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नेपाल के सत्तारूढ़ दल में विवाद चरम पर

[Edited By: Rajendra]

Tuesday, 28th July , 2020 11:55 am

नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिष्ट पार्टी का आतंरिक विवाद अपने चरम पर पहुंच गया है. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से इस्तीफा मांगे जाने को लेकर पार्टी में विवाद इस कदर बढ़ गया है कि पिछले 20 दिनों से जारी पार्टी की स्थाई समिति की बैठक को आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है. 8 बार स्थगित होने के बाद आज सुबह 11 बजे से स्थाई समिति की बैठक होनी थी. आज की बैठक से ओली से प्रधानमंत्री पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का निर्णय किये जाने की पूरी संभावना थी.

ओली के विरोधी गुट का नेतृत्व कर रहे प्रचण्ड पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं ने कल दिन भर बैठक कर आज की बैठक को किसी भी हालत में स्थगित नहीं होने देने ओली की अनुपस्थिति में भी बैठक जारी रखते हुए किसी नतीजे पर पहुंचने की बात पर अपनी सहमती दे दी थी. लेकिन आज की बैठक से पहले जब प्रचण्ड प्रधानमंत्री ओली से मिलने की कोशिश की तो ओली के तरफ से पहले बैठक स्थगित करने के बाद ही मिलने की शर्त राखी गई. 2 घंटे के मशक्कत के बाद भी जब प्रचण्ड को मिलने का समय नहीं दिया गया तो प्रचण्ड ने यह सन्देश भिजवाया कि वो प्रधानमंत्री निवास आ रहे हैं. इस पर ओली के तरफ से प्रचण्ड को यह सन्देश दिया गया कि यदि पार्टी बैठक स्थगित नहीं होती है तो प्रचण्ड के लिए प्रधानमन्त्री निवास का दरवाजा नहीं खुलने वाला है.

प्रधानमंत्री की तरफ से अपने विरोधी गुट को यह भी स्पष्ट दे दिया गया है कि यदि बहुमत के आधार पर वो पार्टी की बैठक बुलाना चाहते हैं तो प्रचण्ड अपने निवास में या पार्टी दफ्तर में बुला सकते हैं. साथ ही यह भी कहा गया कि अगर आज बहुमत के आधार पर बैठक होगी तो इसे पार्टी में औपचारिक विभाजन माना जाएगा इसके बाद की सभी परिस्थितियों के लिए प्रचण्ड ही जिम्मेवार होंगे. इसके बाद प्रधानमन्त्री के तरफ से पार्टी अध्यक्ष की हैसियत से सभी सदस्यों को बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने की जानकारी भेज दी गई है.

उधर, प्रधानमंत्री निकट सूत्रों के मुताबिक़ ओली ने कहा है कि सचिवालय की बैठक से जो प्रस्ताव पारित किया गया था सिर्फ उसी पर चर्चा हो तो स्थाई समिति की बैठक करने में उनको कोई आपत्ति नहीं है. अगर इस्तीफे का एजेण्डा लाया गया तो किसी भी हालत में बैठक नहीं होने दी जाएगी. इसलिए पहले प्रचण्ड यह तय करे कि स्थाई समिति की बैठक में किन प्रस्तावों पर चर्चा होना है उसे लिखित रूप से बालुवाटार को सौपे. उसके बाद ही प्रधानमन्त्री यह तय करेंगे कि बैठक होना है या नहीं होना है.

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