाकार महेश सिंह चौहान से मिलकर ट्रैवलिंग लाइसेंस बनवाया और उससे वह असलहा ले जाने में सफल हुए। ये सभी असलहे बिहार ले जाए गए थे, माना जा रहा है कि असलहे नक्सलियाें को दिए गए। इस मामले में महेश सिंह पर भी मुकदमा हुआ था। फरार महेश ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था और शासन ने निलंबित भी कर दिया था। कार्रवाई से पहले उनसे जांच रिपोर्ट के आधार पर जवाब मांगा जाएगा।

 

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