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भारत के खिलाफ चीन की चाल नाकाम

[Edited By: Rajendra]

Tuesday, 22nd September , 2020 03:28 pm

भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर जारी तनाव के बीच चीन के इशारे पर नेपाल की ओर से जारी किए गए विवादित नक्शे वाली किताब के वितरण पर ओली सरकार ने रोक लगा दी है। नेपाल के विदेश मंत्रालय और भू प्रबंधन मंत्रालय ने शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी इस किताब की विषयवस्तु पर आपत्ति दर्ज कराई है, जिसके बाद ओली सरकार के निर्देश पर किताब के वितरण और प्रकाश पर रोक लगाने हेतु शिक्षा मंत्रालय को निर्देश जारी कर दिया गया है।

मालूम हो कि पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर भारत-चीन के बीच तनावपूर्ण महौल बना हुआ है। ऐसे में नेपाल विवादित नक्शे को लेकर चीन के उकसावे में आ गया और ये कदम उठा लिया। मामला यहीं तक नहीं रुका नेपाल सरकार ने बच्चों की एक किताब में विवादित नक्शे को भी प्रकाशित करा दिया इसके साथ-साथ नेपाल-भारत सीमा विवाद का भी जिक्र किया गया है।

इसके अलावा नेपाल की सत्ताधारी पार्टी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत के नए इलाकों को अपना बताने का दुष्प्रचार शुरू कर दिया है। नेपाल द्वारा जिन जगहों पर दावा ठोका जा रहा है उसमें उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, बिहार और सिक्किम तक के प्रमुख शहर शामिल है। साल 1816 में हुई सुगौली संधि से पहले के नेपाल की तस्वीर दिखाकर नेपाल के नागरिकों को भ्रमित किया जा रहा है।

विवादित नक्शे को लेकर काठमांडू रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक विदेश मंत्रालय और भू प्रंबधन मंत्रालय ने कहा था कि जारी की जा रही किताब में तथ्यात्मक गल्तियां और अनुचिट कंटेंट है जिसके चलते इसके प्रकाशन पर रोक लगाई गई है। वहीं इस मामले पर कानून मंत्री शिव माया का कहना है कि 'हमने यह निष्‍कर्ष निकाला है कि किताब के वितरण पर रोक लगा दी जाए।' उन्होंने कहा कि कई गलत तथ्‍यों के साथ संवेदनशील मुद्दों पर किताब का प्रकाशन गलत कदम था।

गौरतलब है कि भारत और नेपाल के रिश्ते आज सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। हाल ही में नेपाल ने भारत सरकार की चेतावनी के बाद भी भारत के उत्तराखण्ड राज्य के लिपुलेख और कालापानी जैसे हिस्सों को नेपाल का हिस्सा बताकर एक नया विवादित नक्शा अपनी संसद से पास कर दिया है। जिससे दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं।

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