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सोशल मीडिया वास्तव में अवसाद का कारण बन सकता है?

[Edited By: Gaurav]

Friday, 31st May , 2019 05:49 pm

लोगों से कनेक्ट रहने का एक जरूरी माध्यम सोशल मीडिया बन गया है। लेकिन इसके कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं। आमतौर पर यह अवधारणा है कि सोशल मीडिया मस्तिष्क पर बुरा असर डालता है।  अक्सर आपने देखा होगा कि लोग सोशल मीडिया के जरिए किसी दूसरे की प्रोफाइल में झांककर यह धारणा बना लेते हैं कि उनके जीवन में कुछ खास नहीं रह गया है। ऑस्ट्रेलिया की फ्लाइंडर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस पर एक ज्ञानवर्धक शोध किया है। 

डिप्रेशन के लिए जिम्मेदार सोशल मीडियाः शोधकर्ताओं का मानना है कि सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म की वजह से हमारा लोगों से फेस-टू-फूस इंटरेक्शन कम होता जा रहा है. यह न सिर्फ व्यवहारिक रूप से हमें प्रभावित कर रहा है, बल्कि हमें बीमार भी बना रहा है। शोधकर्ता डिप्रेशन और कई शारीरिक समस्याओं की वजह के लिए भी इसे ही जिम्मेदार ठहराते हैं।

सुसाइड करने वालों की बढ़ी संख्याः शोधकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया के तार निराशा की मौत मरने वालों से भी जुड़े हैं। इनमें एल्कोहल, दवाइयों की ओवरडोज और सुसाइड करने वालों की तादाद भी काफी ज्यादा है, जो सोशल मीडिया की देन है। यह शोध द लैंकट जर्नल में भी प्रकाशित हुआ है।

साइकोलॉजिकल ट्रीटमेंट भी नाकामः इसमें बताया गया है कि सोशल मीडिया इंसानों में पनप रही निराशा और हताशा का एक बड़ा कारण है। फ्लाइंडर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तरुण बस्तियम्पिल्लई ने बताया, 'ऐसे में केवल दवा या साइकोलॉजिकल ट्रीटमेंट का सहारा लेने की बजाय चिकित्सकों को तत्काल सोशल नेटवर्किंग को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जिसमें दोस्तों और परिवार का प्रभाव भी शामिल है। 

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