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भारत के विरोध के बावजूद गिलगित-बाल्टिस्‍तान में चुनाव का ऐलान

[Edited By: Rajendra]

Thursday, 24th September , 2020 04:11 pm

भारत के सख्त संदेश के बावजूद नापाक पाकिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्टिस्तान में चुनाव कराने जा रहा है। प्रमुख कमर जावेद बाजवा के इशारे पर इमरान खान सरकार ने वहां पर 15 नवंबर को चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है। पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति आरिफ अल्‍वी ने बुधवार को गिलगित और बाल्टिस्‍तान में विधानसभा चुनाव कराने के बिल को अपनी मंजूरी दे दी।

राष्ट्रपति डॉ आरिफ अल्वी ने बुधवार को इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की। वक्तव्य में कहा गया, 'पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र के राष्ट्रपति घोषणा करते हैं कि चुनाव अधिनियम 2017 की धारा 57 (1) के तहत रविवार, 15 नवंबर 2020 को गिलगित बाल्तिस्तान विधानसभा में आम चुनाव कराए जाएंगे।आपको बता दें कि गिलगित-बाल्टिस्‍तान में होने वाले इस विधानसभा चुनाव में तीन प्रमुख पार्टियां हिस्सा लेने वाली हैं। जिसमें इमरान की पीटीआई, नवाज शरीफ की पीएमल एन और बिलावल की पार्टी पाकिस्‍तानी पीपुल्‍स पार्टी का नाम शामिल है।

गिलगित-बाल्टिस्‍तान विधानसभा में 33 सीटें होंगी और इसमें से तीन ट्रेक्‍नोक्रेट और 6 महिलाओं के लिए सुरक्षित होंगी। चुनाव केवल बची हुई 24 सीटों पर ही होंगे। पाकिस्‍तान सरकार का दावा है कि इस चुनाव में सात लाख लोग मतदान करेंगे और इसमें से 45 प्रतिशत महिलाएं हैं।

गिलगित बाल्तिस्तान में 18 अगस्त को चुनाव होने थे लेकिन चुनाव आयोग ने कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए 11 जुलाई को चुनाव की प्रक्रिया टाल दी थी। चुनाव की नई तारीखों का ऐलान गिलगित बाल्तिस्तान को पूर्ण प्रांत का दर्जा दिए जाने की खबरों के बीच लिया गया है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के बीच 16 सितंबर को हुई बैठक में चर्चा की गई थी।

पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख के इशारे पर गिलगित-बल्टिस्तान हो रहे इस चुनाव को लेकर पाकिस्तान की तमाम प्रमुख व‍िपक्ष पार्टियां भी विरोध कर रही है। वहीं, भारत ने इसे लेकर अपना रुख साफ कर रखा है कि गिलगित-बल्टिस्तान समेत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का क्षेत्र उसके अंतर्गत आता है और पाकिस्तान वहां चुनाव नहीं करा सकता।

भारत ने मई में पाकिस्तान को दो-टूक कहा था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में गिलगित-बल्टिस्तान समेत पूरा इलाका पाकिस्तान या उसकी न्यायपालिका के पास ऐसे क्षेत्रों में अधिकार नहीं हैं जो उसने जबरन अवैध तरीके से कब्जाए हैं। भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कोई बदलाव करने की कोशिश नहीं करने की चेतावनी दी थी और कहा था कि अवैध कब्जा फौरन छोड़ दे। भारत ने इन इलाकों में चुनाव नहीं कराने की चेतावनी भी दी थी।

आपको बता दें कि इससे पहले पाकिस्‍तान सरकार ने 17 सितंबर को गिलगित-बाल्टिस्‍तान को प्रांत का दर्जा दिया था। सूत्रों के मुताबिक पाक सेना ने भारत के जम्‍मू-कश्‍मीर के विशेष राज्‍य के दर्जे को खत्‍म करने के बाद यह फैसला लिया है। पाकिस्‍तान को डर सता रहा है कि भारत पीओके पर कब्‍जा कर सकता है।

पाकिस्‍तानी मीडिया के मुताबिक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने गिलगित को लेकर पिछले दिनों देश की सभी बड़ी पार्टियों के नेताओं को सेना मुख्‍यालय रावलपिंडी में आयोजित दावत में बुलाया था। इसमें नवाज शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ, आस‍िफ अली जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी समेत पाकिस्‍तानी सियासत के कई दिग्‍गज नेता शामिल हुए थे। इस दौरान आईएसआई के प्रमुख भी मौजूद थे।

इस दौरान वाजबा कि बिलावल भुट्टो और शाहबाज शरीफ से बहस हो गई। बाजवा ने कहा कि पीओके पर भारत की कार्रवाई का डर है और चीन इस इलाके में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। ऐसे में हम गिलगित को एक नया प्रांत बनाना चाहते हैं जिसका राजनीतिक दल उनका समर्थन करें।

इसी दौरान बिलावल ने राजनीतिक मामले में सेना के हस्‍तक्षेप का मुद्दा उठा दिया। बिलावल भुट्टों ने कहा कि इसी तरह के हालात वर्ष 1971 में थे और उस समय भी सेना राजनीतिक मामलों में हस्‍तक्षेप कर रही थी।

वहीं नवाज शरीफ की बेटी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग की उपाध्यक्ष मरयम नवाज शरीफ का कहना है कि यह एक सरकारी मसला है और इस पर फैसला संसद में होना चाहिए न कि सेना मुख्यालय। मरयम ने कहा है कि मुख्यालय को राजनीतिक नेताओं को ऐसे मुद्दों पर नहीं बुलाना चाहिए और न ही नेताओं को वहां जाना चाहिए।

इन सबके बीच पाकिस्‍तानी अखबार एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून के मुताबिक इस चुनाव में तीन प्रमुख राजनीतिक दल इमरान की पीटीआई, नवाज शरीफ की पीएमल एन और बिलावल की पार्टी पाकिस्‍तानी पीपुल्‍स पार्टी हिस्‍सा लेगी। हालांकि नवाज शरीफ और बिलावल भुट्टो की पार्टी इस चुनाव का विरोध कर रही है।

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