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भारत के कड़े रूख के बाद चीन ने लद्दाख की पैंगोंग लेक विवाद को सुलझाने की कूटनीति पहल की

[Edited By: Rajendra]

Sunday, 24th May , 2020 05:04 pm

भारत के तल्ख तेवर को देखते हुए चीन को लगने लगा है कि अब मामला बढ़ गया है कि इसे स्थानीय स्तर पर सेनाओं द्वारा हल नहीं किया जा सकता है, लिहाजा राजनयिक पहल जरूरी है।

भारत के कड़े रूख के बाद चीन ने इस विवाद का सुलझाने की कूटनीति पहल की है। जानकारी के मुताबिक 'एक सप्ताह के भीतर इस मामले को सुलझा लिया जाएगा। कूटनीतिक बातचीत जारी है। भारतीय सेना ने अपने क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सेना तैनात कर दी है और चीन ने भी अपने क्षेत्र में तैनाती की है।'

आपको बता दें कि एलएसी पर चीन और भारत के बीच बढ़ते तनाव ने दोनों देशों को हजारों की संख्या में सैनिकों की तैनाती बढ़ाने के लिए मजबूर कर दिया है। चीनी और भारतीय दोनों सेनाएं उन स्थानों पर हाई अलर्ट पर हैं, जहां तनाव और झड़पें हुई थीं। भारतीय सेना ने साफ शब्दों में कह दिया है कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी प्रकार की चीनी घुसपैठ की अनुमति नहीं देंगे और उन क्षेत्रों में गश्त को और भी मजबूत करेंगे।

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में शुरू हुआ तनाव बढ़ता ही जा रहा है। अब दोनों देशों ने अपने-अपने सैनिकों को भारी संख्‍या में वहां तैनात कर दिया है।

चीन के तेवर देख भारत भी पैगोंग झील और गल्वान घाटी में सैनिकों की तैनाती लगातार बढ़ा रहा है। कई इलाकों में भारत की पोजिशन चीन से बेहतर है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने करीब 1300 सैनिक यहां पर तैनात किए हैं। भारत भी उसी हिसाब से सैनिकों की तैनाती कर रहा है। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार भारत ने लेह इन्‍फैट्री डिवीजन की कुछ यूनिट्स को आगे भेजा है। कई और बटालियंस भी लद्दाख में मूव कराई गई हैं।

5 मई को पूर्वी लद्दाख में करीब 250 चीनी सैनिक और भारतीय जवान आपस में भिड़ गए। इसमें दोनों ओर से करीब 100 सैनिक घायल हुए। कुछ दिन बाद उत्‍तरी सिक्किम में फिर दोनों देशों के सैनिक भिड़े। इसके बाद से ही पूर्वी लद्दाख तनाव का केंद्र बना हुआ है। यहां के दो पॉइंट्स पर फोकस है। पैंगोंग लेक और गल्वान घाटी। झील का उत्‍तरी किनारा हथेली जैसा है जिसके 8 भाग हैं जिसे आर्मी 'फिंगर्स' कहती है। भारत कहता है कि LAC 8वीं फिंगर से शुरू होती है जबकि चीन कहना है कि दूसरी से। चीन ने इस पॉइंट पर ब्‍लॉकिंग पॉइंट्स भी बना लिए हैं। भारत चौथी फिंगर तक के हिस्‍से को कंट्रोल करता है। चीन ने छह साल पहले, चौथे हिस्‍से पर परमानेंट कंस्‍ट्रक्‍शन की कोशिश की थी मगर भारत के कड़े विरोध के बाद उसे ढहा दिया गया।

सीमा पर चीन ने हमेशा सैनिकों की तैनाती रखी है। भारत जरूरत पड़ने पर सैनिक भेजता है

पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग लेक एक लंबी, गहरी और चारों तरफ जमीन से घिरी झील है। करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह झील लेह के दक्षिण-पूर्व में 54 किलोमीटर दूर स्थित है। 135 किलेामीटर लंबी यह झील करीब 604 वर्ग किलोमीटर में किसी बूमरैंग की तरह फैली है।
सर्दियों में यह झील जम जाती है। यह झील चुशूल अप्रोच के रास्‍ते में पड़ती है। यह वो रास्‍ता है जिसे चीन हमला करने के लिए इस्‍तेमाल कर सकता है। 1962 की जंग में भी चीन ने यही से बड़ा हमला किया था।

इस बीच भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने शुक्रवार को लद्दाख में 14 कोर के मुख्यालय लेह का दौरा किया और चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बलों की सुरक्षा तैनाती की समीक्षा की। उन्होंने उत्तरी कमान (एनसी) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाई. के. जोशी, 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और अन्य अधिकारियों के साथ एलएसी की जमीनी स्थिति को जाना।

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