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एक्टर बनने के लिये बन गये ड्राईवर

[Edited By: Vijay]

Wednesday, 9th September , 2020 07:05 pm

कहते है कि कलाकार जन्म लेते है फिर जीवन के संघर्ष करके वो उस मुकाम पर पहुंच जाते है बात आज करते है महमूद की जो कि फिल्मों के लिये ही बने थे.महमूद साहेब के जो वालिद साहेब बाम्बे टॉकीज मे काम किया करते थे और वो बहुत ही अच्छे डांसर थे, महमूद साहेब उनके साथ जाया करते थे

उनको बचपन से ही एक्टिंग का शौक था तो उन्हे अपने वालिद साहेब की सिफारिश की वजह से किस्मत फिल्म मे अशोक कुमार के बचपन का रोल करने को मिल गया वहां से इनकी शुरुआत हुई पर समय बीतता गया वो सोच मे पड़ गये कि अब क्या करे 

महमूद साहेब ने निर्माता ज्ञान मुखर्जी के यहां बतौर ड्राईवर ये नौकरी करने लगे इस लालच मे की उनके साथ रहूंगा तो रोज मुझे स्टूडियो जाने का मौका मिलेगा..और शायद कोई चान्स मिल भी जाये और ऐसा हुआ भी एक बार जब वो स्टूडियो पहुंचे तो एक फिल्म की शूटिंग चल रही थी जिसमे मधुबाला जी का सीन था और एक जूनियर आर्टिस्ट अपने डॉयलाग ठीक से बोल नही पा रहा था कई रीटेक हो चुके थे, तो महमूद साहेब से रहा नही गया और सबके सामने बोल पड़े कि डायरेक्टर साहेब अगर आप मुझे बोलने का मौका दे तो मै ये बोलकर दिखा सकता हूं तो डायरेक्टर साहेब ने बोला अच्छा- चलो तुम बोल कर दिखाओं ,और महमूद साहेब ने वो डॉयलाग जो कि काफी लम्बा था न सिर्फ बोला बल्कि जान डाल दी, और वो शॉट एक बार मे ओके हो गया सभी ने तालियां बजाई..उस काम के लिये उन्हे 100 रुपये मिले जो कि उनके पूरे महिने की तनख्वाह जो कि 75 रुपये थी उस समय से भी ज्यादा थे...उसके बाद उन्होने ड्राईवर की नौकरी छोड़ी  और जूनियर आर्टिस्ट एशोसियेशन मे अपना नाम दर्ज करवा लिया और फिर उन्हे फिल्मों मे काम मिलने लगा..आज बताने की जरुरत नही की महमूद साहेब का नाम हिन्दी सिनेमा इतिहास के सबसे बड़े कॉमेडियन के रुप मे होती है...

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