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कोरोना वायरस: विश्वभर में हाहाकार जानिए सोशल मीडिया पर अफवाहों की क्या है सच्चाई, पढ़िए वायरस के लक्षण और उपचार

[Edited By: Admin]

Sunday, 15th March , 2020 11:35 am

कोरोना वायरस की वजह से विश्वभर में हाहाकार मचा हुआ है। अब भारत भी इससे अछूता नहीं है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच सलाहों और उठाए जाने वाले एहतियाती कदमों से संबंधित सूचनाओं की बाढ़ आ चुकी है। सोशल मीडिया के इस दौर में कोई भी सूचना तुरंत व्यापक स्तर पर लोगों के बीच पहुंच बना लेती है। चूंकि रोग जानलेवा है इसलिए मरता क्या न करता पर लोग अमल भी करने लगते हैं। बिना उस सूचना की पुष्टि किए उसके बताए नुस्खे लोग इस्तेमाल करने लगते हैं। कई बार ये घातक भी हो सकता है। लोगों के बीच जागरूकता लाने के लिए दुनिया के कई जाने-माने संस्थाओं के चिकित्साविदों ने सोशल मीडिया पर चल रही इस तमाम बातों की सच्चाई बताई है।

पेश है एक नजर:

नुस्खा: अगर कोई अपने पूरे शरीर पर एल्कोहल और क्लोरीन का छिड़काव कर ले तो इससे वह कोरोना वायरस को मार सकता है।

हकीकत: किसी भी व्यक्ति के इस उपक्रम से कोरोना वायरस नहीं खत्म होगा। यह वायरस उसके शरीर में मौजूद होता है तो शरीर के ऊपर किसी लेप या छिड़काव का असर कैसे होगा। ऊपर से म्यूकस झिल्ली को भी नुकसान पहुंच सकता है।

नुस्खा: खूब पानी पीएं और कोरोना को दूर भगाएं।

हकीकत: यह बात सही है कि शरीर में पानी की संतृप्त मात्रा सामान्य सेहत के लिहाज से ठीक मानी जाती है, लेकिन पानी पीना, एल्कोहल या माउथवाश का गरारा करना इस वायरस को रोकथाम में कारगर नहीं पाया गया है।

नुस्खा: लवणीय तरल से नाक को साफ करके संक्रमण से बचा जा सकता है।

हकीकत: सामान्य सर्दी-जुकाम के मामले में इस तरीके के सीमित प्रमाण मिले हैं,लेकिन इससे श्वसन तंत्र के संक्रमण से बचाव नहीं होता है।

नुस्खा: यदि आप अपनी सांस को दस सेकंड के लिए रोकने में सक्षम हैं और इस दौरान आपको खांसी या किसी प्रकार की तकलीफ न महसूस हो तो आपको कोरोना का संक्रमण नहीं है।

हकीकत: कोई भी व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है या नहीं, इस बात की पुष्टि का एक ही तरीका है कि वह अपने गले की स्वैब को प्रयोगशाला में भेजकर परीक्षण कराए। देश के 51 प्रयोगशालाओं में इस परीक्षण की सुविधा है। साथ ही देश में 57 ऐसे केंद्र बनाए गए हैं जो नमूनों के संग्रह में मदद करते हैं।

हकीकत: गर्म पानी का स्नान किसी भी व्यक्ति के शरीर का तापक्रम नहीं बढ़ाता है। इसके बाद भी व्यक्ति के शरीर का तापमान लगभग स्थिर ही रहता है।

नुस्खा: लहसुन के सेवन से कोरोना के वायरस को दूर रखा जा सकता है।

हकीकत: लहसुन स्वास्थ्यवद्र्धक खाद्य पदार्थ है। इसमें तमाम औषधीय गुण हैं। सूक्ष्म जीवों को खत्म करने वाले इसके तमाम गुणों के बावजूद यह साबित नहीं हो सका है कि यह कोरोना वायरस से लड़ने में मददगार है।

कोरोनो वायरस संक्रमण के लक्षण क्या हैं?

इंसान के शरीर में पहुंचने के बाद कोरोना वायरस उसके फेफड़ों में संक्रमण करता है। इस कारण सबसे पहले बुख़ार, उसके बाद सूखी खांसी आती है। बाद में सांस लेने में समस्या हो सकती है।

वायरस के संक्रमण के लक्षण दिखना शुरू होने में औसतन पाँच दिन लगते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ लोगों में इसके लक्षण बहुत बाद में भी देखने को मिल सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार वायरस के शरीर में पहुंचने और लक्षण दिखने के बीच 14 दिनों तक का समय हो सकता है। हालांकि कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि ये समय 24 दिनों तक का भी हो सकता है।

कोरोना वायरस उन लोगों के शरीर से अधिक फैलता है जिनमें इसके संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन कई जानकार मानते हैं कि व्यक्ति को बीमार करने से पहले भी ये वायरस फैल सकता है।

बीमारी के शुरुआती लक्षण सर्दी और फ्लू जैसे ही होते हैं जिससे कोई आसानी से भ्रमित हो सकता है।

व्हाट्सएप पर आ रहे वायरल मैसेज

लेकिन इस स्पष्टीकरण के बावजूद प्रेस विज्ञप्ति से ली गई आधी अधूरी जानकारी को भारतीय सोशल मीडिया पर लोग बड़ी संख्या में शेयर कर रहे हैं।

व्हाट्सएप पर कई लोग ये मैसेज इस सुझाव के साथ शेयर कर रहे हैं कि वैकल्पिक दवाएं कोरोना वायरस कोविड 19 का इलाज कर सकती हैं।

इन वायरल मैसेजेस को देखते हुए भारतीय फैक्ट-फाइंडिंग वेबसाइट BOOM ने इसी सप्ताह कहा कि उन्हें "इस सिद्धांत के समर्थन में अब तक कोई वैज्ञानिक शोध नहीं मिला है कि होम्योपैथी की ये गोलियां कोरोना वायरस कोविड 19 को फैलने से रोकने में मदद कर सकती हैं।"

द लॉजिकल इंडियन ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मैसेजेस की पड़ताल की. उन्होंने पाया कि व्यापक रूप से सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों ने मंत्रालय के संदेश को गलत समझा था।

वेबसाइट का कहना था कि "आर्सेनिकम एल्बम 30 का कभी कोरोना वायरस संक्रमण को कम करने या रोकने के लिए परीक्षण नहीं हुआ है और ऐसा किसी जांच में सिद्ध हुआ है।"

कोरोना वायरस पर शोधइमेज कॉपीरइटREUTERS

इसके इतर, भारतीय मीडिया में इस तरह की ख़बरें छपी थीं कि हाल में बीमारियों के होम्योपैथिक इलाज की मांग बढ़ी है।

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार कि भारत के दक्षिणी तेलंगाना राज्य में 3,500 लोगों को होम्योपैथी की 11,500 खुराक बांटी गई।

दवा वितरण के एक कार्यक्रम के दौरान न्यूज़ मिनट वेबसाइट से बात करते हुए एक चिकित्सा अधिकारी ने कहा "ये गोलियां सिर्फ कोरोना वायरस के लिए ही नहीं बल्कि सभी प्रकार के इन्फ्लूएंजा (सर्दी ज़ुक़ाम) के लिए हैं। एक वायरस की ताकत दूसरे वायरस के अलग होती है और ये दवा इलाज के लिए नहीं है बल्कि केवल रोकथाम के लिए है।"

हालांकि कोरोना वायरस या इसके इलाज के बारे में स्पष्ट जानकारी न होने और लोगों में जागरूकता की कमी होने से कई लोग इसके इलाज के लिए होम्योपैथिक की दवाएं लेने के लिए तैयार थे।

एक व्यक्ति ने न्यूज़ मिनट के संवाददाता को बताया "कोरोनो वायरस के बारे में अनेक भ्रांतियां फैली हैं। मुझे लगता है कि हम पूरी तरह तैयार रहें तो बेहतर होगा। वैसे भी लोग कह रहे हैं कि इस के कोई साइड इफेक्ट नहीं है।"

कोरोना वायरस पर शोधइमेज कॉपीरइटEPA

आयुष मंत्रालय की ज़रूरत क्यों?

आयुष मंत्रालय भारतीय पारंपरिक इलाज पद्धतियों और दवाओं को बढ़ावा देने का काम करता है और इस पर नज़र रखता है। इनमें से कई पद्धतियां आध्यात्मिक विश्वास पर आधारित हैं।

हालाँकि, होम्योपैथी इलाज की एक ख़ास शैली है जो 18वीं सदी के आख़िर में यूरोप से उभरी,और बाद में भारत में लोकप्रिय हुई।

ग़लत विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए के लिए मंत्रालय की आलोचना होती रही है। साथ ही हिंदू राष्ट्रवादी राजनीति को बढ़ावा देने के लिए भी इसकी आलोचना की गई है।

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन 2019 में वॉशिंगटन पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने भारत के पुराने इतिहास को बचाए रखने की मुहिम में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाया है और इसे बढ़ावा भी दे रही है।

हालांकि, 2017 के एक भारत सरकार के ही किए एक अध्ययन से ये बात सामने आई है कि देश का 93 फीसद हिस्सा विज्ञान आधारित चिकित्सा पद्धति अपनाते हैं।

कोरोना वायरस कोविड 19 का न तो अब तक कोई इलाज मिल सका है न ही इससे निपटने के लिए अब तक कोई टीका बना है। ऐसे में लोग राहत के लिए वैकल्पिक दवाओं का रुख़ कर रहे हैं लेकिन इसका ये अर्थ कतई नहीं है होम्योपैथी में कोरोना वायरस का इलाज है।

लेकिन कोरोना वायरस के इलाज को लेकर बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया पर झूठी ख़बरें केवल भारत में ही नहीं बल्कि यूके, अमरीका, घाना और कई और जगहों पर भी शेयर की जा रही हैं।

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