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फिल्म 'होटल मुंबई' में सुनाई देगी आतंकी हमले के दौरान हुई असली बातचीत की आवाजें, ऑडियो टेप का किया गया इस्तेमाल

[Edited By: Gaurav]

Tuesday, 26th November , 2019 01:32 pm

मुंबई 26/11 हमले पर आधारित फिल्म 'होटल मुंबई' 29 नवंबर को भारत में रिलीज हो रही है. इस फिल्म को इंग्लिश, हिंदी, तमिल और तेलुगू में रिलीज किया जाएगा. फिल्म  के फिल्म निर्माता एंथनी मारस का कहना है इस फिल्म में 26/11 के आतंकी हमले में हुई असली बातचीत के टेप का यूज किया गया है.

तकरीबन 6 साल पहले राम गोपाल वर्मा की '26/11' के दिल दहला देनेवाले आतंकवादी हमले पर आधारित 'द अटैक्स ऑफ 26/11' को दर्शकों और क्रिटिक्स का प्यार नहीं मिल पाया था. इसी विषय पर सर्वाइविंग मुंबई जैसी डॉक्यूमेंट्री भी बनी. अब एंथनी मारस इसी आतंकी घटना पर 'होटल मुंबई' लेकर आए हैं. 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले को निर्देशक एंथोनी मारस ने संवेदनशील होने के साथ-साथ थ्रिलर अंदाज में दर्शाया है. दृश्य दर दृश्य आप उन खौफनाक यादों में चले जाते हैं. आप सिहर जाते हैं और कई जगहों पर आपकी आंखें नम हो जाती हैं.

फिल्म की कहानी

होटल ताज में डेविड डंकन (आर्मी हेमर) और जारा ( नाजनीन बोनिडी), रशियन बिजनसमैन (जेसन आईसेक) जैसे वीआईपी गेस्ट की रिहाइश और खान-पान का इंतजाम हो रहा है. हेड शेफ हेमंत ओबेरॉय (अनुपम खेर) जब अपनी टीम सहित वेटर अर्जुन (देव पटेल) को मेहमानों की मेहमाननवाजी के लिए इंस्ट्रक्शन दे रहे होते हैं, तब उन्हें इस बात का रत्ती भर भी इल्म नहीं होता कि सीएसटी स्टेशन और लियोपोल्ड कैफे पर कसाब और उसके साथी आतंकी हमला कर कई लोगों की जान ले चुके हैं.  जब तक आतंकी युवाओं का समूह नरसंहार करते हुए होटल ताज में घुसपैठ करता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. इस दुर्दांत हमले में अर्जुन और हेमंत ओबेरॉय अपने स्टाफ के साथ मिलकर कैसे होटल में रुके मेहमानों की जान बचाते हैं, इसे आप फिल्म में देखें तो बेहतर होगा.

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Review: 

निर्देशक एंथनी मारस ने उस भयावह घटना को एक रात में समेटा है. होटल ताज के अंदर का नजारा उन्होंने इस ढंग से पेश किया है कि आपकी सांसे थम-सी जाती हैं. इस सत्य घटना को वह थ्रिलिंग अंदाज में पेश करने में कामयाब रहे हैं. फिल्म में नन्हें बच्चे के ट्रैक के जरिए वे संवेदनशीलता को बनाए रखते हैं. आतंकवादियों को बिना ग्लोरिफाइ किए बगैर वह यह जताने में सफल रहे हैं कि आम लोगों को गोलियों से भूननेवाले इन टैरेरिस्ट को कैसे पैसों या जेहाद के नाम पर ब्रेनवाश करके खूनी खेल में शामिल किया जाता है. निर्देशक के रूप में चतुराई का परिचय देते हुए उन्होंने कहानी को पुलिस या बाहरी दुनिया पर ज्यादा फोकस नहीं किया है. हालांकि दिल्ली से स्पेशल फोर्स के इंतजार में बैठे मुंबई पुलिस की लाचारी और बहादुरी को उन्होंने बखूबी दर्शाया है. उन्होंने अपनी फिल्म में उस आतंकी हमले के रियल फुटेज को भी पिरोया है. निक रेमी मैथ्यूज की सिनेमटॉग्रफी की दाद देनी होगी. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी को मजबूत बनाता है.

हेमंत ओबेरॉय के रोल में अनुपम खेर ने बेहतरीन काम किया है. अपने किरदार के मुताबिक उन्होंने संयम और सहनशीलता बनाए रखी है. मेहमानों की जान बचाने के लिए अपने जान की बाजी लगानेवाले किरदार अर्जुन को देव पटेल ने बहुत ही खूबसूरती से अंजाम दिया है. सिख वेटर के रूप में अपनी पगड़ी को सम्मान और साहस की नजर से देखने वाले अर्जुन को जब आतंकवादियों की गोली का शिकार बनी विदेशी टूरिस्ट को बचाने के लिए पगड़ी निकालकर उसके जख्म पर पट्टी करनेवाला दृश्य बहुत ही कमाल का बन पड़ा है. जेसन आईसेक, आर्मी हेमर, नाजनीन बोनिडी, विपिन शर्मा, नताशाजै से सभी कलाकारों ने अपनी भूमिका को इस ट्रॉमा और पेनिक अंदाज में जिया है कि आप उनसे जुड़ते चले जाते हैं.

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