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B'dy Spcl: 97 साल के हुए 'ट्रेजेडी किंग' और बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार दिलीप कुमार, जानिए उनके जीवन और फिल्मी करियर से जुड़े अनसुने किस्सों के बारे में

[Edited By: Gaurav]

Wednesday, 11th December , 2019 04:18 pm

दिग्गज अभिनेता और बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार दिलीप कुमार का आज 97 वां जन्मदिन है. 11 दिसंबर 1922... इसी तारीख को बॉलीवुड के ‘ट्रेजडी किंग’ का जन्म हुआ था. दिलीप कुमार का जन्म पेशावर पाकिस्तान में हुआ था. उनका असली नाम  दिलीप नहीं बल्कि मोहम्मद यूसुफ खान है. उनके पिता लाला गुलाम सरवर अली खान एक जमींदार थे और मां आयशा बेगम हाउसवाइफ.

दिलीप कुमार के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्हें एक से बढ़कर एक फिल्में दीं. वहीं अगर उनकी पर्सनल लाइफ की बात करें तो उनकी असल जिंदगी भी किसी फिल्म से कम नहीं थी. मधुबाला से इश्क और सारया बानो से शादी, दिलीप कुमार की लव स्टोरी काफी दिलचस्प है.

1951 की फ़िल्म ‘तराना’ की शूटिंग के दौरान दिलीप कुमार और मधुबाला एक दूसरे के करीब आए. सात साल तक दोनों रिलेशनशिप में रहे मगर एक गलतफहमी की वजह से मधुबाला से उनका रिश्ता टूट गया. कहा जाता है कि मधुबाला के पिता अताउल्ला ख़ान की वजह से दिलीप कुमार और उनका रिश्ता टूट गया था. दिलीप और मधुबाला एक दूसरे से शादी करना चाहते थे. मुधबाला के पिता को उनके रिश्ते से एतराज़ नहीं था, लेकिन शादी के लिए उन्होंने एक शर्त रखी जिसे दिलीप कुमार ने मानने से मना कर दिया.

मधुबाला के पिता एक प्रोडक्शन कंपनी चलाते थे. वो चाहते थे कि शादी के बाद दिलीप कुमार और मधुबाला उनकी ही फिल्मों में काम करें जिसके लिए दिलीप कुमार तैयार नहीं हुए. इस दौरान मधुबाला और दिलीप कुमार ने ‘मुग़ले-आज़म’ की शूटिंग की, लेकिन शूटिंग पूरी होने तक दोनों अजनबी हो चुके थे.

...और इस तरह दोनों की मोहब्बत अधूरी रह गई

अपनी बायोग्राफी में एक जगह दिलीप कुमार ने इस बात का ज़िक्र भी किया है कि 'मुग़ले-आज़म के प्रोडक्शन के दौरान ही हमारी बातचीत बंद हो गयी थी. फ़िल्म के उस क्लासिक दृश्य, जिसमें हमारे होठों के बीच पंख आ जाता है, के फ़िल्मांकन के समय हमारी बोलचाल पूरी तरह बंद हो चुकी थी.' और इस तरह प्यार किया तो डरना क्या का नारा आशिक़ों को देने वाली इस जोड़ी की मोहब्बत अधूरी रह गयी.

मधुबाला की मोहब्बत में दिलीप कुमार पूरी तरह टूट गए और उन्हें सहारा दिया सायरा बानू ने. इसके बाद दिलीप सायरा बानो के करीब आते गए और दोनों ने शादी कर ली. जिस वक्त दिलीप कुमार ने सायरा बानो से शादी की उस वक्त एक्ट्रेस की उम्र सिर्फ 22 साल थी.

पांच दशक से भी लंबे समय के करियर में उन्होंने दर्जनों ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं. उन्होंने साल 1944 में फिल्म 'ज्वार भाटा' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की. वहीं 1998 में फिल्म 'किला' में वह आखिरी दफा नजर आए. दिलीप कुमार के नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे अधिक पुरस्कार जीतने वाले भारतीय अभिनेता के तौर पर दर्ज है. इनमें 10 सर्वोत्तम अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार भी शामिल हैं.

पढ़िए उनके बेहतरीन किरदारों के बारे में...

दाग (1952)
इस फिल्म में दिलीप कुमार ने शंकर का किरदार निभाया है जो अपनी विधवा मां के साथ गरीबी में जीवन जी रहा है. खिलौने बेचकर वह अपना जीवन यापन करता. उसे शराब पीने की लत पड़ जाती है. वह पार्वती (निम्मी ) को अपना दिल दे बैठता है. अपनी मां से बहस करने के बाद वह अपना जीवन बदलने का फैसला करता है. हालांकि उसके अतीत के दुश्मन उसके भविष्य को लगातार प्रभावित करते हैं. इस फिल्म का निर्देशन अमिय चक्रवर्ती ने किया है.इस फिल्म के लिए दिलीप कुमार ने अपने करियर का पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का किरदार जीता था.

देवदास (1955)
1955 मे बनी यह फिल्म शरतचंद्र चटोपाध्याय के उपन्यास 'देवदास' पर आधारीत है. फिल्म में दिलीप कुमार ने देवदास का किरदार निभाया था जो एक आकर्षक युवक होता है जो शराब के शिकंजे में फंस जाता है. फिल्म को बहुत अधिक सफलता मिली थी। देवदास हिंदी फिल्म जगत की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में एक है. दिलीप कुमार के साथ ही साथ पारो और चंद्रमुखी का किरदार निभाने वाली सुचित्रा सेन और वैजयंती माला के अभिनय को भी समीक्षकों द्वारा सराहा गया. इस फिल्म के जरिए दिलीप कुमार को सिनेमा जगत में एक सशक्त अभिनेता के तौर पर पहचान मिली.

आजाद (1955)
एस० एम० श्रीरामुलु नायडू निर्देशित इस फिल्म में दिलीप कुमार ने एक अमीर व्यक्ति और कुख्यात डाकू आजाद का किरदार निभाया है. फिल्म में शोभा (मीनाकुमारी) अगवा कर ली जाती हैं. उनके करीबी उन्हें ढूंढने की पूरी कोशिश करते हैं लेकिन उनका पता नहीं चलता है. फिर कुछ समय बाद जब शोभा वापस आती है और बताती है कि उसे आजाद ने बचाया और उसका काफी ख्याल रखा. वह आजाद से शादी करना चाहती है. हालांकि शोभा का परिवार इसके खिलाफ होता है.

नया दौर (1957)
आजादी के बाद की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म की कहानी, गानें और एक्टिंग लोगों को खूब पसंद आई थी. बी. आर चोपड़ा निर्देशित इस फिल्म में दिलीप कुमार ने शंकर नामक एक तांगेवाले की भूमिका अदा की है जो बस की वजह से तांगेवालों की जीविका खत्म होने के खिलाफ लड़ता है. फिल्म में वैजयंती माला, अजीत और जीवन भी मुख्य किरदार में हैं.

मधुमती (1958)
इस फिल्म में जहां दिलीप कुमार ने आनंद और देवेन्द्र नाम के दो व्यक्तियों का किरदार निभाया था तो वहीं वैजयंती माला ने मधुमती, माधवी और राधा नाम की तीन लड़कियों का रोल प्ले किया था. पुनर्जन्म पर आधारित इस फिल्म को लोगों ने इतना पसंद किया था कि आगे चलकर इस फिल्म की कई रीमेक फिल्में बनी जिनमें 'कुदरत', 'बीस साल बाद' और 'ओम शांति ओम' जैसी फिल्में शुमार हैं. दिलीप कुमार के निभाए दोनों ही किरदार लोगों को काफी पसंद आए थे. इस फिल्म में निभाए डबल रोल से उन्होंने फिल्म जगत में अपनी धाक जमा ली थी.

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