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Chhath Puja 2019: जानिए क्या है छठ पूजा का महत्व, पढ़िए त्योहार से जुड़े इतिहास की खास बातें

[Edited By: Gaurav]

Friday, 1st November , 2019 01:00 pm

छठ महापर्व में जहां सूर्यदेव की उपासना की जाती है वहीं छठी मैया की पूजा का भी विशेष विधान है. माना जाता है कि छठी मैया की पूजा से संतानहीन परिवारों को संतान का आशीर्वाद मिलता है.

दूसरी ओर छठी मैया की पूजा से संतान के जीवन की रक्षा होती है, परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी मिलता है। इस बार छठ पूजा नहाय-खाय के साथ 31 अक्टूबर को शुरू होगी और 2 नवंबर तक चलेगी.

कई लोग व्रत-पूजा तो करते हैं पर उन्हें पता नहीं होता कि आखिर छठी मैया कौन है और सूर्यदेव के साथ क्यों होती है इनकी पूजा. कैसा है इनका स्वरूप और इनकी पूजा से आखिर कौन से आशीर्वाद मिलते हैं.

छठी मैया के बारे में विशेष बातें ...

ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खंड में बताया गया है कि सृष्‍ट‍ि की अधिष्‍ठात्री प्रकृति देवी के एक प्रमुख अंश को देवसेना कहा गया है. प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इस देवी का एक प्रचलित नाम षष्‍ठी है.

पुराण के अनुसार, ये देवी सभी बालकों की रक्षा करती हैं और उन्‍हें लंबी आयु प्रदान करती हैं. आज भी ग्रामीण समाज में बच्‍चों के जन्‍म के छठे दिन षष्‍ठी पूजा या छठी पूजा का प्रचलन है.

ऐसा है छठी मैया का स्वरूप
ऐसा है छठी मैया का स्वरूप
''षष्‍ठांशा प्रकृतेर्या च सा च षष्‍ठी प्रकीर्तिता।

बालकाधिष्‍ठातृदेवी विष्‍णुमाया च बालदा।।

आयु:प्रदा च बालानां धात्री रक्षणकारिणी।|

सततं शिशुपार्श्‍वस्‍था योगेन सिद्ध‍ियोगिनी।।"

-(ब्रह्मवैवर्तपुराण,प्रकृतिखंड 43/4/6)

षष्‍ठी देवी को ही स्‍थानीय भाषा में छठी मैया कहा गया है। षष्‍ठी देवी को ब्रह्मा की मानसपुत्री भी कहा जाता है.

मां कात्यायनी ही छठी मैया है

पुराणों में छठी मैया का एक नाम कात्‍यायनी भी है. इनकी पूजा नवरात्रि में षष्‍ठी तिथि को होती है. शेर पर सवार मां कात्यायनी की चार भुजाएं हैं. वह बाएं हाथों में कमल का फूल और तलवार धारण करती हैं.

वहीं, दाएं हाथ अभय और वरद मुद्रा में रहते हैं.मां कात्यायनी योद्धाओं की देवी हैं. राक्षसों के अंत के लिए माता पार्वती ने कात्यायन ऋषि के आश्रम में ज्वलंत स्वरूप में प्रकट हुई थीं, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा.

पूरे विधि - विधान से की जाती है छठ पूजा
पूरे विधि - विधान से की जाती है छठ पूजा
सूर्य की बहन हैं छठी मैया

ऐसी भी मान्यता है कि छठी मैया भगवान सूर्य की बहन हैं। छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है.

ये आशीर्वाद देती हैं छठी मैया

- छठी मैया की पूजा करने से नि:संतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है.

- छठी मैया संतान की रक्षा करती हैं और उनके जीवन को खुशहाल रखती हैं.

- छठी मैया की पूजा से सैकड़ों यज्ञों के फल की प्राप्ति होती है.

- परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए भी छठी मैया का व्रत किया जाता है.

  • छठी मैया की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

36 घंटे तक निर्जला व्रत


छठ का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. महिलाएं 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती है. प्रसाद बनाया जाता है. सूर्य भगवान को अर्घ्‍य देते हैं. पर इस महाव्रत में छठ कथा कहने-सुनने का भी काफी महत्‍व है. ये कथा सुनने से छठी मैया प्रसन्‍न होती हैं. व्रत का फल दोगुना होता है.

छठ व्रत कथा

प्रियव्रत नामक राजा थे. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. दोनों की कोई संतान नहीं थी. इस बात से राजा और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहते थे. उन्होंने एक दिन संतान प्राप्ति की इच्छा से महर्षि कश्यप द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया. इस यज्ञ के फलस्वरूप रानी गर्भवती हो गईं.

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नौ महीने बाद संतान सुख को प्राप्त करने का समय आया तो रानी को मरा हुआ पुत्र प्राप्त हुआ. इस बात का पता चलने पर राजा को बहुत दुख हुआ.

संतान शोक में उन्‍होंने आत्महत्या का मन बना लिया. लेकिन जैसे ही राजा ने आत्महत्या करने की कोशिश की उनके सामने एक सुंदर देवी प्रकट हुईं.

देवी ने राजा को कहा कि मैं षष्‍ठी देवी हूं. मैं लोगों को पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं. इसके अलावा जो सच्चे भाव से मेरी पूजा करता है, मैं उसके सभी प्रकार के मनोरथ को पूर्ण कर देती हूं. अगर तुम मेरी पूजा करोगे तो मैं तुम्हें पुत्र रत्न प्रदान करूंगी. देवी की बातों से प्रभावित होकर राजा ने उनकी आज्ञा का पालन किया.

राजा और उनकी पत्नी ने कार्तिक शुक्ल की षष्‍ठी तिथि के दिन देवी षष्टी की पूरे विधि-विधान से पूजा की. इस पूजा के फलस्वरूप उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई. तभी से छठ का पावन पर्व मनाया जाने लगा.

छठ पूजा की सामग्री

1. बांस या पीतल की सूप जिसे कई जगह सूपा भी कहा जाता है.

2. बांस के फट्टे से बना दौरा जिसे डलिया और डगरा के नाम से भी जाना जाता है.

3. पानी का नारियल,गन्ना जिसमें पत्ता लगा हो.

4.सूतनी, शक्कर कंदी,हल्दी और अदरक का पौधा.

5. नाशपति, एक बड़ा नीबूं जिसे ताप के नाम से भी जाना जाता है.

6. शहद की डिब्बी, पान और साबूत सुपारी, केराओ,सिंदूर कपूर, कुमकुम ,चावल चंदन और मिठाई.

7. इसके अलावा घर में बने हुए पकवान जिसमें ठेकुआ, खस्ता.

8. इसके अलावा छठ पूजा में पुआ भी महत्वपूर्ण होता है. जिसे कुछ क्षेत्रों में टिकड़ी के नाम से भी जाना जाता है.

9. इसके साथ ही चावल के लड्डू जिसे लडूआ भी कहा जाता है.

10. इसके अलावा सूर्य देव को अर्घ्य देन के लिए तांबे या स्टील का लोटा.

छठ पूजा के लिए यह सभी सामग्री अति विशेष मानी गई हैं. इनके बिना छठ पूजा अधूरी मानी जाती है. 

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