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कश्मीरी पंडितों के शिष्टमंडल ने इस नये अधिवास कानून को ऐतिहासिक करार दिया, उप राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू से मुलाकात की

[Edited By: Rajendra]

Friday, 22nd May , 2020 12:05 pm

कश्मीर पंडित समुदाय के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने दो अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों के रूप में गुरुवार को उपराज्यपाल जीसी मुर्मू से राजभवन में मुलाकात की। उन्होंने उपराज्यपाल से कहा कि जम्मू कश्मीर में पिछड़ेपन और अलगाववाद के सभी मुख्य कारणों को हटा दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर की नई डोमिसाइल नीति और अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद राज्य की स्थिति में तेजी से आ रहे बदलाव से कश्मीरी पंडित भी उत्साहित हैं। अब उन्होंने उपराज्यपाल से कश्मीर में हिंदू धार्मिक व तीर्थस्थलों के संरक्षण के लिए प्रभावी कानून बनाए जाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कश्मीरी पंडित समुदाय के रोजगार और घाटी में उनकी वापसी के लिए कॉलोनियों का मुद्दा भी उठाया है। उत्साहित कश्मीरी पंडितों ने डोमिसाइल नीति को राष्ट्रवादियों की जीत और अलगाववादियों व उनके समर्थकों की हार करार दिया है।

कश्मीरी पंडितों ने कहा कि डोमिसाइल की व्यवस्था ने जम्मू कश्मीर को पूरी तरह मुख्यधारा से जोड़ दिया है। यहां बीते 70 वर्षो से एक वर्ग विशेष की सियासत समाप्त हो गई है। यह राष्ट्रवादियों की जीत है। डोमिसाइल व्यवस्था के तहत उन लोगों को भी फायदा होगा जो जम्मू कश्मीर के नागरिक हैं और 40-50 साल पहले यहां से चले गए थे। विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय के वह लोग जो पंजीकृत नहीं हैं, वह भी लाभान्वित होंगे। उन्होंने जम्मू कश्मीर में डोमिसाइल का कानून लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व उपराज्यपाल का आभार जताया।

नये नियमों के अमल में आने के बाद देश व दुनिया में रह रहे कश्मीरी पंडित समुदाय के गैर पंजीकृत सदस्यों को अधिवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने में मदद मिलेगी । एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि जम्मू कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को कश्मीरी प्रवासियों और विस्थापितों के लिए पंजीकरण फिर से खोलने का फैसला किया है।

नयी व्यवस्था के अनुसार कोई भी कश्मीरी पंडित, जिसने 1944 अथवा स्वतंत्रता के पूर्व कश्मीर छोड़ दिया हो और उसके पास जम्मू कश्मीर के किसी भी हिस्से में 1944 में अथवा इसके बाद अचल संपत्ति का स्वामित्व अथवा इसका कोई साक्ष्य हो तो वह जम्मू कश्मीर राज्य का अधिवासी होने का हकदार होगा।

पूर्व एमएलसी सुरेंद्र अंबरदार ने कहा कि बीते 70 वर्षो से कश्मीर में जो अन्याय और अलगाववाद का दौर चल रहा था, उसे समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और उपराज्यपाल का आभार जताने के लिए ही हम आज यहां आए थे। हमने कश्मीरी पंडितों के लिए एम फार्म की व्यवस्था को सरल बनाने का भी आग्रह किया है। यह मिले प्रतिनिधिमंडल में ऑल पार्टी माइग्रेंट कोआर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन विनोद पंडित के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यसचिव विजय बकाया, जम्मू कश्मीर पुलिस के पूर्व महानिदेशक कुलदीप खुड्डा मिले। पद्मश्री डॉ. केएन पंडिता के नेतृत्व में कश्मीरी पंडित वेलफेयर आर्गेनाइजेश्न के बैनर तले पूर्व एमएलसी सुरेंद्र अंबरदार व जीएल रैना और कश्मीरी पंडित सभा जम्मू के अध्यक्ष केके खोसा मिले।

प्रवक्ता ने बताया कि शिष्टमंडल ने इस नये अधिवास कानून को ऐतिहासिक करार दिया है । उन लोगों ने दोहराया कि संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को वापस लिये जाने एवं अनुच्छेद 35 एक को समाप्त किये जाने से प्रदेश विकास एवं वृद्धि की नयी उंचाई को छूयेगा ।

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