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यूपी: CM योगी के शहर में जानलेवा हुआ डेंगू, पूर्व भाजपा पार्षद की मौत से मचा हड़कम्प

[Edited By: Gaurav]

Thursday, 14th November , 2019 06:16 pm

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में डेंगू जानलेवा हो गया है. यहां पूर्व पार्षद की डेंगू से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प मच गया है. हालांकि जांच में 6,000 प्लेटलेट्स काउंट आने और रैपिड टेस्ट में डेंगू की पुष्टि के बाद भी अधिकारी अन्य वजहों से प्लेटलेट्स कम होने की बात कर रहे हैं. डेंगू से इस साल सीएम की सिटी में पहली मौत है।

गोरखपुर के शेखपुर के पूर्व पार्षद 65 वर्षीय मोतीलाल चौरसिया की 13 नवम्बर यानी कल लखनऊ में डेंगू से मौत हो गई. उनकी देखरेख करने वाले भतीजे सुधीर ने बताया कि गोरखपुर के कालीबाड़ी के पास रहने वाले भाजपा कार्यकर्ता और शेखपुर के पूर्व पार्षद मोतीलाल की तबियत सोमवार यानी 11 नवम्बर की शाम को बिगड़ी. परिजन उन्हें निजी अस्पताल में लेकर गए. प्रारंभिक जांच में प्लेटलेट्स महज 6,000 मिला. रैपिड कार्ड टेस्ट में डेंगू की पुष्टि हुई. मंगलवार 12 नवम्बर को हालत और खराब हो गई. बुधवार यानी 13 नवम्बर को अस्पताल प्रशासन ने उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया. परिजन उन्हें लखनऊ लेकर पहुंचे, जहां उनकी मौत हो गई.आपको बता दे कि शेखपुर वार्ड के पूर्व पार्षद मोतीलाल चौरसिया की डेंगू से मौत के बाद लोगों में दहशत का आलम है. भाजपा के स्‍थानीय नेता मुरली मनोहर ने बताया कि प्रशासन की ओर से लापरवाही तो हो ही रही है. वार्ड में डेंगू का जबरदस्त प्रकोप है. वार्ड में इस स्थिति की जानकारी नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को दी जा चुकी है. लेकिन, फागिंग का कोई इंतजाम अब तक नहीं हुआ है. चोक नालियों को साफ करना चाहिए. डेंगू से बचाव के लिए फागिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव भी होना चाहिए।

महानगर में इस सीजन में डेंगू के इलाज में अब तक 5000 यूनिट से अधिक प्लेटलेट्स खप चुकी हैं. इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग मानने को तैयार नहीं है. सीएमओ ने बुधवार को डॉक्टरों को नसीहत दी कि गंभीर मरीजों को ही प्लेटलेट्स चढ़ाएं. फिलहाल विभाग अभी तक 59 मरीजों में ही डेंगू की पुष्टि कर रहा है. पूर्व पार्षद की मौत के बाद डेंगू के इलाज को लेकर स्वास्थ विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी. सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा है कि यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका सामान्य इलाज होता है।

गोरखपुर के सीएमओ कृष्णकांत तिवारी  ने बताया कि इलाज में सामान्यतया पैरासिटामॉल दी जाती है. मरीज की स्थिति के अनुसार ही अन्य दवाइयां देने की आवश्यकता पड़ती हैं. डेंगू में सिर्फ क्रिटिकल मामलों में ही प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है. इस बात को भी देखा जाएगा की मरीज का प्लेटलेट्स 6,000 कैसे हुआ. कहीं वह पहले से हृदय और अन्‍य बीमारियों से ग्रसित तो नहीं थे, जिनमें प्‍लेटलेट्स का स्‍तर कम हो जाता है. क्‍योंकि प्‍लेटलेट्स कम होने से सिर्फ ये नहीं माना जा सकता है कि मरीज डेंगू से ग्रसित है. उन्‍होंने कहा कि आमतौर पर बुखार से पीडि़त मरीज खुद से दवा खा लेते हैं. उन्‍हें डाक्‍टर की सलाह से ही दवा लेनी चाहिए.

बुखार में सिर और आंखों में तेज दर्द हो, तो बुखार की दवा ही लें. दर्द की दवा न लें. क्‍योंकि वे खून को पतला करती हैं. जिससे प्‍लेटलेट्स कम होते हैं. ऐसे में ये जानलेवा हो सकता है. उन्‍होंने कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीम उस अस्‍पताल भी जाएगी, जहां भाजपा पार्षद मोतीलाल चौरसिया भर्ती थे. वहां से नमूने लेने के साथ उनके घर के लोगों और आसपड़ोस के लोगों से भी इस संबंध में बातचीत की जाएगी. ये भी चेक किया जाएगा कि मोहल्‍ले में डेंगू के लार्वा तो नहीं हैं.

डेंगू मादा एडीज मच्छर के काटने से होता है. इस मच्छर के काटने के 5 से 6 दिन बाद डेंगू के लक्षण दिखने लगते हैं. डेंगू के सबसे खतरनाक लक्षणों में हड्डियों का दर्द शामिल है. इसी वजह से डेंगू बुखार को ' हड्डी तोड़ बुखार' के नाम से भी जाना जाता है. जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एके पाण्डेय ने बताया कि जहां कहीं से भी डेंगू मरीज की सूचना मिल रही है, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंच कर सर्वे कर रही है. विभाग की टीम 5,302 घरों में डेंगू के लार्वा की जांच कर चुकी है. सबसे अधिक लार्वा इन घरों में रखे कूलर में मिले हैं. सबसे अधिक डेंगू के मामले वर्ष 2016 में सामने आए थे. सीएमओ ने बताया कि वर्ष 2016 में 168 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी. इस वर्ष अभी तक 59 में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है. वर्ष 2017 में डेंगू के 11 मामले जबकि 2018 में 25 मामले पुष्ट हुए थे.


ये लक्षण दिखे तो हो सकता है डेंगू


- त्वचा पर चकत्ते

- तेज सिर दर्द

- पीठ दर्द

- आंखों में दर्द

- तेज बुखार

- मसूड़ों से खून बहना

- नाक से खून बहना

- जोड़ों में दर्द

- उल्टी

- डायरिया

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