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चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय की तरफ से फिर भड़काऊ बयान

[Edited By: Rajendra]

Wednesday, 24th June , 2020 03:20 pm

भारत और चीन की सेनाओं के लद्दाख में पीछे हटने की सहमति के एक दिन बाद ही चीन की तरफ से फिर भड़काऊ बयान सामने आया है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने गलवान घाटी में हुए चीन-भारत सीमा संघर्ष के लिए भारतीय पक्ष को जिम्मेदारी पूरी तरह से जिम्‍मेदार बताया है।

चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू कियान ने हिसक झड़प के लिए भारत को दोषी बताते हुए कहा कि हम सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की उम्मीद करते हैं। वू ने कहा कि घटना पूरी तरह से भारतीय पक्ष के एकतरफा उकसावे और दोनों पक्षों के बीच आम सहमति के उल्लंघन के कारण हुई।

पीएलए के वरिष्ठ कर्नल और रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू कियान ने कहा, ' चौंकाने वाली बात यह है कि 15 जून की शाम को भारतीय सीमा रेखा के सामने के सैनिकों ने खुलेआम दोनों पक्षों द्वारा सहमति का उल्लंघन किया। वह लाइन के आगे बढ़े, LAC को फिर से पार किया और जानबूझकर चीन पर हमला किया' उसने कहा, 'मौके पर बातचीत करते हुए चीनी अधिकारियों पर भारतीय पक्ष द्वारा अचानक हिंसक हमला किया गया। इसने दोनों पक्षों के अधिकारियों और सैनिकों के बीच तीव्र शारीरिक झड़प को जन्म दिया, जिससे सैनिक हताहत हुए।

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने बुधवार को कहा कि 15 जून को गालवान घाटी में 'पूरी तरह से वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीनी तरफ' (LAC) पर हमला हुआ और भारतीय सैनिकों पर लाइन पार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 'इस घटना के लिए भारत जिम्‍मेदार है और चीन को लेकर जो बाते कहीं जा रही है वह पूरी तरह से झूठ है।'
चीन की तरफ से किए गए इस हमले में 20 भारतीय सैनिकों शहीद हो गए थे, लेकिन चीन ने अभी तक अपने हताहतों सैनिकों की संख्या का खुलासा नहीं किया है। बीजिंग में रक्षा मंत्रालय ने चीन की 'गलवान वैली पर संप्रभुता' दोहराई।

हालांकि, भारत ने जोर देकर कहा है कि चीनी ने जिसने एलएसी पर भारतीय सैनिकों पर हमला किया। चीन अपने तम्बू वहां से नहीं हटा रहा था, जिसको लेकर विवाद शुरू हुआ। वरिष्ठ कर्नल वू ने कहा, 'चीनी जवानों ने अपने बचाव के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं और भारतीय पक्ष को राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करते हुए प्रभावी ढंग से जवाब दिया। यह घटना पूरी तरह से भारत द्वारा आम सहमति के उल्लंघन और एकतरफा उकसावे के कारण हुई।'

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