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कोरोना से जंग: एक योद्धा की तरह करें अपने परिवार और देश की सुरक्षा, जानिए वायरस से लड़ने के लिए कितनी तैयार है सरकार

[Edited By: Gaurav]

Monday, 23rd March , 2020 10:46 pm

भारत में जिस तेजी से कोरोना के मरीज बढ़ते जा रहे हैं उससे ये साफ जाहिर हो चुका है कि अगर जल्द ही इसपर लगाम न लगाई गई तो स्थितियां भयावह हो जाएंगी। पूरे विश्व में चीन में उपजा वायरस तेजी से पांव पसार रहा है और लोगों की जान लेता जा रहा है। भारत में अबतक कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या लगभग 500 तक पहुंच चुकी है। वहीं इनमें से 44 मरीजों का इलाज हो चुका है। इसके अलावा भारत में कोरोना वायरस के कारण 10 लोगों की मौत भी हो चुकी है। वहीं 442 लोगों का इलाज जारी है।
भारत में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र और केरल में देखने को मिले हैं। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के अब तक 97 पॉजिटिव केस सामने आ चुके है. इसके अलावा केरल में 95 लोग कोरोना से संक्रमित हैं। वहीं कोरोना वायरस के कारण आज दो लोगों की मौत हुई। जिससे कोरोना वायरस के कारण देश में मरने वालों की सख्या 10 तक पहुंच चुकी है।

सोमवार को कोरोना वायरस से देश में एक और मौत हो गई है। 55 साल के एक शख्स की पश्चिम बंगाल में मौत हुई है। मरीज को पिछले हफ्ते अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वह इटली से लौटा था। इसके अलावा आज हिमाचल प्रदेश में पहली मौत हुई। अमेरिका से लौटे तिब्बत के एक नागरिक की मौत कोरोना वायरस से हुई है। मृतक की उम्र 69 वर्ष थी।

भारत में कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देश में कई राज्यों के जिलों में लॉकडाउन का ऐलान किया गया है। लॉकडाउन के तहत आवश्यक सामानों की आपूर्ति जारी रहेगी। वहीं कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए ट्रेन और फ्लाइट्स सेवाएं सस्पेंड कर दी गई है।

कोरोना वायरस की प्रसार को रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां लगभग बंद हैं। ऐसे में मंदी से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत और बिगड़ने का अंदेशा है। साथ ही कोरोना वायरस से लड़ने को लेकर भारत सरकार की आर्थिक रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

पीएम नरेंद्र मोदी ने 19 मार्च को कोरोना वायरस को लेकर इकॉनमिक रिस्पॉन्स टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में राहत पैकेज पर फैसला किया जाएगा। लेकिन वित्त मंत्री ने अभी तक टास्क फोर्स के सदस्यों के नाम नहीं बताए हैं। 

दुनियाभर में करीब सात ट्रिलियन डॉलर यानी भारत की जीडीपी की लगभग ढाई गुनी रकम कोरोना से लड़ने के लिए जारी की गई है। भारत की जीडीपी अभी 2.94 ट्रिलियन डॉलर की है। दुनिया के कई देशों ने तो अपनी जीडीपी की एक प्रतिशत रकम कोरोना का सामना करने के लिए खर्च करने का फैसला किया है।  

दुनिया के देशों की ओर से कोरोना से लड़ने को जारी रकम-

अमेरिका- 1600 अरब डॉलर
जर्मनी- 610 अरब डॉलर
ब्रिटेन- 442 अरब डॉलर
फ्रांस- 335 अरब डॉलर
स्पेन- 220 अरब डॉलर
ऑस्ट्रेलिया- 189 अरब डॉलर
स्वीडन- 77.3 अरब डॉलर
कनाडा- 57.26 अरब डॉलर

भारत में अभी एक डॉलर की कीमत  75.90 रुपये है. अगर हम एक डॉलर के लिए 74 रुपये का मानक तय करें तो अमेरिका ने लगभग 12 लाख करोड़ रुपए कोरोना से लड़ने के लिए दिए हैं.

अभी केवल 3800 करोड़ रुपये
Business Today के एडिटर राजीव दुबे के अनुसार, भारत के पास इमरजेंसी या आपदा राहत के लिए काफी कम रकम है. प्रधानमंत्री राहत कोष में 3800 करोड़ रुपये हैं. यह रकम ऊंट के मुंह में जीरे जैसी है. सरकार राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) या राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) से पैसे ले सकती थी. SDRF में 20,000 करोड़ और NDRF में 25,000 करोड़ रुपये का प्रावधान होता है. लेकिन पिछले कुछ वक्त में आई आपदाओं के चलते इनके फंड भी खर्च हो गए. उदाहरण के तौर पर 2013 में उत्तराखंड में आई बाढ़ के बाद जो निर्माण कार्य हुआ उसका खर्च अभी भी राहत कोष से दिया जा रहा है. साथ ही NDRF के तहत महामारी नहीं आती है. यह प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़, भूंकप, अकाल, सूनामी, चक्रवात को ही कवर करता है.

हालात बिगड़े तो…
राजीव दुबे के अनुसार, कोरोना वायरस का सामना करने के लिए बड़ी रकम की जरूरत होगी. देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने पर अस्पतालों, मास्क, बिस्तरों, मेडिकल सामान, ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग बढ़ेगी. इसके अलावा समाज के निचले तबके को रोजमर्रा की जरूरतों का सामान मुहैया कराने के लिए भी पैसा चाहिए होगा. भारत सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए आपदा प्रबंधन में केवल 482 करोड़ रुपये दिए हैं. ऐसे में सरकार के पास अभी पीएम आपदा कोष और आपदा प्रबंधन का मिलाकर 563 मिलियन डॉलर यानी करीब 4300 करोड़ रुपये हैं. इस रकम से तो एक राज्य में भी कोरोना वायरस का सामना करना आसान नहीं होगा.
सवाल यह भी है कि सरकार पैसा लाएं कहां से? सरकार का खज़ाना खाली है. कोरोना वायरस के हालात को देखते हुए सरकार के पास मामूली इमरजेंसी फंड हैं. आरबीआई को पहले ही निचोड़ लिया गया है. जिन सरकारी कंपनियों के पास पैसा था उन पर कर्ज़ा हो चुका है. एनपीए यानी डूबे हुए लोन की मार झेल रहे सरकारी बैंक अब इस हालत में नहीं है कि एक और झटका सहन कर सकें. साथ ही अर्थव्यवस्था गहरी मंदी से जूझ रही है.

सरकार कहां से दे सकती है पैसा

– इस साल के बजट में केंद्र सरकार ने निर्माण के लिए तीन लाख करोड़ रुपये आवंटित किये हैं. सरकार निर्माण कार्यों पर रोक लगाते हुए यहां से पैसे ले सकती है.
– सरकार ने डिफेंस के लिए बजट में 4.30 लाख करोड़ रुपये दिए हैं. यहां से भी कुछ पैसे निकालने का विकल्प होगा.
– खेती के लिए सरकार ने 1.39 लाख करोड़ और उपभोक्ता मामलों के लिए 1.95 लाख करोड़ रुपये दिए हैं. यहां से पैसे लेना सरकार को नया सिरदर्द दे सकता है. ये दोनों क्षेत्र पहले ही मुश्किल से गूजर रहे हैं.
– सरकार के पास दो लाख करोड़ रुपये उधार लेने का भी ऑप्शन है. लेकिन इससे देश में महंगाई बढ़ने, कर्ज़ में इज़ाफा होने और आने वाले समय में टैक्स बढ़ने का खतरा होगा.
– सरकार कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जनता पर सैस का भार डाल सकती है. 2010-11 में भी ऐसा किया गया था. उस समय नेशनल कलैमिटी कंटींजेंसी ड्यूटी लगाई गई थी. इससे ही NDRF में पैसा आता है.

कोरोना के लिए GOM

भारत सरकार ने कोरोना वायरस के ख़तरे को भांपते हुए सबसे पहले स्थिति का जायज़ा लेने के लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) बनाया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन की अध्यक्षता में गठित इस ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स में शामिल हैं - केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी , केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर, जहाजरानी मंत्री मनसुख मंडवाडिया, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, और स्वास्थ्य विभाग के राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे। 

जीओएम की पहली बैठक 3 फरवरी को पहली बार हुई थी। इस बैठक में सभी संबंधित मंत्रालयों के सचिव भी शामिल हुए।  इस बैठक में केरल में पाए गए कोरोना वायरस के सबसे पहले मामले पर चर्चा हुई और आगे भारत को इस दिशा में क्या काम करना है इसका भी जिक्र हुआ। ये जीओएम एक निश्चित अंतराल पर मिल कर लगातार स्थिति का जायज़ा लेती रहती है। 

कोरोना से बचने के उपाय

कोरोना वायरस (Coronavirus disease - COVID-19) के संक्रमण से मरने वाले लोगों की संख्या 15,307 हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इसके लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। लक्षणों को पहचानकर ही कोरोना वायरस को काबू में किया जा सकता है। 

कोरोनो वायरस संक्रमण के लक्षण क्या हैं?

इंसान के शरीर में पहुंचने के बाद कोरोना वायरस उसके फेफड़ों में संक्रमण करता है। इस कारण सबसे पहले बुख़ार, उसके बाद सूखी खांसी आती है। बाद में सांस लेने में समस्या हो सकती है।

वायरस के संक्रमण के लक्षण दिखना शुरू होने में औसतन पाँच दिन लगते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ लोगों में इसके लक्षण बहुत बाद में भी देखने को मिल सकते हैं।  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार वायरस के शरीर में पहुंचने और लक्षण दिखने के बीच 14 दिनों तक का समय हो सकता है। हालांकि कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि ये समय 24 दिनों तक का भी हो सकता है। 

कोरोना वायरस उन लोगों के शरीर से अधिक फैलता है जिनमें इसके संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन कई जानकार मानते हैं कि व्यक्ति को बीमार करने से पहले भी ये वायरस फैल सकता है।

बीमारी के शुरुआती लक्षण सर्दी और फ्लू जैसे ही होते हैं जिससे कोई आसानी से भ्रमित हो सकता है। 

कितना घातक है कोरोना वायरस?

कोरोना वायरस के संक्रमण के आँकड़ों की तुलना में मरने वालों की संख्या को देखा जाए तो ये बेहद कम हैं. हालांकि इन आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, लेकिन आंकड़ों की मानें तो संक्रमण होने पर मृत्यु की दर केवल एक से दो फ़ीसदी हो सकती है। 

फ़िलहाल कई देशों में इससे संक्रमित हज़ारों लोगों का इलाज चल रहा है और मरने वालों का आँकड़ा बढ़ भी सकता है। 

56,000 संक्रमित लोगों के बारे में एकत्र की गई जानकारी आधारित विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक अध्ययन बताता है कि -

  • 6 फ़ीसदी लोग इस वायरस के कारण गंभीर रूप से बीमार हुए. इनमें फेफड़े फेल होना, सेप्टिक शॉक, ऑर्गन फेल होना और मौत का जोखिम था.
  • 14 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के गंभीर लक्षण देखे गए. इनमें सांस लेने में दिक्क़त और जल्दी-जल्दी सांस लेने जैसी समस्या हुई.
  • 80 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के मामूली लक्षण देखे गए, जैसे बुखार और खांसी. कइयों में इसके कारण निमोनिया भी देखा गया.

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बूढ़ों और पहले से ही सांस की बीमारी (अस्थमा) से परेशान लोगों, मधुमेह और हृदय रोग जैसी परेशानियों का सामना करने वालों के गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका अधिक होती है। 

कोरोना वायरस का इलाज इस बात पर आधारित होता है कि मरीज़ के शरीर को सांस लेने में मदद की जाए और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि व्यक्ति का शरीर ख़ुद वायरस से लड़ने में सक्षम हो जाए। 

कोरोना वायरस का टीका बनाने का काम अभी चल रहा है.

अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो आपको कुछ दिनों के लिए ख़ुद को दूसरों से दूर रहने की सलाह दी जा सकती है। 

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने कहा है कि जिन्हें लगता है कि वो संक्रमित हैं वो डॉक्टर, फार्मेसी या अस्पताल जाने से बचें और अपने इलाक़े में मौजूद स्वास्थ्य कर्मी से फ़ोन पर या ऑनलाइन जानकारी लें। 

जो लोग दूसरे देशों की यात्रा कर के यूके लौटे हैं उन्हें सलाह दी गई है कि वो कुछ दिनों के लिए ख़ुद को दूसरों से अलग कर लें। 

 
क्या कोरोना वायरस कोविड 19 पहला ऐसा वायरस है जिसे पैन्डेमिक कहा गया है?

दूसरे देशों ने भी इस वायरस से बचने के लिए अपने अपने देशों में स्कूल कॉलेज बंद करने और सर्वजनिक सभाएं रद्द करने जैसे क़दम उठाएं हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी लोगों के लिए एहतियात बरतने के तरीक़ों के बारे में जानकारी जारी की है। 

संक्रमण के लक्षण दिखने पर व्यक्ति को अपने स्थानीय स्वास्थ्य सेवा अधिकारी या कर्मचारी से संपर्क करना चाहिए। जो लोग बीते दिनों कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं उनकी जांच की जाएगी। 

अस्पताल पहुंचने वाले सभी मरीज़ जिनमें फ्लू (सर्दी ज़ुकाम और सांस लेने में तकलीफ) के लक्षण हैं, स्वास्थ्य सेवा अधिकारी उनका परीक्षण करेंगे। 

परीक्षण के नतीजे आने तक आपको इंतज़ार करने और दूसरों से खुद को दूर रखने के लिए कहा जाएगा। 

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