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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कोरोनावायरस संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच स्वास्थ्य पेशेवरों के साथ बातचीत की

[Edited By: Rajendra]

Wednesday, 27th May , 2020 11:48 am

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कोरोनावायरस संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच स्वास्थ्य पेशेवरों के साथ बातचीत की. राहुल गांधी वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल आशीष झा और प्रसिद्ध स्वीडिश एपिडेमियोलॉजिस्ट जोहान गिसेके के साथ बातचीत की.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कोरोना संकट पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से चर्चा करते हुए देश में हो रही कम टेस्टिंग का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में कुछ नौकरशाहों से बात की है और उनका कहना है कि ज्यादा टेस्टिंग और रिजल्ट से लोग में भय फैलेगा।

राहुल गांधी ने पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट प्रो. आशीष झा के साथ बातचीत में कहा, 'मैंने कुछ नौकरशाहों से कोरोना की कम टेस्टिंग के बारे में पूछा है। उनका कहना है कि ज्यादा टेस्टिंग से लोग डरेंगे। इससे ज्यादा डरावना संदेश जाएगा। अनाधिकारिक रूप से वे यही कह रहे हैं।' राहुल गांधी ने साथ ही वैक्सीन की चर्चा भी की और पूछा कि ये कब तक बन कर तैयार हो सकेगा। इस पर प्रोफेसर झा ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि अगले साल तक ये तैयार हो सकेगा।

लगातार बढ़ रहे कोरोना के कहर के बीच हार्वर्ड में स्वास्थ्य विशेषज्ञ आशीष झा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से कहा कि कोविड-19 '12 से 18 महीने की समस्या' है, इससे 2021 से पहले छुटकारा नहीं मिलने वाला।

झा ने कहा कि लॉकडाउन के बाद अब जब अर्थव्यवस्था खुल गई है, आपको भरोसा पैदा करना होगा। उन्होंने कहा कि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में बहुत तेजी से जांच करने की रणनीति की आवश्यकता है।

राहुल गांधी ने प्रोफेसर आशीष झा से पूछा कि लॉकडाउन को लेकर आपका क्या विचार है? इससे मनोविज्ञान पर क्या असर पड़ता है और ये कितना मुश्किल है.

जवाब में प्रोफेसर झा ने कहा कि लॉकडाउन से आप वायरस के फैलने की स्पीड को कम कर सकते हैं. अगर वायरस को रोकना है तो पीड़िता को समाज से अलग करना जरूरी है, उसकी टेस्टिंग करना जरूरी है. लॉकडाउन आपको अपनी क्षमता बढ़ाने का वक्त देता है.

राहुल गांधी ने ये भी पूछा कि लॉकडाउन की वजह से मजदूरों पर काफी असर पड़ रहा है, क्योंकि मजदूरों को पता नहीं है कि ये कब ठीक होगा और कब काम मिलेगा. इसके जवाब मे झा ने कहा कि वायरस 2021 तक रहने वाला है. रोजाना कमाने वालों की मदद करने की जरूरत है, ताकि उन्हें अपने कल के बारे में अच्छा विजन मिले. लॉकडाउन के नुकसान के बारे में किसी को कुछ नहीं पता.

टेस्टिंग की रणनीति पर भी राहुल ने सवाल किया. झा ने कहा कि साउथ कोरिया जैसे देशों में टेस्टिंग की जो रणनीति अपनाई गई है वो बेहतर है, ज्यादा टेस्ट करना जरूरी है. आपको ऐसे इलाके भी पहचानने होंगे जहां केस ज्यादा हैं. जो व्यक्ति अस्पताल आए उसका टेस्ट होना बहुत जरूरी है, चाहें उसके आने का कारण कुछ भी क्यों न हो. झा ने ये भी कहा कि जिन्हें कोई बीमारी नहीं है वो ये नहीं सोच सकते उन्हें कोरोना नहीं होगा. BCG वैक्सीन पर प्रोफेसर झा ने कहा कि ये खतरनाक हो सकती है, इस पर अभी रिसर्च के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. उन्होंने ये भी कहा कि अगर लोग बाहर ज्यादा रहते हैं तो कोरोना ज्यादा तेजी से फैलेगा.

राहुल के सवाल पर प्रोफेसर झा ने कहा कि कोरोना को आप एक जगह नहीं रोक सकते, इसलिए केंद्र के साथ ही राज्यों को शक्ति देना बहुत जरूरी है, जिससे इसके खिलाफ लड़ा जा सके.

इस चर्चा से पहले कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में कहा, "चर्चा की इस कड़ी में कोविड-19 वायरस की प्रकृति, इसके परीक्षण की रणनीति और महामारी के बाद की दुनिया की कल्पना सहित वायरस व अन्य कई विषयों को शामिल किया गया है".

राहुल गांधी से बातचीत में प्रोफेसर जोहान ने कहा कि किसी भी देश के पास लॉकडाउन से निकलने की रणनीति नहीं है. इसके लिए हर स्टेप को ध्यान में रखना जरूरी है, पहले ढील दी जाए और अगर मामला बिगड़े तो रणनीति में बदलाव किया जा सकता है.

प्रोफेसर जोहान ने ये भी कहा कि भारत जैसे देश में लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट लग सकती है. जोहान ने कहा कि लॉकडाउन में ज्यादातर बुजुर्गों का ख्याल रखने के ज्यादा जरूरत है, युवाओं को बाहर आने दीजिए उनमें कोरोना जल्दी ठीक हो जाता है.

कोविड-19 संकट से निपटने के लिए अर्थशास्त्र, सामाजिक विज्ञान, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों के विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञों के साथ कांग्रेस नेता राहुल द्वारा किए गए संवादों की श्रृंखला में यह तीसरी बातचीत है. इससे पहले राहुल गांधी ने हाल ही में विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री रघुराम राजन और नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी के साथ बात की थी

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